‘निर्विरोध जीत’ : उच्च न्यायालय ने नोटा के साथ चुनाव करवाने की याचिका ठुकराई

बंबई उच्च न्यायालय ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें अनुरोध किया गया था कि महाराष्ट्र की 29 महापालिकाओं में उन 69 वार्ड में नोटा के विकल्प के साथ मतदान करवाया जाए जहाँ सत्तारूढ़ पार्टियों के प्रत्याशी “निर्विरोध” विजयी माने गए हैं। याचिका में इसीके साथ “निर्विरोध जीत” के मामलों में प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के मामलों में जांच की माँग भी की गई थी। 

मुंबई महानगरपालिका समेत महापालिका चुनावों के लिए मतदान आज (15 जनवरी को) हो रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायाधीश गौतम अंखड़ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नेता अविनाश जाधव और पुणे निवासी समीर शिरीष गांधी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं के वकील असीम सरोदे ने नामांकन वापसी की जांच की माँग करते हुए कहा की नामांकन वापसी स्वेच्छा से नहीं बल्कि योजनाबद्ध दबाव, धमकियों अथवा अवैध प्रलोभनों के कारण हुई थी। 

यह संविधान के अनुच्छेद 243 ज़ेडए के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के निर्देश का उल्लंघन है। 

सत्तारूढ़ महायुति ने जहाँ निर्विरोध जीत के दावे किए थे, राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट माँगी है यह देखने के लिए की चुनावी मैदान से प्रत्याशियों के पीछे हटने के लिए दबाव या धमकियों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया था। 

जाधव ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग ने 29 महापालिकाओं में 69 वार्ड में जांच शुरू की है जहाँ 2 जनवरी की नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद निर्विरोध जीत का दावा किया गया है क्योंकि बड़े पैमाने पर प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस लिए। 

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के कहे बिना कि उसे नामांकन दाखिल करने या चुनाव लड़ने से रोका गया था, जांच नहीं की जा सकती और उस परिस्थिति में भी जांच सक्षम अधिकारी कर सकते हैं, अदालत नहीं। ऐसे व्यक्ति के पास कहीं और समाधान उपलब्ध है। 

ठाणे से दाखिल एक और याचिका में अनुरोध किया गया था कि चुनाव के लिए मतदान कराया जाये और नतीजे चुनावी मैदान में बचे एकमात्र प्रत्याशी व नोटा (किसीको भी मत नहीं) को मिले वोटों के आधार पर घोषित किए जाएँ। अदालत ने कहा कि महापालिका चुनाव करवाने के लिए एक प्रणाली है जो राज्य चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों से संचालित होती है। अदालत ने इस जनहित याचिका को “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” करार दिया।

अदालत ने कहा कि जनहित याचिका भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) से वार्ड के चुनावी नतीजों की घोषणा वोटों की गिनती के बाद करने का अनुरोध करती है जबकि चुनाव ईसीआई नहीं करवाता। अदालत ने याचिका को निरर्थक करार दिया और ख़ारिज कर दिया।

(जनचौक ब्यूरो)  

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