आशाओं ने मार्च निकाला, 15 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन संबद्ध ऐक्टू ने संविधान दिवस पर प्रदेशव्यापी आह्वान पर बालसन चौराहा से जिलाधिकारी कार्यालय तक चेतावनी मार्च निकालकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी मार्च के दौरान ‘आज करो अर्जेंट करो हमको परमानेंट करो’, ‘आशा व आशा संगिनी को राज्य कर्मचारी का दर्ज़ा दो’, ‘2000 में दम नहीं, 21000 से कम नहीं’ नारे लगे।

सरकार द्वारा लाए गए मजदूर विरोधी 04 श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर ऐक्टू प्रदेश सचिव कॉ अनिल वर्मा ने कहा कि प्रदेश में आशा और संगिनी वर्षों से राज्य और केंद्र के अनेक कार्यों की घोषित प्रोत्साहन राशियों से वंचित हैं और सरकारों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वादाखिलाफी की शिकार हैं।

2019 से लम्बित भुगतानों की अदायगी के सम्बन्ध में पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से प्रदेश की आशा और संगिनी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रही हैं। किंतु उनकी आवाज को सुनना भी उचित नहीं समझा गया।

प्रधान मंत्री जी की सबसे बड़ी लोकहिताय योजना आरोग्य भारत के सपने को साकार करने में गोलडान आयुष्मान कार्ड, आभा आई डी बनाने में किए गए वर्षों से अब तक किए गए योगदान के रु 225 करोड़ में एक रुपए भी नहीं दिया गया। शायद आशा और संगिनी के साथ इन दोनों कार्यों के लिए आपके मातहतों द्वारा की गई क्रूरता और उत्पीड़न याद नहीं होगा।

आशाओं ने कहा कि 6 अक्टूबर को माननीय मुख्यमंत्री और 13 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री को मांगपत्र भेजे गए। 1 नवम्बर को पूर्ण कार्यबंदी की गई लेकिन इसके बाबजूद भी अभी तक भुगतान भी नहीं हुआ और न ही अन्य मांगो का ही समाधान किया गया।

अगर समय रहते वार्ता बुलाकर मांगो को पूरा नहीं किया गया तो हड़ताल के लिए विवश होना पड़ेगा।

आशाओं ने 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

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