रिश्तेदारों को ठेके देने का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश

अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीएम खांडू के खिलाफ आरोपों की जांच करने का सीबीआई को आदेश दे दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि दो हफ्तों के अंदर शुरुआती जांच दर्ज की जाए।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अँजरिया की पीठ ने सीबीआई  को 16 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है कि क्या इस मामले में विस्तृत जांच आवश्यक है। पीठ ने कहा कि जांच 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सरकारी ठेकों को कवर करेगी।

पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे 4 सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक रिकॉर्ड सीबीआई को उपलब्ध कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई दस्तावेज नष्ट न हो। साथ ही, मुख्य सचिव को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया गया है।

यह आदेश सेव मोन रीजन फेडरेशन और वालंटरी अरुणाचल सेना द्वारा दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री खांडू ने पिछले एक दशक में सरकारी ठेकों के आवंटन में अपने परिवार से जुड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाया।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई  को जांच में फ्री हैंड दे दिया। उन्होंने कहा कि वह केवल याचिका तक सीमित न रहे, बल्कि कंपनियों के असली मालिकाना हक (बेनिफिशियल ओनरशिप), फंड के फ्लो और पेमेंट की भी जांच करे। जांच के दायरे में खांडू, उनकी पत्नी, पिता की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रेमा और मृतक त्सेरिंग ताशी से जुड़ी कंपनियां भी शामिल होंगी।

कोर्ट ने सीबीआई को यह जांच करने को कहा है कि क्या बिना ओपन टेंडर के ठेके दिए गए? विदेशों की कमी से प्रक्रिया कैसे प्रभावित हुई? फंड का फ्लो और पेमेंट कैसे हुआ?

वहीं मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि तवांग जिले में पिछले 10 सालों में दिए गए 300 ठेकों में से 154 ठेके कथित तौर पर मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनियों को मिले।

हालांकि इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से भी कोर्ट में दलीलें दी गईं। सरकार ने कहा कि आरोप केवल तवांग जिले तक सीमित हैं और 2015 के एक कानून के तहत 50 लाख रुपये तक के कार्य बिना टेंडर के ‘वर्क ऑर्डर’ के माध्यम से दिए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।

हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मामला पूरे राज्य से जुड़ सकता है, न कि केवल एक जिले तक सीमित।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई  को चार महीने में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और जांच से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच से संबंधित कोई भी रिकॉर्ड नष्ट नहीं किया जाए।

आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में सीएम पेमा खांडू परिवार से जुड़ी फर्मों को ये ठेके मिले हैं। सीबीआई से 16 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है।आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में 1,270 करोड़ रुपये के ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी फर्मों को दिए गए।

यह मामला अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा में रहा है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर उनके परिवार के सदस्यों या निकट संबंधियों को सरकारी ठेकों में अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, अब तक इन आरोपों की स्वतंत्र जांच नहीं हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को नई गति मिलने की उम्मीद है। सीबीआई अब इन ठेकों की पूरी प्रक्रिया, बोली प्रक्रिया, कंपनियों के स्वामित्व और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी।पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट आगे की कार्यवाही तय करेगा।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ लगे आरोप गंभीर और चिंताजनक हैं। सुप्रीमकोर्ट  ने इस बात का संज्ञान लिया है कि उनके परिवार और करीबी रिश्तेदारों को अकेले तवांग जिले में 380 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ठेके दिए गए, जिनमें से 17 करोड़ रुपये बिना प्रतिस्पर्धी बोली के दिए गए। इसके अलावा, 2019 और 2024 के बीच उनकी घोषित संपत्ति में 100 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है। सुप्रीमकोर्ट ने भ्रष्टाचार और पक्षपात के इन आरोपों की जांच के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और सीएजी से रिपोर्ट मांगी है। 

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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