जनता की लड़ाई सड़क पर लड़ी जाएगी : अमित चावड़ा

अहमदाबाद। नए साल की पूर्व संध्या पर गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मीडिया समक्ष प्रेसवार्ता के मध्य से वर्ष 2025 का संगठन का लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा कि “वर्ष 2026 में कांग्रेस राज्यभर में जनसंवाद और आंदोलनों के ज़रिये जनता के मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम करेगी।”

चावड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने सौराष्ट्र क्षेत्र में “किसान जन आक्रोश यात्रा” के माध्यम से न केवल किसानों को जागृत और संगठित किया, बल्कि बेमौसम बारिश से हुए फसली नुकसान पर सरकार को मुआवज़ा देने के लिए मजबूर किया। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2025 के दौरान किसानों से निरंतर संवाद कर पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मज़बूत करने का प्रयास किया है।

यह किसान जन आक्रोश यात्रा सोमनाथ से शुरू होकर 11 ज़िलों से गुजरते हुए लगभग 1100 किलोमीटर की दूरी तय कर द्वारका में संपन्न हुई थी।

कांग्रेस ने पहले चरण में उत्तर गुजरात के सात ज़िलों में 1300 किलोमीटर लंबी जन आक्रोश यात्रा निकाली, जिसके ज़रिये जनता से सीधा संवाद स्थापित किया गया। इसी यात्रा के दौरान वाव-थराद क्षेत्र में महिलाओं ने कांग्रेस नेताओं के सामने अवैध शराब और ड्रग्स के कारण युवाओं की हो रही मौतों का मुद्दा उठाया और इन पर रोक लगाने की मांग की।

इसके बाद कांग्रेस नेताओं का सीधा टकराव गृह मंत्री और पुलिस प्रशासन से हुआ, जो पट्टा-बेल्ट विवाद तक जा पहुँचा। इसके प्रतिउत्तर में पुलिसकर्मियों के परिजनों की महिलाओं द्वारा यात्रा को बाधित करने की कोशिश भी की गई थी। परन्तु ड्रग्स के मुद्दे पर पूरे प्रदेश से कांग्रेस को समर्थन मिलने के कारण पुलिस प्रशासन और सरकार ने पीछे हटते हुए मुद्दे को स्लीपिंग मोड में डालने का प्रयास किया ताकि बीजेपी को राजनैतिक हानि कम हो|

कांग्रेस ने 20 दिसंबर 2025 को जन आक्रोश यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत खेड़ा ज़िले के फाग्वेल गांव से की, जिसका समापन 6 जनवरी 2026 को दाहोद में प्रस्तावित है। इस चरण में यात्रा मध्य गुजरात के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों को भी कवर करेगी और लगभग 1400 किलोमीटर का सफ़र तय करेगी। मध्य गुजरात लंबे समय तक कांग्रेस का मज़बूत गढ़ रहा है।

इसी दौरान प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा द्वारा भाजपा के प्रदेश कार्यालय ‘कमलम’ पर 2027 में बुलडोज़र चलाने की टिप्पणी को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ। आप को बता दें कि अहमदाबाद सहित पूरे राज्य में सरकार द्वारा अवैध निर्माण के नाम पर बुलडोज़र अभियान चला रही है| जिसके जवाब में कांग्रेस मारू घर मारू स्वाभिमान आन्दोलन चला रही है|

प्रेस वार्ता में अमित चावड़ा ने आगे कहा कि भाजपा-शासित स्थानीय स्वराज संस्थाओं में भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ कांग्रेस वर्ष 2026 में आक्रामक महाजनसंपर्क अभियान शुरू करेगी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की 1090 ज़िला पंचायतों और 5200 तालुका पंचायतों में जनसंवाद के माध्यम से कांग्रेस सीधे जनता से जुड़ेगी।

शहरी रणनीति पर बोलते हुए चावड़ा ने कहा कि ‘कांग्रेस दो प्रमुख कार्यक्रमों पर काम करेगी। पहला कार्यक्रम “कांग्रेस आपके द्वार – जनता नो मैनिफेस्टो” होगा, जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता राज्य की सभी 17 महानगरपालिकाओं में वार्ड स्तर पर घर-घर जाकर जनता की राय और सुझाव एकत्र करेंगे। इसके आधार पर कांग्रेस जनहित में मैनिफेस्टो तैयार करेगी, जिसे महानगरपालिका चुनाव से पहले “जनता नो मैनिफेस्टो विज़न डॉक्यूमेंट” के रूप में जनता के सामने रखा जाएगा।

दूसरे कार्यक्रम के तहत कांग्रेस शहरी क्षेत्रों में “जनमंच – जन आक्रोश पदयात्रा” निकालेगी, जिसके माध्यम से उन लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी, जिनकी सुनवाई सरकारी दफ्तरों में नहीं हो पाती। इस यात्रा के दौरान नगर निगमों में हो रहे कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया जाएगा।

कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा पर सरकार कड़ी नज़र रखे हुए है। चावड़ा ने आरोप लगाया कि पुलिस यात्रा से जुड़ने वालों, उसका स्वागत करने वालों और किसी भी प्रकार से सहयोग करने वालों के नाम एकत्र कर रही है। उन्होंने कहा, “पुलिस का काम केवल रिपोर्ट करना है, लेकिन गुजरात में पुलिस सत्ता की गुलाम बन चुकी है और लोगों को यात्रा में शामिल होने से रोका जा रहा है।”

उन्होंने पुलिस को संविधान की सौगंध को याद दिलाते हुए कहा, “आपने जनता की सुरक्षा और सम्मान की शपथ ली है। पुलिसकर्मी हों या अधिकारी, मुख्यमंत्री हो या विधायक—सभी को वेतन जनता के टैक्स से मिलता है। जिस पुलिस को भाजपा से प्रेम है, वह पट्टा उतारकर भाजपा का पट्टा पहनकर सामने आए।”

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि कुछ गिने-चुने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए गुजराती जनता के टैक्स और अधिकारों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है, जो 7 फरवरी को पूरी होगी। इसके बाद संभवतः अप्रैल माह में ज़िला पंचायत, तालुका पंचायत और महानगरपालिका के चुनाव कराए जा सकते हैं।

(कलीम सिद्दीकी पत्रकार और एक्टिविस्ट हैं।)

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