नवादा जिले के रोह बाजार में 28 मार्च को रामनवमी जुलूस के दौरान हुई साम्प्रदायिक हिंसा की घटना की सच्चाई जानने हेतु भाकपा –माले द्वारा गठित जाँच दल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।
जाँच दल में रामबली सिंह यादव (पूर्व विधायक), राज्य कमिटी सदस्य कॉमरेड नरेन्द्र कुमार, नवादा जिला कमिटी सदस्य कॉमरेड श्यामदेव विश्वकर्मा तथा गुड्डू यादव (जहानाबाद) शामिल थे।
जाँच में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि 28 मार्च की रात लगभग 8 बजे रामनवमी जुलूस के दौरान रोह स्थित जामा मस्जिद के पास पथराव की घटना हुई। इसके बाद घटनास्थल से काफी दूरी पर स्थित बाजार में बंद पड़ी दुकानों—जो अधिकांशतः मुस्लिम समुदाय की थीं—को चुनकर आग के हवाले कर दिया गया।
जाँच दल 30 मार्च की दोपहर रोह गाँव पहुँचा। जामा मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती थी और पूरे इलाके में आवाजाही लगभग ठप थी। प्रवेश के दौरान पुलिस की असामान्य सतर्कता और संदेह भरी निगाहें देखी गईं। गली के अंदर आगे बढ़ने पर जगह-जगह पुलिस की टुकड़ियाँ तैनात मिलीं। एक ओर रामनवमी जुलूस का बड़ा बैनर लगाकर 8–10 लोग बैठे थे, वहीं पूरी गली में ‘जय श्रीराम’ के झंडे लगे हुए थे। आसपास, घर, दुकानें बंद थीं, जो भय और तनाव की स्थिति को दर्शाता है।
जाँच दल का स्थानीय स्तर पर कोई परिचित नहीं होने के कारण जानकारी जुटाने में कठिनाई हुई। जामा मस्जिद के पास एक पंडाल लगा मिला, जिस पर रामनवमी का बैनर लगा था। बड़ी मुश्किल से आरिफ मियाँ नामक एक व्यक्ति से बात हो सकी, जो अत्यंत भयभीत थे और उन्होंने किसी भी घटना से इनकार करते हुए कहा कि “यहाँ कुछ नहीं हुआ, झगड़ा बाजार में हुआ है।”
इसके बाद जाँच दल बाजार क्षेत्र की ओर बढ़ा। पहले से उपलब्ध संपर्कों के माध्यम से मो. शाहिद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन बंद था। स्थानीय दुकानदार उमेश जी (न्यू गायत्री ट्रेडर्स) को बुलाया गया, लेकिन उन्होंने पहले बाजार आने से इंकार कर दिया। बाद में उन्होंने बाजार के पूर्वी हिस्से में मिलने को कहा, जहाँ वे मो. सज्जाद और मो. सलाम के साथ मौजूद थे। तीनों ही अत्यधिक डरे हुए थे और किनारे खड़े होकर उन्होंने जो जानकारी दी, वह बेहद गंभीर है।
उनके अनुसार, 27 मार्च को बजरंग दल द्वारा प्रचार वाहन से बाजार में घूम-घूमकर यह घोषणा की गई थी कि अगले दिन सभी दुकानें बंद रहें, अन्यथा तोड़फोड़ के लिए दुकानदार स्वयं जिम्मेदार होंगे। उल्लेखनीय है कि इस प्रचार के कुछ ही मिनटों बाद पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च किया गया, जिससे आम लोगों में यह संदेश गया कि इस चेतावनी को प्रशासनिक समर्थन प्राप्त है।
28 मार्च को पूरा बाजार बंद रहा। शाम करीब 5 बजे रामनवमी जुलूस बाजार में प्रवेश किया, जिसमें प्रतिबंधित डीजे का प्रयोग किया गया और स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के गाँवों तथा बाहरी अंजान चेहरों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी थी। जुलूस शांतिपूर्वक बाजार से गुजर गया, लेकिन जब यह मस्जिद के पास पहुँचा तो कथित रूप से मस्जिद का झंडा हटाने/उखाड़ने की घटना के बाद दोनों समुदायों के युवाओं के बीच पथराव शुरू हो गया।
जाँच में सामने आया कि उस समय बाजार पूरी तरह सुनसान था। इसी स्थिति का लाभ उठाकर मो. समसीर की रेडीमेड दुकान चंदन वाटिका के साइनबोर्ड में आग लगाई गई। साथ ही सेरा सब्जी विक्रेता, सज्जाद और जावेद की मुर्गा दुकान की खाली गुमटियों में आग लगा दी गई। गुमटी में रखे प्लास्टिक सामान के पिघलने से आग पास की मो. चाँद की बंद रेडीमेड दुकान तक फैल गई।
सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया। बाद में रात में ही स्वच्छता कर्मियों को बुलाकर मलबा हटाया गया और घटनास्थल पर पुलिस तैनात कर दी गई।
29 मार्च की सुबह एसडीएम और एसडीपीओ द्वारा दोनों समुदायों के दुकानदारों की शांति बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही एक और गुमटी में आग लगा दी गई, जिससे भगदड़ मच गई और बैठक रद्द करनी पड़ी। इसके बाद से 30 मार्च तक पूरा बाजार बंद रहा।
जाँच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद रात के समय पुलिस द्वारा घरों में घुसकर दोनों समुदायों के लोगों की गिरफ्तारी की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। यद्यपि गिरफ्तारियाँ दोनों पक्षों से हो रही हैं, लेकिन आम नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना गहरी है।
जाँच दल की समझ है कि रोह क्षेत्र गोविंदपुर विधानसभा के अंतर्गत आता है, जहाँ हालिया चुनाव में लोजपा की जीत हुई है। समीपवर्ती वारसलीगंज क्षेत्र में प्रभावशाली और विवादित दबंग व्यक्तियों के बीच वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस प्रतिस्पर्धा का असर सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है और आम जनता इसके बीच पिसने को मजबूर है।
जाँच दल का मानना है कि रामनवमी के जुलूसों का इस वर्ष असामान्य विस्तार, बाहरी तत्वों की भागीदारी, पूर्व घोषित बंदी का दबाव, और लक्षित रूप से दुकानों में आगजनी, ये सभी संकेत करते हैं कि यह घटना स्वतःस्फूर्त न होकर सुनियोजित उकसावे का परिणाम है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि एक ओर मुस्लिम समुदाय द्वारा जगह-जगह स्वागत और शरबत-पानी की व्यवस्था की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर उनके बीच गहरा भय और असुरक्षा का माहौल दिखाई पड़ा।
राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में हालिया बदलाव ने भी इस दहशत को बढ़ाया है।
जाँच दल की मांगें हैं कि –
■ पूरी घटना की उच्चस्तरीय/न्यायिक जाँच कराई जाए।
■ आगजनी और हिंसा में शामिल संगठित तत्वों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
■ पीड़ित दुकानदारों को तत्काल मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।
■ पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता लाई जाए तथा निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगे।
■ क्षेत्र में स्थायी शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द बहाली के लिए पहल की जाए।
जाँच दल ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष और संवेदनशील हस्तक्षेप नहीं किया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)