अब कानून नहीं, बुलडोजर का राज दिखेगा : दीपांकर भट्टाचार्य

भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि अब बिहार में कानून का राज नहीं, बुलडोजर राज दिखेगा।वह वरिष्ठ नेता व किसान आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर का. विशेश्वर प्रसाद यादव की हाजीपुर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस बार की सरकार पिछली सरकार नहीं है। नीतीश कुमार केवल मुख्यमंत्री हैं, गृहमंत्री नहीं। उनसे गृह मंत्रालय छीनकर सम्राट चैधरी को दे दिया गया है। उनके सामने उत्तरप्रदेश का मॉडल है – बुलडोजर राज। अब कानून नहीं, बुलडोजर का राज दिखेगा। यूपी में माफिया राज खत्म करने के नाम पर सवर्ण सामंती ताकतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, वे सत्ता-सरंक्षित हैं, लेकिन दलित-पिछड़े-अल्पसंख्यक समुदाय पर बुलडोजर लगातार चल रहे हैं। बिहार में भी यही होने वाला है।

माले महासचिव ने कहा कि चुनाव के दौर में ही दुलारचंद्र यादव की हत्या होती है। एक उपमुख्यमंत्री कहते हैं कि छाती पर बुलडोजर चला देंगे, गरीबों को घर से निकलने नहीं देंगे। कुछ लोग तय कर चुके हैं कि बिहार को 90 के दशक के दौर में वापस ले जाना है. तो, हमें उसी दृढ़ता से ऐसी ताकतों के खिलाफ कदम-कदम पर लड़ते रहना होगा।

उन्होंने कहा कि हम एक खतरनाक दौर में प्रवेश कर रहे हैं। एक झटके में 70 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जिनमें 40 लाख नाम बिल्कुल गलत तरीके से हटाए गए। साथ ही 20-25 लाख नए नाम जोड़ दिए गए। इससे हर बूथ का संतुलन बदल गया है – और यह सब चुनाव के ठीक पहले हुआ है।

भट्टाचार्य ने कहा कि अगर चुनाव से पहले 30 हजार करोड़ रुपये किसी भी सरकार द्वारा अलग-अलग नाम पर लोगों के बीच बांट दिए जाएँ, जबकि 4 साल तक किसी की बात नहीं सुनी जा रही थी, और ठीक चुनाव से पहले यह सब हो जाए – तो इसका क्या परिणाम होगा, यह सबके सामने है। बिहार चुनाव में खुलेआम नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। पूरा चुनावी तंत्र मजाक बनकर रह गया।

माले नेता के अनुसार चुनाव के दौरान बातें हुईं – इंडस्ट्रियल फैक्टरी लगेगी, 10 हजार नहीं 2 लाख रुपये मिलेंगे, बाढ़ का समाधान हो जाएगा, चीनी मिलें खोल दी जाएंगी। इनसे हिसाब-किताब लेने का समय आ गया है। जैसे ही बिहार का चुनाव जीत लिया, मोदी जी ने कहा कि गंगा बिहार से बंगाल की ओर बढ़ेगी। मोदी की गंगा सत्ता की गंगा है, लोगों की आस्था की गंगा नहीं। इसे लेकर वे बंगाल जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बिहार चुनाव के नतीजे आते ही चारों श्रम कोड लागू कर दिए गए – जिसमें 8 घंटे का काम 12 घंटे का कर दिया गया। हड़ताल करना लगभग असंभव बना दिया गया। काम की कोई सुरक्षा नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि ये श्रम कोड काम की सुरक्षा के लिए हैं। बेसिक पे 50 प्रतिशत कर दिया गया। 26 नवंबर को इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन का आह्वान किया गया है। उन्होंने लोगों से इसे सफल बनाने की अपील की।

भट्टाचार्य ने कहा कि 18 नवंबर को खबर आई कि माओवादी नेता हिडमा की हत्या कर दी गई। माओवादियों की लगातार हत्याएं हो रही हैं। बहुत सारे नेता सरेंडर कर रहे हैं लेकिन हिडमा-जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी मूल से आकर जल-जंगल-जमीन की हिफाजत के लिए अडानी की लूट के खिलाफ लड़ रहे थे-उन्हें मारने से पहले उनके घर जाकर उनकी बूढ़ी मां से बयान दिलवाया गया।

मां ने अपील की कि बेटा घर लौट आए लेकिन उसे घर लौटने नहीं दिया गया – उसकी हत्या कर दी गई। पूरा बस्तर रो रहा है। यह सब क्या है? श्रम कोड भी अडानी के लिए, हिडमा की हत्या भी अडानी के लिए।

उन्होंने कहा कि आज देश के संघीय ढांचा व लोकतंत्र खतरे में है. मजदूरों-किसानों के अधिकार, महिलाओं की आजादी खतरे में है। हम लोग लड़ते हुए इसका मुकाबला कर रहे हैं। यह निश्चित है कि यदि अंग्रेजों को भगाना संभव था – जब दुनिया भर में उनकी तूती बोलती थी – तो आज की इस तानाशाही को रोकना भी संभव है।

उन्होंने कहा कि चुनाव में जो भी हुआ – वह अपनी जगह है। उसे समझेंगे। वोटचारी-सीनाजोरी के खिलाफ लड़ेंगे। चुनाव में महिलाओं का गलत इस्तेमाल किया गया। उन्हें झांसा देकर वोट लिया गया। फिर से सामाजिक उत्पीड़न बढ़ रहा है, बुलडोजर राज उभर रहा है। इसे भी रोकेंगे। अडानी की लूट को भी रोकेंगे।

विदित हो कि चुनाव के दौरान सुपौल में काम करते हुए का. विशेश्वर प्रसाद यादव की अचानक मौत हो गई थी। वे मूलतः वैशाली के रहने वाले थे, जबकि चुनाव में सुपौल का काम देख रहे थे।

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