झारखंड का देवघर जिला अंतर्गत है मधुपुर प्रखण्ड, जिसके अंतर्गत आते हैं तीन गांव घघरजोरी, कल्हाजोर एवं रजदाहा, जो जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर और प्रखण्ड मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर हैं। जहां विगत 29 नवम्बर को पंचायत स्तरीय जनसुनवाई हुई।
इसके आलोक में राज्य के मनरेगा एवं खाद्य सुरक्षा योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण विशेषज्ञ जेम्स हेरेंज की अगुवाई में तीनों गांव के 16 टोलों में घर-घर जाकर एक सर्वे किया गया, जिसके बाद इलाके में सरकारी उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक काली तस्वीर उभरकर सामने आई।
सर्वे में जो तस्वीर सामने उभरकर आईं वह बताती हैं कि सरकारी स्तर से तीन करोड़ रुपये खर्च के बावजूद तीन गांव के 279 परिवारों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं तीनों गांव में अध्ययनरत 6 विद्यालय के छात्र-छात्राओं तथा 5 आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भी शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है।
जबकि भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना जल जीवन मिशन में दर्ज ऑनलाइन रिकॉर्ड 3 गांव के लक्षित 1904 परिवारों में से 1277 परिवारों के घरों में जल नल योजना से आच्छादित कर दिए जाने का दावा किया गया है।
राशन डीलर कंचन एवं पूजा स्वयं सहायता समूह द्वारा कार्ड धारकों के खाद्यान्न मात्रा में हरेक महीना व्यापक राशन कटौती एवं ऊपर से प्रयेक राशन वितरण के दौरान प्रति कार्ड 10 रूपये अवैध वसूली किए गये हैं।
जेम्स हेरेंज की अगुवाई में तीनों गांव घघरजोरी, कल्हाजोर एवं रजदाहा के 16 टोलों में घर – घर जाकर 455 परिवारों से एकत्रित तथ्यों का विश्लेषण कर प्रखण्ड के अधिकारियों, ग्राम पंचायत मुखिया, जल सहिया एवं प्रभावित परिवारों के समक्ष अंकेक्षण प्रतिवेदन मुद्दावार रखी गई।
भुक्तभोगी परिवारों ने अधिकारियों के समक्ष अपने बयान दर्ज कराये और पुष्टि हुई कि उनके साथ नाइंसाफ़ी हुई है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार तीनों गांव को मिलाकर कुल 40 पेयजल परियोजनाओं का काम कराया गया है। उपस्थित सहायक अभियंता की माने तो 80% निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। जिनकी कुल लागत 540.53 लाख है जिसमें अब तक 299.83 करोड़ राशि खर्च हो चुकी है।
जनसुनवाई में यह बात भी सामने आई कि जो पेयजल के प्रकल्प विगत एक वर्ष से ख़राब पड़े हैं अथवा पर्याप्त भूगर्भ जल न मिलने की वजह से चालू ही नहीं हो सके, झारखण्ड पेयजल एवं स्वच्छता विभाग उन पेयजल स्रोतों के भी नमूने लेकर पेयजल जाँच परिणाम सितम्बर 2025 में अपने वेबसाइट में दर्ज किए हुए है। जाहिर है ऐसे फर्जी जाँच रिपोर्ट जारी कर सैकड़ों लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है, जो अत्यंत गंभीर मामला है।
इस दौरान घघरजोरी के 53 राशनकार्ड धारकों ने गांव के राशन डीलर पूजा एवं कंचन स्वयं सहायता समूहों पर औसतन 6 किलो राशन कटौती की बातें रखीं तथा प्रति वितरण प्रति कार्ड 10 रूपये राशि लेने का आरोप लगाया। इसके लिए उन सबने जिला शिकायत निवारण अधिकारी के नाम शिकायत आवेदन भी लिखा है।
एक मोटे आकलन के अनुसार दोनों डीलर समूह 40-40 हजार के खाद्यान्न की कालाबाजारी कर देते हैं। घघरजोरी आंगनबाड़ी केंद्र 1 एवं 2 के महीनों बन्द रहने की शिकायतों की पुष्टि भी ग्रामीणों ने की।
उपस्थित अधिकारियों जिनमें पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सहायक अभियन्ता, सहायक प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी एवं बाल विकास परियोजना मौजूद थे।
सहायक अभियन्ता ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की कि वे मामले की गम्भीरता के मद्देनजर आगामी 15 दिनों के भीतर सभी ख़राब पड़े पेयजल श्रोतों की मरम्मत कार्य सुनिश्चित कराएंगे।
आपूर्ति पदाधिकारी ने कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर राशन डीलरों द्वारा कार्डधारकों से अवैध तरीके से ली गई राशि की वापसी एवं कटौती किए गए राशन का पुनर्वितरण सुनिश्चित करेंगे।
इसी तर्ज पर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने भी आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।
क्या है जल जीवन मिशन?
बताते चलें कि जल मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2019 को लाल किले से की गई थी। राज्यों के साथ साझेदारी से चलाए जा रहे इस मिशन का लक्ष्य 5 वर्षों के अन्दर देश के प्रत्येक गांव के हर घर को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है।
ऐसे घरेलू कनेक्शन से प्रयेक ग्रामीण परिवार को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर निर्धारित गुणवत्ता (बीआईएस 10500 : 2012) के पेयजल पर्याप्त मात्रा कम से 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन उपलब्ध कराना है। यह मिशन इस राज्य में झारखण्ड पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
देवघर जिले में पेयजल संकट गहराने के खतरनाक संकेत

इण्डिया स्टेट ऑफ़ फ़ॉरेस्ट रिपोर्ट 2019 देवघर जिले की कुल वनभूमि 2447 वर्ग किलोमीटर में से सघन वन क्षेत्र तनिक भी नहीं है, मध्यम घने जंगल का आकार 14.41 वर्गकिलोमीटर और खुला वन क्षेत्र 189.30 वर्गकिलोमीटर है। वहीं इसरो की रिपोर्ट देवघर जिले के लिए अत्यधिक डरावनी है। यहां की कुल भूमि का 99.80 % भाग मरुस्थलीकरण में तब्दील हो चुकी है।
उपरोक्त दोनों कारक भूजल स्तर को प्रभावित करता है। केन्द्रीय भू-जल बोर्ड की रिपोर्ट ने 2013 के मुकाबले 2022 में 2 मीटर तक जल स्तर नीचे चले जाना दर्ज किया है। यह स्थिति अकेले देवघर जिले की नहीं है बल्कि राज्य के अधिकांश जिलों में पेयजल संकट की यही स्थिति है।