Wednesday, August 10, 2022

संजय कुमार सिंह

मोदी जी चाहते हैं कि ना कोई सवाल करे, ना सवाल करने लायक रहे

इन दिनों देश में जिसकी लाठी उसकी भैंस और सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का - जैसी पुरानी कहावतों के ढेरों उदाहरण मिल जाएंगे। सब खुलेआम बिखरे-फैले पड़े हैं। उस पर ट्विटर ने केंद्र सरकार पर मुकदमा करके...

ये कैसी खबर, कैसा सुधार और कैसा प्रचार?

आज के अखबारों में एक खबर प्रमुखता से है, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार से बैंकों के 98 प्रतिशत खाताधारक सुरक्षित। मैं हिन्दी अखबार नहीं पढ़ता और उनका तो नहीं पता पर हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर आज लगभग इसी...

कोरोना एक तरह की नोटबंदी है! सरकार लड़ाई के हर मोर्चे पर नाकाम, लेकिन समर्थक मानने को तैयार नहीं

देश में कोरोना की जो हालत है और उससे निपटने की जो सरकारी व्यवस्था है उसके मद्देनजर कई बातें बहुत दिलचस्प हैं। उससे यही पता चलता है कि या तो सरकार कुछ कर नहीं रही है या जो कर...

गैर सरकारी पीएम केयर्स का प्रचार सरकारी वेबसाइट पर क्यों?

पीएम केयर्स को जब गैर सरकारी घोषित कर दिया गया है तो सरकारी मंत्रालयों के साइट पर उसका विज्ञापन क्यों? कल रात वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के वेबसाइट पर पीएम केयर्स का यह विज्ञापन दिखा। दोनों केंद्रीय मंत्री...

शाहीन बाग शूटर के पिता ने कहा, हमने भाजपा वालों का भी माला पहनाकर किया था स्वागत

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि पिछले सप्ताह दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल पर गोलियां चलाने वाला कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का सदस्य है। इसके बाद से भक्त लोग परेशान हैं कि विरोधियों ने इस...

जेएनयू हमले की अखबारों में रिपोर्टिंग से गायब हैं तथ्य, पुलिस की भूमिका पर सवाल है न ही गुंडों की खोज-खबर

आज के ज्यादातर अखबारों में जेएनयू में नकाबपोश गुंडों का हमला - लीड खबर है। भिन्न अखबारों ने इसे अलग ढंग से पेश किया है पर सबसे खास बात यह है कि दिल्ली पुलिस कैम्पस में अनुमति नहीं मिलने...

जलवायु परिवर्तन पर युवा सड़कों पर हैं लेकिन राष्ट्रों को चिंता नहीं

प्रदूषण फैलाने वाले बड़े देशों को छोटे देशों के दबाव का सामना करना पड़ा और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक एक्शन प्लान नहीं बन पाया। दो सप्ताह के विचार-विमर्श के बाद भी 2015 के पेरिस समझौते को कैसे लागू...

सक्षम अर्थशास्त्री के बगैर चल रही है भारतीय अर्थव्यवस्था

हर कोई अर्थशस्त्री है - घरेलू बजट तैयार करने वाली गृहणी से लेकर दूध बेचने वाले गोपालकों तक और पुर्जे बनाने वाले छोटे उद्यमी से लेकर बड़े भवन निर्माता तक, जो बड़े-बड़े अपार्टमेंट बना कर बेचते हैं। इन सभी को चाहे मजबूरीवश, खेल...

अयोध्या के फैसले से मैं बेहद परेशान हूं: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अशोक गांगुली

अयोध्या के फैसले पर अंग्रेजी अखबार 'द टेलीग्राफ' में प्रकाशित, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की यह प्रतिक्रिया पढ़ने लायक है। पेश है, टेलीग्राफ की खबर का अनुवाद : अयोध्या मामले में फैसले पर न्यायमूर्ति गांगुली ने संविधान से...

मेनस्ट्रीम मीडिया से आखिर क्यों गायब है रवीश के मैग्सेसे की ख़बर?

वैसे तो विनोबा भावे (1958) से लेकर अमिताभ चौधरी (1961), वर्गीज कुरियन (1963), जयप्रकाश नारायण (1965), सत्यजीत राय (1967), गौर किशोर घोष (1981), चंडी प्रसाद भट्ट (1982), अरुण शौरी (1982), किरण बेदी (1994), महाश्वेता देवी (1997), राजेन्द्र सिंह (2001), संदीप...

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शिशुओं का ख़ून चूसती सरकार!  देश में शिशुओं में एनीमिया का मामला 67.1%

‘मोदी सरकार शिशुओं का ख़ून चूस रही है‘ यह पंक्ति अतिशयोक्तिपूर्ण लग सकती है पर मेरे पास इस बात...