हालांकि होली का पावन पर्व प्रकृति के रंगों से दो-चार होने का त्यौहार है जिसमें जात-पात और धर्मों की बात नहीं होती। यह प्रकृति के साथ खुश होने का पर्व है। लेकिन इसमें होलिका बुआ जिसे कहा जाता है आग से बचने की कथित दैवीय शक्ति थी वह अपने भतीजे प्रह्लाद को मारने के लिए उसे गोद में लेकर बैठ जाती है ताकि उसके भाई हिरण्यकश्यप का निर्बाध गति से आतंकी शासन चलता रहे। किंतु दैवीय शक्ति धरी रह जाती है और प्रह्लाद होलिका के साथ से छूटकर बच जाता है जिसे अन्यायी के विरुद्ध न्याय की जीत बताया जाता है।
इस मिथक को लेकर जगह-जगह होलिका दहन के कार्यक्रम होते हैं जो आज के दौर में एक स्त्री को जलते देखना दमन का प्रतीक नज़र आता है।
कहते हैं होलिका दहन के बाद से वास्तविक गर्मी की शुरुआत होती है। किंतु इस बार तो दुनिया के सबसे बड़े हत्यारे देश अमेरिका ने हद ही कर दी मुसलमानों के मुक़द्दस पर्व पर मुस्लिम देशों में हाहाकार, चीत्कार और मिसाइलों और बमों की आग के धुंए में इस ताप को इतना बढ़ा दिया है कि वह सुलगता ही जा रहा है।
यह युद्ध वास्तव में सिर्फ एक शिक्षा मुस्लिम देश पर अपना साम्राज्य फैलाने के उद्देश्य से अमेरिका ने इज़राइल से करवाया था लेकिन ईरान की ताकत का एहसास उसे था इसलिए वह भी जंग में शामिल हो गया। ईरान ने सबसे पहले उन मुस्लिम आठ देशों पर उन जगहों पर हमले किए जहां इन देशों ने अमेरिका की चाटुकारिता करते हुए उसके सैनिक अड्डे बनाए थे। इसलिए ईरान के आक्रमण के बाद इन नौ देशों जिसमें इज़राइल भी शामिल है धधक रहे हैं।
ईरान की राजधानी तेहरान और इज़राइल की राजधानी तेल अवीव के बीच युद्ध से दोनों देश अशांत हैं। इस बीच ईरान प्रमुख अयातुल्ला खामेनेई की जिस तरह शहादत दी गई उसने ईरान के साथ ही समूचे मध्यपूर्व एशिया के साथ चीन और रूस को भी उद्वेलित कर दिया। जिसके परिणामस्वरूप तृतीय विश्व युद्ध की स्थिति बन रही है।
जबकि अमेरिका और इज़राइल अपनी बर्बाद मारक क्षमता की वजह से युद्ध बंदी की अपील कर चुके हैं। इस बार एक दमदार युद्ध के लिए प्रतिबद्ध देश से यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह युद्ध विराम करेगा। मतलब साफ़ है इस बार अमेरिका की साम्राज्य वाली और चुनी हुई सरकारों में सेंध लगाकर सत्ता पलटने का खेल उसे महंगा पड़ने वाला है। कोरिया, तुर्की, पाकिस्तान, अज़रबैजान, चीन खुलकर ईरान के साथ खड़े हो गए हैं। अमेरिका से त्रस्त बड़ी संख्या में देश गिराने के समर्थन में जुटेंगे।
भारत की भूमिका संदिग्ध है इसलिए इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ सकता है। यही वजह है पाकिस्तान बॉर्डर से लगे राज्यों में एलर्ट जारी है तथा श्रीनगर में अवाम को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहे। स्कूल, कालेज बंद कर दिए गए हैं।
कुल मिलाकर हमारे आस-पास आग की लपटें हैं हम कब तक सुरक्षित रह पाते हैं यह आगत बताएगा। समझदारी इसमें है कि भारत अमेरिका से अपना अतिरिक्त सम्मोहन त्याग कर एक मध्यस्थ बनकर चीन, रूस के साथ खड़े होकर आततायी देश को प्रह्लाद की नाईं संबल दे। होली पर रंग बिखरें, भाल पर गुलाल हो और अमन की बात हो। रमजान में खून बहता रहे यह उचित नहीं। दुनिया में बढ़ते ताप को कम करने में सबसे बड़ी आबादी वाला भारत अहम् भूमिका निभाएं।
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)