2025 में पत्रकारों की मौत : दो तिहाई मामलों में इज़राइल ज़िम्मेवार

कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार  2025 में इज़राइल ने प्रेस के कम से कम 86 सदस्यों को मारा जो वर्ष में दुनिया भर में मारे गए 129 पत्रकारों का लगभग दो तिहाई हिस्सा था। 

मारे गए 86 पत्रकारों में से 60 फ़ीसदी ग़ज़ा से रिपोर्टिंग कर रहे फ़िलिस्तीनी थे, जहाँ संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों और अधिकार कार्यकर्ता समूहों के अनुसार नरसंहार को अंजाम दिया जा रहा है। दुनिया भर में पिछले वर्ष 129 पत्रकार मारे गए। यह संख्या, सीपीजे ने जब से डेटा जुटाना जारी किया है, सबसे अधिक है। इज़राइल के हाथों मारे गए पत्रकारों की संख्या की बात करें तो यह पिछले तीन दशकों में पत्रकारों के लिए सबसे घातक वर्ष रहा। 

फ़िलिस्तीनी पत्रकारों के अलावा, इज़राइली हवाई हमलों ने यमन में भी प्रेस के 31 से ज़्यादा सदस्यों को मारा है। निशाना बनाकर मारने (टार्गेटेड किलिंग) के संदर्भ में, जिन्हें सीपीजे “हत्या” करार देता है, इज़राइल दुनिया के 47 मामलों में से 38 के लिए ज़िम्मेवार रहा। 

सीपीजे के अनुसार, “1992 से लेकर अब तक किसी भी सरकार ने इतने पत्रकार नहीं मारे, जितने इज़राइल ने मारे हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार इजराइली सेनाओं द्वारा मारे गए पत्रकारों की संख्या और भी ज़्यादा हो सकती है क्योंकि ग़ज़ा में मीडिया की पहुँच पर इज़राइल ने पाबंदियाँ लगायी हुई हैं। सीपीजे के अनुसार काफ़ी प्रमाण नष्ट हो जाने के कारण ग़ज़ा में मारे गए पत्रकारों की वास्तविक संख्या का पता लगाना अब शायद ही संभव हो। 

सीपीजे ने इज़राइली सेना के इन दावों को भी ख़ारिज किया है कि मारे गए पत्रकार सशस्त्र समूह हमास के सदस्य थे।

सीपीजे की रिपोर्ट के अनुसार ग़ज़ा और यमन के अलावा सूडान में नौ, मेक्सिको में छह और यूक्रेन में चार पत्रकार मारे गए हैं। सूडान गृह युद्ध के हालात से जूझ रहा है, मेक्सिको ड्रग कार्टेल की हिंसा से ग्रस्त है और यूक्रेन अब भी रूसी सैन्य हमलों के साये में है। 

रिपोर्ट में भारत में छत्तीसगढ़ में स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर की मौत का उल्लेख है जिनकी लाश एक सड़क विकास योजना में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक खोजी रिपोर्ट एनडीटीवी पर प्रसारित होने के कुछ दिन बाद ही एक सेप्टिक टैंक से मिली थी। 

(न्यूज़लॉंड्री से साभार)

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