गंगासागर मेले पर लगा कोविड-19 का ग्रहण

प्रतीकात्मक फोटो।

सदियों से लगते आए गंगासागर मेला पर इस साल कोविड-19 का ग्रहण लग गया है। इस मेले के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है। कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करके अपील की गई है कि पूरे गंगा सागर क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाए। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस टीवी राधाकृष्णन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी 13 जनवरी को अपना फैसला सुनाएंगे। इधर सरकार ने ई पूजा और ई स्नान की व्यवस्था करने की पेशकश की है।

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह एफिडेविट दाखिल करके बताएं कि गंगासागर में कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही है। इस पर गौर करने के बाद ही डिवीजन बेंच अपना फैसला सुनाएगा कि इस साल गंगासागर मेला लगाने की अनुमति दी जाएगी या नहीं। डिवीजन बेंच के इस आदेश का अगर विश्लेषण किया जाए तो इसके दो पहलू हैं। हाईकोर्ट ने अभी अपना फैसला नहीं सुनाया इसलिए सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील दायर नहीं की जा सकती है। अगर डिवीजन बेंच 13 जनवरी को गंगासागर मेला के आयोजन पर रोक लगा देता है तो सुप्रीम कोर्ट में जाने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा क्योंकि यह मेला 16 जनवरी को समाप्त हो जाएगा।

दूसरी तरफ हाईकोर्ट में मेला के आयोजन पर कोई स्टे नहीं लगाया है इसलिए तीर्थ यात्रियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक हर साल गंगासागर मेला में 10 लाख से अधिक तीर्थयात्री आते हैं। वे समुद्र में डुबकी लगाते हैं और कपिल मुनि के मंदिर में पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। बस डुबकी लगाने की आशंका ही कोर्ट को परेशान कर रही है। अगर डुबकी लगाने वालों में से 5 फ़ीसदी भी कोविड पॉजिटिव हुए तो उनके नाक और मुंह से निकलने वाला कोविड का वायरस हजारों लोगों को अपना शिकार बना लेगा। इसके मद्देनजर डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से बहुत सारे सवालों का जवाब मांगा है। मसलन मेडिकल टीम कहां तैनात की जाएगी। कोविड के रोकथाम की क्या व्यवस्था की गई है। शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे। हालांकि कोर्ट ने आशंका जताई है कि लाखों की भीड़ में कोविड की गाइडलाइन का पालन करना नामुमकिन है। दूसरी तरफ राज्य सरकार की मजबूरी है कि वह तीर्थयात्रियों को आने से रोक नहीं सकती है।

उपनगरीय रेलवे ने तीर्थ यात्रियों के गंगासागर जाने की व्यवस्था की है। आशंका है कि 13 जनवरी को हाईकोर्ट का फैसला आने तक कोलकाता में लाखों तीर्थ यात्रियों की भीड़ जुट जाएगी। ऐसे में राज्य सरकार ने ई स्नान की पेशकश की है। अब सवाल यह है कि गंगासागर आने वाले तीर्थ यात्रियों को स्नान और ई पूजा कैसे समझ में आएगी। राज्य सरकार की योजना है कि बहुत कम कीमत पर गंगा सागर का पानी तीर्थयात्रियों को उपलब्ध कराया जाए और उन्हें अपने शरीर पर छींटा मार कर पुण्य स्नान कर लें। हालांकि लंबी दूरी की रेल सेवा सामान्य नहीं होने के कारण भारी भीड़ होने की उम्मीद नहीं है। फिर भी आशंका बनी हुई है। अगर कोर्ट गंगासागर मेले के आयोजन पर रोक लगा देती है तो यहां पहुंचे तीर्थ यात्रियों का क्या होगा। अगर अनुमति मिल जाती है तो क्या राज्य सरकार कोविड की गाइडलाइन पर अमल करते हुए प्रबंधन की व्यवस्था कर पाएगी। लिहाजा सरकार सहित सभी को 13 जनवरी को आने वाले फैसले का इंतजार है।

(कोलकाता से वरिष्ठ पत्रकार जेके सिंह की रिपोर्ट।)

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