Tuesday, August 9, 2022

शैलेंद्र चौहान

पंचेश्वर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट यानी महाविनाश को आमंत्रण

उत्तराखण्ड में महाकाली नदी पर दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बनाने की तैयारी चल रही है। महाकाली नदी भारत और नेपाल की सीमा पर बहती है। यह गंगा की सहायक नदी है और शारदा के नाम से भी जानी जाती...

भारत में राजनीतिक दल सांप्रदायिकता को उत्प्रेरक के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं!

भारत में जब भी सांप्रदायिकता की बात चलती है तो उसका आशय हिन्दू-मुस्लिम सम्बंधों में आपसी द्वेष एवं घृणा से ही लिया जाता है। यदि सांप्रदायिक समस्या के समाधान की भी बात की जाती है तो भी हिन्दू-मुस्लिम विरोध...

मूल्यहीन राजनीति के विकल्प पर गंभीरता से सोचने की जरूरत!

राजनीतिक दलों और नेताओं की मुख्य चिंता आज यह है कि कैसे सत्ता पर काबिज हुआ जाए और अधिकतम समय तक वहां टिका रहा जाए। अब यहां पर हर कोई सत्ता का हिस्सा बनना चाहता है। कब्जाई हुई कुर्सी...

बिरसा मुंडा: 25 साल का जीवन, 5 साल का संघर्ष और भगवान का दर्जा!

भारत के इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे आदिवासी नायक हैं जिन्होंने झारखंड में अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आदिवासी समाज की दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। अंग्रेजों द्वारा थोपे...

भारत एक गंदगी प्रधान देश है!

हमारा भारत देश महान है। विदेशियों (पश्चिमी देश वाले) का कहना है कि भारत सपेरों, नटों और ठगों (भिखारियों से लेकर टैक्सी व ऑटो ड्राइवर और होटलों के दलालों तक) का देश है। दावा है कि अब सरकार ने...

कविता का जनतंत्र और जनतंत्र की कविता

इक्कीसवीं सदी की आरम्भिक हिन्दी कविता को बीसवीं सदी के अन्त की हिन्दी कविता का ही विस्तार माना जा सकता है। तो प्रश्न यह उठेगा कि बीसवीं शती की कविता क्या है, उसकी प्रवृत्तियां क्‍या हैं, पहचान क्‍या है,...

भारतीय समाज में देवी और गाली के बीच झूलती महिला

संप्रति सोशल मीडिया पर दो तरह के लोग सक्रिय हैं। एक वे जो लिखते हैं और दूसरे जो बकते हैं। लिखने वाले लोग अच्छा भी लिखते हैं और बुरा भी। लेकिन बकने वाले लोग बस बकते हैं। और जो वे...

सत्ता के सामने नतमस्तक भारतीय मीडिया

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का काम यह होना चाहिए था कि वह लोगों को जागरूक करे किन्तु टीआरपी के चलते समाचार चैनल इन दिनों किसी भी खबर को सनसनी बनाकर पेश करने से नहीं चूक रहे। यह चिंताजनक स्थिति है। अगर...

हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के विलक्षण पैरोकार थे काजी नज़रुल इस्लाम

हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के विलक्षण पैरोकार और महत आकांक्षी बांग्ला कवि-लेखक काजी नज़रुल इस्लाम आधुनिक बांग्ला काव्य एवं संगीत के इतिहास में निस्संदेह एक युग प्रवर्तक थे। प्रथम महायुद्ध के उपरांत आधुनिक बांग्ला काव्य में रवीन्द्र काव्य को एक मात्र...

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बिहार में सियासत करवट लेने को बेताब

बिहार में बीजेपी-जेडीयू की सरकार का दम उखड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस दमघोंटू वातावरण से निकलने को...