बिहार विधानसभा चुनाव में संभवत: विपक्ष के बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर सत्तारूढ़ गठजोड़ की तरफ से ऐन चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में स्वरोजगार के लिए डाले गए दस हजार रुपये भारी पड़े हैं और राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 243 सदस्यीय विधानसभा की 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है जो एक्जिट पोल के अनुमानों से भी अधिक है।
रात आठ बजे तक चुनाव आयोग की वेबसाईट पर घोषित नतीजों/रुझानों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी 76 सीटें जीत चुकी थी और 14 पर आगे चल रही थी। पार्टी 90 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है जबकि उसकी सहयोगी और जनता दल (यूनाइटेड) 60 सीटें जीत चुकी थी और 25 पर आगे चल रही थी यानि इसके 85 सीटों पर जीतने की संभावना थी। दोनों पार्टियों ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
एनडीए के अन्य घटक दलों में तीसरी प्रमुख पार्टी लोजपा (आर) 14 सीटें जीत चुकी थी और 5 पर आगे चल रही थी, जीतन राम मांझी की हम 4 सीटें जीत चुकी थी और एक सीट पर आगे चल रही थी और उपेन्द्र कुशवाहा का राष्ट्रीय लोक मोर्चा दो सीटें जीत चुका था और दो पर आगे था।
दूसरी तरफ महागठबंधन को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है और राष्ट्रीय जनता दल (25 जीत व आगे), कॉंग्रेस (6 जीत व आगे) के अलावा वामपंथी दलों व अन्य दलों को मिलाकर इस गठजोड़ के चालीस के आँकड़े को छूने की भी संभावना नहीं है।
चुनाव मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) और राहुल गांधी समेत विपक्ष की तरफ से भाजपा व चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” के आरोपों की छाया में हुआ था। विपक्ष ने नीतीश कुमार के 20 वर्षों के शासन में बेरोजगारी, गरीबी, पलायन जैसे मुद्दे भी उछाले थे और हर घर नौकरी का वादा किया था।
जबकि सत्तारूढ़ गठजोड़ ने “सुशासन” और “विकास” के अलावा लालू यादव के कार्यकाल के “जंगलराज” और हाल के वर्षों में “घुसपैठ” जैसे मुद्दे उछाले थे। हालांकि संभवत: इन सभी पर भारी पड़ा एनडीए का चुनाव से ऐन पूर्व महिलाओं के खातों में स्वरोजगार के नाम पर दस-दस हजार रुपये डालने का फैसला। वास्तव में दस-दस हजार महिलाओं के खाते में डाले जाने के चंद घंटों बाद ही केन्द्रीय चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों की घोषणा की थी।