सिलचर, असम। विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के नाम पर नागरिकों के खिलाफ चल रही साजिश को तुरंत रोका जाए। एसआर प्रक्रिया के नाम पर आम जनता के उत्पीड़न को बंद किया जाए सहित श्रमिक हितों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन (अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल) दूसरे दिन भी जारी रहा है।
नागरिक अधिकारों, अवैध बेदखली के खिलाफ संघर्ष, किसानों, चाय बगान श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहने वाले संजीव रॉय (चिंटू) के नेतृत्व में, 29 जनवरी को सुबह 11 बजे से क्लब रोड, सिलचर स्थित शहीद खुदीराम बोस की प्रतिमा के आधार स्थल पर शुरू हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दूसरे दिन व्यापक लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ।
एसआर प्रक्रिया के नाम पर आम जनता के उत्पीड़न को बंद किया जाए
बताते चलें कि संजीव रॉय (चिंटू) का यह आंदोलन कई प्रमुख मांगों पर केंद्रित है, जिनमें विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के नाम पर नागरिकों के खिलाफ चल रही साजिश को तुरंत रोकने, एसआर प्रक्रिया के नाम पर आम जनता के उत्पीड़न को बंद किया जाए, एसआर के दौरान झूठे आपत्तियां (ऑब्जेक्शन) दाखिल करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि एसआर एक वास्तविक और पारदर्शी प्रक्रिया रहे, न कि राजनीतिक प्रतिशोध का औज़ार।
गौरतलब हो कि सिलचर क्षेत्र के लोग संजीव रॉय की लोकतंत्र और न्याय के प्रति अडिग प्रतिबद्धता से भली-भांति परिचित हैं। नागरिक अधिकारों की वकालत हो, अवैध बेदखली के खिलाफ संघर्ष, किसानों के अधिकारों की लड़ाई, या शोषित चाय बागान मज़दूरों के साथ खड़े होने का मामला रॉय हमेशा सामाजिक आंदोलनों की अग्रिम पंक्ति में रहे हैं। भूख हड़ताल पर जाने का उनका निर्णय अन्याय के खिलाफ उनके आजीवन संघर्ष की निरंतरता है। फोरम फॉर सोशल हार्मनी और असम मोजुरी श्रमिक यूनियन ने उनके इस आंदोलन को पूर्ण और बिना शर्त समर्थन दिया है।
विशेष पुनरीक्षण (एसआर) को लेकर चिंताएं
इस दौरान वक्ताओं ने कहा असम में एसआर का उद्देश्य चुनाव-पूर्व मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण था, जिसमें नए मतदाताओं को जोड़ना और मृतकों या स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाना शामिल है। लेकिन बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा घर-घर सत्यापन पूरा होने के बाद, 65 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए “रीयल-टाइम फोटो सत्यापन” का एक नया आदेश जारी किया गया। यह एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसके तहत असम के नागरिकों और यहां तक कि बीएलओ को भी नागरिकता और मतदान पात्रता सिद्ध करने की अंतहीन प्रक्रिया में उलझाए रखा जा रहा है।
फॉर्म-7 का दुरुपयोग
नागरिकता और मतदाता पहचान को लेकर उत्पीड़न असम के निवासियों के लिए एक अंतहीन पीड़ा बन गया है। एसआर प्रक्रिया शुरू होते ही फॉर्म-7 (मतदाता सूची में नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए प्रयुक्त) के दुरुपयोग की साजिश सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोगों को मनमाने ढंग से आपत्तियां दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित या गुमराह किया जा रहा है। प्रशासन फॉर्म-7 से संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पर्याप्त प्रचार करने में विफल रहा है।
जबकि ग़ौर करें तो दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रमाण प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी आपत्ति दर्ज करने वाले पर होती है। आपत्तिकर्ता को अपने दावे की सत्यता की पुष्टि करते हुए अनिवार्य घोषणा (डिक्लेरेशन) देनी होती है।
झूठी आपत्तियां दाखिल करना दंडनीय अपराध है।
जब जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इन नियमों को उजागर किया, तो कई शिकायतकर्ता अपनी पहचान छिपाने लगे या सुनवाई में उपस्थित ही नहीं हुए। इससे स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य केवल वास्तविक मतदाताओं को परेशान करना है।
प्रशासन से मांगें
संजीव रॉय (चिंटू) ने कहा मताधिकार से वंचित करने की इस साजिश को रोकने के लिए हम निम्नलिखित मांगें करते हैं:
● प्रशासन दुरुपयोग के विरुद्ध चेतावनी जारी करते हुए एक आधिकारिक अधिसूचना प्रकाशित करे।
● मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से फॉर्म-7 से जुड़े कानूनी प्रावधानों और दंड के बारे में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।
● जिन मामलों में आपत्तिकर्ता की पहचान सत्यापित नहीं है, उन्हें बिना सुनवाई के तुरंत खारिज किया जाए।
● सार्वजनिक परेशानी कम करने के लिए संबंधित पंचायत कार्यालयों में एक ही दिन में आपत्तियों का निपटारा किया जाए।
बिस्वजीत दास एवं अरिंदम देब ने बताया कि, “फोरम फॉर सोशल हार्मनी और असम मोजुरी श्रमिक यूनियन समाज के सभी वर्गों से अपील करते हैं कि वे संजीव रॉय की भूख हड़ताल में शामिल हों और समर्थन दें। हम जनता से आग्रह करते हैं कि इस आंदोलन को एक जन-आंदोलन का रूप दें, ताकि सरकार और प्रशासन इन न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक मांगों को स्वीकार करने के लिए बाध्य हों।
(संतोष देव गिरी वरिष्ठ पत्रकार हैं।)