वडोदरा। गुजरात में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म नंबर-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर वडोदरा के सयाजीगंज विधानसभा क्षेत्र के पठान अकरम ख़ान आसिफ़ ख़ान ने मुख्य चुनाव अधिकारी, जिला कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
पठान ने आरोप लगाया है कि जानबूझकर झूठी जानकारी देकर उनका नाम मतदाता सूची से हटवाया गया, ताकि उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सके। उन्होंने शिकायत में इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय दंड संहिता के तहत गंभीर आपराधिक कृत्य बताया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेताओं, कॉर्पोरेटर्स और कार्यकर्ताओं के नाम पर हजारों फॉर्म-7 आवेदन बिना घोषणा और ठोस सबूतों के भरे गए हैं, जिनका मकसद निर्दोष नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटवाकर चुनावी लाभ हासिल करना था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि “लाखों नागरिकों के मतदान अधिकार छीनकर चुनाव जीतने की मानसिकता देश और संविधान दोनों के लिए खतरा है।”
शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता का नाम 02 फरवरी 2026 को अवैध रूप से मतदाता सूची से हटाया गया। आरोप है कि ठक्कर मुकेशभाई इंदुभाई नामक व्यक्ति ने फॉर्म-7 में झूठी जानकारी देकर शिकायतकर्ता को “परमानेंट शिफ्टेड” दिखाया और यह दावा किया कि वह उक्त पते पर निवास नहीं रहता है। जबकि शिकायतकर्ता वर्षों से उसी पते पर रह रहा है और उसने कभी नाम हटाने का आवेदन नहीं किया।
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि फॉर्म-7 भरते समय दिया गया डिक्लेरेशन यदि झूठा पाया जाता है, तो यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत अपराध है, जिसमें 1 साल तक की जेल,जुर्माना,या दोनों हो सकते हैं।
साथ ही, बड़े पैमाने पर फॉर्म भरने को लेकर आईपीसी की धारा 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से मांग की है कि संबंधित ईआरओ ERO कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज तुरंत सुरक्षित किए जाएं, आरोपी द्वारा दिए गए डिक्लेरेशन, दस्तावेज और अन्य सबूत पुलिस हिरासत में लिए जाएं और मतदाता सूची में शिकायतकर्ता का नाम दोबारा जोड़ा जाए। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य चुनाव अधिकारी (गुजरात), सयाजीगंज विधानसभा के चुनाव अधिकारी और वडोदरा पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई है।
ऐसे मामले केवल बड़ौदा में ही नहीं राज्य के हर ज़िले में आ रहे हैं फॉर्म 7 का दुरूपयोग विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए उपयोग हो रहे हैं फॉर्म 7 प्रिंटेड रूप में होता है जिनका नाम हटाना है पहले से प्रिंटेड होता है शिकायतकर्ता का नाम, एपिक No. और फोन नंबर पेन से लिखा होता है ये फॉर्म बीजेपी के लोग रिटर्निग ऑफिसर को देते हैं। ऑफिसर बीएलओ को देते हैं बीएलओ पर दबाव बनाया जाता है कि वह नाम रोल से हटाएं।
गुजरात में लगभग 14 लाख फॉर्म 7 भरे गए थे लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की जागरूकता और एफआईआर के डर से लगभग 12 लाख फॉर्म वापस खींच लिए गए हैं। बड़ौदा म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में विपक्ष नेता अमिबेन रावत ने पत्र लिख सुबूतों के साथ जिला कलेक्टर को आवेदन दिया है और सभी के विरुद्ध एफआईआर दाखिल करने की मांग की है। आरोप है कि यही मॉडस ओपेरेंडी पूरे देश में चल रही है।
(कलीम सिद्दीकी पत्रकार और एक्टिविस्ट हैं।)