भीड़ हिंसा स्वीकार नहीं, बिहार को सांप्रदायिक हिंसा की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे: माले

पटना। नवादा ज़िले के रोह थाना क्षेत्र अंतर्गत भट्ठा गांव में 5 दिसंबर, 2025 को मुस्लिम कपड़ा फेरीवाले मोहम्मद अतहर हुसैन की बर्बर मॉब लिंचिंग के खिलाफ आज पूरे बिहार में भाकपा (माले) और इंसाफ मंच के बैनर तले विरोध दिवस आयोजित किया गया।

राजधानी पटना में बुद्ध स्मृति पार्क के पास आयोजित प्रतिवाद सभा में नागरिक समाज के कई लोगों ने शिरकत की। पटना के अलावा नवादा, नालंदा, दरभंगा, आरा सहित कई जिलों में प्रतिवाद मार्च निकाले गए।

पटना में आयोजित सभा को ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, फुलवारी के पूर्व विधायक गोपाल रविदास, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, एमएलसी शशि यादव, पीयूसीएल के राज्य सचिव सरफराज, मीरा दत्त, भाकपा (माले) की युवा नेत्री दिव्या गौतम सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। सभा का संचालन एआईपीएफ के कमलेश शर्मा ने किया, जबकि अध्यक्षता भाकपा (माले) पटना नगर सचिव जितेंद्र कुमार ने की।

इस मौके पर धीरेंद्र झा, उमेश सिंह, शंभूनाथ मेहता, रामबली प्रसाद, रणविजय कुमार, अन्य मेहता, राखी मेहता, मुर्तज़ा अली, संजय कुमार, पुनीत पाठक, कुमार दिव्यम, वंदना प्रभा, संतोष आर्या, डॉ. अलीम अख्तर, फुरकान अंसारी, सत्येंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि: 

* मोहम्मद अतहर हुसैन की हत्या में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी कर उन्हें कड़ी सज़ा दी जाए।

* पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्याय और पर्याप्त मुआवज़ा दिया जाए।

* झूठे मुकदमों को रद्द किया जाए तथा दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

* बुलडोज़र कार्रवाई और भीड़तंत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए।

* गृह मंत्री सम्राट चौधरी राज्य की कानून-व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से जवाब दें।

वक्ताओं ने कहा कि यह घटना बिहार में कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह भाजपा द्वारा बिहार में लगातार बनाए जा रहे सांप्रदायिक माहौल का जीवंत उदाहरण है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद राज्य में मॉब हिंसा और बुलडोज़र कार्रवाई की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। यदि एनडीए सरकार बिहार में ‘योगी मॉडल’ लागू करने का सपना देख रही है, तो यह राज्य की सामाजिक एकता और लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होगा, जिसका जोरदार प्रतिरोध किया जाएगा।

मोहम्मद अतहर हुसैन को केवल मुस्लिम होने के संदेह में घेरकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। उन्हें बेरहमी से पीटा गया, गर्म औज़ार से दागा गया, कान काटे गए, उंगली तोड़ी गई और उनके निजी अंगों में पेट्रोल डाला गया। अधमरी हालत में छोड़ दिए जाने के बाद उल्टे उन पर चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। इलाज के दौरान 12 दिसंबर, 2025 को उनकी मौत हो गई। इस मौत के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और चिकित्सकीय लापरवाही सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

घटना के बाद भट्ठा गांव और आसपास के इलाकों में भय का माहौल है। गांव में रह रहे 10–15 मुस्लिम परिवार डरे-सहमे हैं और खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं हैं। अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है और उनकी पृष्ठभूमि की गंभीर जांच अब तक नहीं की गई है।

भाकपा (माले) और इंसाफ मंच बिहार की जनता से अपील करते हैं कि संविधान, लोकतंत्र और इंसाफ की रक्षा के लिए आगे आएं।

भीड़तंत्र, नफरत और दमन की राजनीति के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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