आनंद पटवर्धन, राकेश शर्मा जैसे फ़िल्मकारों ने केरल फिल्मोत्सव में केंद्र के बैटलशिप पोटेमकिन समेत 19 फिल्मों के प्रतिबंध को लेकर केंद्र सरकार के आगे घुटने टेकने की निंदा की है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र ने फिल्मोत्सव में रूसी क्लासिक बैटलशिप पोटेमकिन और फिलिस्तीन की कुछ फिल्मों समेत 19 फिल्मों को प्रदर्शन के लिए मंजूरी रोकी थी जिसके बाद केरल सरकार ने इस प्रतिबंध को न मानने की घोषणा की और कहा कि सभी फिल्मों का प्रदर्शन होगा। बाद में केंद्र ने बैटलशिप पोटेमकिन समेत 13 फिल्मों के प्रदर्शन की मंजूरी दे दी लेकिन फिलिस्तीन की फिल्मों समेत छह फिल्मों पर प्रतिबंध बरकरार रखा। फिल्मोत्सव ने इन फिल्मों का प्रदर्शन नहीं किया और फिल्मोत्सव के निदेशक विश्वविख्यात साउन्ड डिजाइनर रेसूल पोकुट्टी ने निर्णय का बचाव करे हुए कहा कि इन फिल्मों के प्रदर्शन से विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती थी।
फ़िल्मकारों के बयान में कहा गया है कि वह केंद्र की सेन्सरशिप और केरल सरकार के केंद्र के आगे घुटने टेकने की निंदा करते हैं। बयान में यह भी कहा गया है कि सेन्सरशिप के मुद्दे के अलावा वह सभी भारतीय नागरिकों से फिलिस्तीन में नरसंहार के खिलाफ खड़े होने की अपील भी करते हैं।
पटवर्धन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि केरल सरकार को, जिसने पहले सेन्सरशिप के खिलाफ कड़ा रुख लिया था, सभी 19 फिल्में दिखानी चाहिए थीं और छह फिल्मों पर केंद्र के बैन के बारे में पीछे नहीं हटना था।
बयान पर हस्ताक्षरकर्ताओं में देवशीष मखीजा, शाज़िया इकबाल, रीमा दास, हनी त्रेहान जैसे कई फिल्मकार शामिल हैं।
इससे पूर्व इंडियन पीपल इन सॉलिडेरिटी विद पैलेस्टाइन ने सोशल मीडिया में बयान जारी कर फिल्मोत्सव में इस्राइली प्रोपगेंडा फिल्म “सी” दिखाने पर सवाल किया था। आईपीएसपी के अनुसार केंद्र की सेन्सरशिप के खिलाफ जनता का खुला समर्थन केरल सरकार को मिला था और फिल्मोत्सव ने फिलिस्तीन समर्थक होने का दावा किया था फिर इसी फिल्मोत्सव में इस्राइल के दुष्प्रचार से भरी फिल्म दिखाई गई, क्यों? आईपीएसपी ने केरल सरकार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से इस पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।