विशेष रिपोर्ट: गुरमीत राम रहीम और बड़ी सियासी हस्तियों को बचाने में अब सीबीआई का इस्तेमाल!

राम रहीम।

पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी द्वारा डेरा सच्चा सौदा मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह तथा उसके तीन नज़दीकियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अचानक सीबीआई डेरा मुखी को बचाने के लिए आगे आ गई है। 

गौरतलब है कि इस प्रकरण की जांच कर रही देश की इस सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने यह कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट फाइल की थी कि इस मामले में किसी के खिलाफ पुख्ता सुबूत नहीं मिले हैं। जो बात 4 घंटे में कही जा सकती थी, उसे कहने में सीबीआई ने लगभग 4 साल लगाए। उसने कहा था कि फिंगर और फुट प्रिंट्स मिट गए हैं इसलिए जरूरी साक्ष्य नहीं मिल सके। 

इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अलग एसआईटी का गठन करके जांच करवाई तो गुरमीत राम रहीम तथा डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ बहुत कुछ मिला। उसी के आधार पर डेरा मुखी और उसके तीन नज़दीकियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। डेरा मुखी हरियाणा की रोहतक जिले की सुनारिया जेल में बंद है। एसआईटी अदालत के जरिए उससे पूछताछ करना चाहती है। 

इस पूछ ताछ का एक मकसद राम रहीम गुरमीत सिंह के सियासी आकाओं तक पहुंचना भी है। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के कतिपय नेताओं से डेरा मुखी की नज़दीकियां जगजाहिर हैं। पूरे प्रकरण में अब सीबीआई का बीच में आना साफ जाहिर करता है कि राम रहीम गुरमीत सिंह का संपर्क तंत्र दिल्ली दरबार तक फैला हुआ है। कौन नहीं जानता कि सीबीआई किसके नियंत्रण में है?                                              

डेरा मुखी पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप चोरी करने और बाद में बेअदबी करवाने की साजिश रचने का केस दर्ज होने के तीसरे ही दिन सीबीआई पंजाब पुलिस की एसआईटी की जांच रुकवाने के लिए मोहाली स्थित सीबीआई अदालत पहुंच गई। विशेष जज जीएस सेखों की अदालत में दी अपनी अर्जी में सीबीआई ने यह भी कहा है कि वह जांच जारी रखना चाहती है, इसलिए यह केस उसी के पास रहने दिया जाए।

जानकारों के मुताबिक बहुत कम बार ऐसा हुआ है कि क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने फिर से जांच शुरू करने की कवायद की हो। बेअदबी कांड में पंजाब की कुछ दिग्गज सियासी हस्तियों के लपेट में आने की संभावना है। सूबे में सरगोशियां हैं कि उन्हें और डेरा सच्चा सौदा मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह को बचाने के लिए सीबीआई का ‘इस्तेमाल’ किया जा रहा है!                  

पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा के मुताबिक राज्य सरकार ने सीबीआई को जांच के लिए दी सहमति निरस्त करके केस वापस मांगा था। पंजाब हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से राज्य सरकार के फैसले पर मोहर लगा दी थी। नंदा कहते हैं कि अब जब संगीन जुर्म के आरोपियों के खिलाफ एसआईटी ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई शुरू की है तो नामालूम कैसे सीबीआई अचानक अदालत में पहुंच गई। जबकि इतनी देर तक यह एजेंसी खामोश थी। इस वक्त बेअदबी मामले की जांच सिर्फ पंजाब पुलिस कर रही है और सीबीआई तो काफी पहले अपना काम बंद कर चुकी है। एसआईटी के प्रमुख जालंधर रेंज के डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा के मुताबिक पंजाब पुलिस ने नए सिरे से जांच की है। इसमें से कुछ पहलू सीबीआई के पास थे ही नहीं।

(पंजाब से वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)  

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