जेडपीएससी अध्यक्ष मुकेश का ‘अपहरण’, पंजाब की आप सरकार का दोहरा चरित्र – जन हस्तक्षेप 

ज़मीन प्राप्ति संघर्ष समिति (जेडपीएससी) के अध्यक्ष मुकेश मलाउद को महाराष्ट्र से लौटते समय मंगलवार को निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन दिल्ली से पंजाब पुलिस ने ‘अपहरण’ कर लिया! इस कथित गिरफ्तारी के बाद जेडपीएससी नेता को बिना ट्रांजिट रिमांड के ही पुलिस पंजाब ले गई। इस तरह से गिरफ्तारी और बिना ट्रांजिट रिमांड के दूसरे स्टेट में ले जाना गैर कानूनी और अपहरण जैसा है। जन हस्तक्षेप गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए मांग करता है कि पंजाब सरकार तत्काल उन्हें रिहा करने का आदेश जारी करे।

संगरूर पुलिस ने मुकेश मलाउद को कई पुराने मामलों, जिसमें 11 साल पुराने आंदोलन से भी संबंधित मामले हैं, गिरफ्तार किया है। जेडपीएससी नेता को उस दिन गिरफ्तार किया गया, जब भगवंत मान सरकार पंजाब विधानसभा में मनरेगा कानून केंद्र सरकार द्वारा समाप्त किए जाने के मुद्दे पर चर्चा का दिखावा कर रही थी। पंजाब सरकार ने वीबी- जीरामजी योजना राज्य में लागू ना करने का घोषणा की है।

जन हस्तक्षेप के संयोजक डॉक्टर विकास बाजपेई और सहसंयोजक अनिल दुबे ने यहाँ जारी बयान में बताया कि जन हस्तक्षेप ने जेडपीएससी के आंदोलनों के दौरान बीते डेढ़ दशक में कई बार अपनी जांच टीम भेजी थी, जिसमें 2014 का बलाद कलां का आंदोलन भी शामिल था, जब जमींदारों ने अवैध रूप से दलितों को मिलने वाली भूमि हथिया ली थी।

इस वर्ष बीते मई माह में जेडपीएससी ने पूर्ववर्ती जींद रियासत से संबंधित 927 एकड़ भूमि पर अधिकार का दावा करने के लिए संघर्ष का आह्वान किया था। 20 मई को हजारों भूमिहीन मजदूर आंदोलन में शामिल हुए, लेकिन पुलिस ने बर्बर दमन करते हुए 300 लोगों को जेल में बंद कर दिया। बाद में आंदोलन के दबाव में उन्हें रिहा किया गया।

उस आंदोलन में मुकेश खुद उपस्थित नहीं थे, लेकिन अब पुलिस उन्हें भी शामिल बता रही है। जन हस्तक्षेप ने इस मामले में भी अपनी जांच टीम के जरिए हस्तक्षेप किया और रिपोर्ट जारी की थी, जिसका निष्कर्ष था कि सरकार, प्रशासन, जमींदार और भू माफियाओं का एक गठजोड़ है, जो भूमिहीन मजदूरों को भूमि प्राप्त करने के कानूनी अधिकारों से उनको वंचित कर रहा है। इस रिपोर्ट का राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी संज्ञान लिया था। 

दरअसल पंजाब की सरकारें हमेशा से दलित और भूमिहीन मजदूरों के जमीन पर अधिकार के सवाल को नकारती रही है और जमींदारों का पक्ष लेती रही है। तमाम वादों के बावजूद उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं दिया जा रहा। वहीं दूसरी ओर अधिकांश भूमिहीन मजदूर ही मनरेगा श्रमिक हैं।

मनरेगा समाप्ति के बाद अब पंजाब सरकार दोहरी चाल चल रही है। एक तरफ तो वह मनरेगा को समाप्त किए जाने का विरोध विधानसभा में दिखावे के लिए कर रही है, तो दूसरी तरफ दलितों और भूमिहीन मजदूरों के कानूनी अधिकारों का बर्बरता पूर्वक दमन कर रही है। 

जन हस्तक्षेप मुकेश मलाउद की रिहाई के लिए देश के बुद्धिजीवियों, जन अधिकार और मानवाधिकारवादी संगठनों के साथ ही समाज के विभिन्न तबकों से अपील करता है कि वह जन विरोधी मान सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाएं। 

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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