बिहार भाकपा (माले) की एक जांच टीम ने पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों की घटना को प्रशासनिक विफलता और सरकार की आपराधिक लापरवाही का परिणाम बताया है।
टीम की जांच के अनुसार 1 अप्रैल 2026 की शाम स्थानीय लोगों ने जहरीली शराब का सेवन किया, जिसके बाद रात में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। जिन्हें गंभीर स्थिति में मोतिहारी के एक अस्पताल ले जाया गया जहां अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
जांच में पाया गया कि जहरीली शराब के सेवन से प्रभावित सभी 2 दर्जन लोग मेहनतकश और गरीब परिवारों से आते हैं, 8 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जन भर से अधिक अभी भी जीवन और मौत से लड़ रहे हैं।
माले ने आरोप लगाया कि यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि बिहार में शराबबंदी सिर्फ कागजों में है, जबकि जमीनी हकीकत में शराब माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और प्रशासन की मिलीभगत से यह कारोबार फल-फूल रहा है।
सरकार और प्रशासन कटघरे में
जांच टीम ने पाया कि क्षेत्र में अवैध शराब का धंधा लंबे समय से चल रहा है। प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यह घटना सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता और सरकारी लापरवाही का परिणाम है और यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि गरीबों की सांगठनिक हत्या है, जिसके लिए जिम्मेदार तंत्र को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
इस घटना में प्रभावित लोगों को लेकर भाकपा (माले) ने अपनी मांगें रखी है –
1. मृतकों के परिजनों को कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
2. सभी घायलों का निःशुल्क और समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए।
3. शराब माफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई हो।
4. क्षेत्र में अवैध शराब के धंधे पर तत्काल पूर्ण रोक लगाई जाए।
5. पीड़ित परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
भाकपा (माले) ने स्पष्ट किया है कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी जनता के साथ मिलकर सड़क से सदन तक जोरदार आंदोलन छेड़ेगी। जांच टीम में पूर्वी चंपारण जिला कमेटी के प्रभुदेव यादव, (जिला सचिव), जीतलाल साहनी (जिला अध्यक्ष, खेग्रामस), शंभूलाल यादव सहित अन्य साथी शामिल थे।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)