Tuesday, July 5, 2022

जानलेवा साबित हो रही है इस बार की गर्मी

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प्रयागराज। उत्तर भारत में दिन का औसत तापमान 45 से 49.7 डिग्री सेल्सियस के बीच है। और इस समय लू और कॉलरा एक सामान्य महामारी की तरह फैली हुई है। उत्तर प्रदेश के लगभग हर घर में कोई न कोई लू और कॉलरा से गुज़र रहा है या गुज़र चुका है। शहर के निजी अस्पताल और सरकारी अस्पतालों में भरे मरीजों की तो बात ही क्या करें, गांव मोहल्लों में झोला छाप डॉक्टरों के एक कमरे के दवाख़ाने में भी बेंच और कुर्सियों पर दर्जनों मरीजों को ग्लूकोज की बोतलें लगी पड़ी हैं।

सुबह खुलने और शाम को बंद होने वाले इन दवाख़ानों में लू और कॉलरा के मरीज सुबह से शाम तक ग्लूकोज का बोतल चढ़वाते हैं और रात को दवाख़ाना बंद होने पर अपने घर चले जाते हैं। और अगली सुबह फिर आकर बोतल लगवा लेते हैं। ऐसे ही लगातार दो दिन पानी चढ़वाकर घर आराम कर रहे दिहाड़ी मजदूर जगराम कहते हैं कि “दो दिन में 5-6 बोतल पानी और इंजेक्शन चढ़ाकर चार हजार रुपये डॉक्टर ने मूड़ लिया। कमाई कहीं नहीं, बीमारी ही बीमारी है”।

वहीं शहरों में दूर दराज के राज्यों से सस्ते में लाये गये मरीज फुटपाथ पर डेरा डाले हुये हैं। गौरतलब है कि तमाम जिलों में नगर निगम का काम आजकल प्राइवेट ठेकेदार देख रहे हैं। वो इन मज़दूरों से काम लेते हैं और उनके बच्चे वहीं फुटपाथ पर लू में भी खेलते हैं। पेट की आग के आगे उन्हें लू मामूली लगती है। लेकिन लू यह नहीं जानती। लग जाती है तो दम लेकर जाती है।

गांव के तमाम मजदूर और कृषि मजदूर इन्हीं जलती हवाओं के बीच शहरों में अपनी रोटी तलाशते हैं। कोई भरी दोपहरी रिक्शा खींचता है, कोई बन रही बहुमंजिला इमारत में ईंटा, सीमेंट मसाला पहुंचाता है, कोई शटरिंग करता है, तो कोई पल्लेदारी। गर्मी का हाल पूछने पर एक पल्लेदार कहता है भैय्या पूछो ही मत गर्मी तो हर साल पड़त है लेकिन अबकि साल तो मानो ये ‘हवा’ नहीं  ‘काल’ बह रही है। सिर पर ईंटा उठाये एक अधेड़ मजदूर कहता है बाबूजी गर्मी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है।

गर्मी और लू का प्रकोप पहले भी बहुत देखा है लेकिन इतनी गर्मी वो भी लगातार पहले कभी नहीं पड़ी। 23 वर्षीय रोहित पटेल शटरिंग का काम करते हैं। चार दिन पहले दोपहर में वो एक जगह शटरिंग का काम कर रहे थे, तभी अचानक से उनके पेट में तेज असहनीय दर्द उठा। रोहित के साथ काम कर रहे साथियों ने उन्हें घर पहुंचाया। रोहित ने समय से दवा ले ली। डॉक्टर ने बताया कि रोहित को लू लग गई है। रोहित ने फिलहाल काम से छुट्टी ले ली है।

रोहित की मां बीते दिनों को याद करते हुये मौजूदा बाज़ारवादी समय के ख़िलाफ़ कहती हैं – गांव देश से कच्चा आम उच्छिन्न हो गया। बाज़ार में कच्चा आम 50 रुपया किलो है। कच्चा आम उबालकर पूरे बदन में लगा देते थे और आधे घंटे बाद नहावन कर लेते थे। इससे लू का असर खत्म हो जाता था और शरीर में ठंडक आ जाती थी। पेट को ठंडा रखने के लिये कितने देशी जतन थे पहले। बेल था, सत्तू था, कच्चे आम का जलजीरा था, घर में दही, माठा, छाछ था, नींबू था। सब ईलाज घर पर ही था लेकिन समय के साथ सब खत्म हो गया। अब लू लगे तो डॉक्टर के पास भागो। भले टेट में टका रुपैया हो कि न हो।

सिर और मुंह पर गमछा लपेटे अपने छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल से लेकर घर जा रहे एक सज्जन गर्मी का हाल पूछने पर कहने लगे- “पिछले साल हर महीने बारिश हुई थी लेकिन इस साल ठंडियों से लेकर अब तक एक भी बार बारिश नहीं हुई। स्कूलों को आधे अप्रैल के बाद ही स्कूल बंद कर देना चाहिये था। छोटे-छोटे बच्चों को बहुत झेलना पड़ रहा है। एक सप्ताह पहले जिले में लू लगने से एक स्कूली छात्रा की मौत हो गई है।

बता दें कि सराय ममरेज थाना क्षेत्र के चकिया साथर गांव निवासी दशरथ विश्वकर्मा की 11 वर्षीय बेटी रानी जो 9 मई को विद्यालय गई। दोपहर 12:30 बजे स्कूल से छुट्टी होने पर जब वो भीषण लू से होकर घर लौटी तो उसके पेट में ऐंठन होने लगी। कक्षा 6 की छात्रा रानी ने परिजनों से बताया तो वो लोग उसे लेकर फौरन अस्पताल भागे। जहां इलाज के दौरान छात्रा ने 10 मई शनिवार सुबह दम तोड़ दिया।

ग़रीब दशरथ विश्वकर्मा के दो बेटों के अलावा इकलौती बेटी कुमारी रानी 11 वर्ष की थी बेटे भी परिषदीय विद्यालय सिरसा में ही कक्षा सात एवं कक्षा 5 में पढ़ते हैं। स्कूली बच्चों पर भीषण गर्मी और लू का कहर साफ दिख रहा है। सुबह स्कूल जाते समय कुछ राहत रहती है, लेकिन दोपहर में वापसी के समय कड़क धूप बच्चों को बीमार कर रही है। अधिकतर स्कूली बच्चों को उल्टी, दस्त, चक्कर आने के साथ सर्दी-जुकाम के साथ बुखार हो रहा है।

पेशे से शिक्षक राजकुमार कॉलरा के चपेट में आ गये हैं। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षायें चल रही हैं। उनका रोज का भाग दौड़ है। शिक्षक राजकुमार बताते हैं स्कूल से लौटा तो लूजमोशन शुरू हो गया, साथ में उल्टी भी। दवा लिया लेकिन कंट्रोल होने में समय लग गया। शरीर एकदम से कमज़ोर हो गया है। लेकिन परीक्षा में ड्यूटी लगी है तो मजबूरी में स्कूल जाना पड़ता है। इलेक्ट्रॉल पानी लगातार ले रहा हूँ, बस अब यही इच्छा है कि जल्द से जल्द इस गर्मी में स्कूल जाने से छुट्टी मिले और आराम से घर बैठूं।

वहीं दूसरी ओर गर्मी के इस मौसम में शादी व्याह लगन भी ज़ोरों पर हैं। चचेरे भाई की शादी में शामिल होने मुंबई से जौनपुर अपने घर आये आनंद कुमार लू की तपिश झेल रहे हैं। वो कहते हैं 14 मई को चाचा के बेटे की शादी थी। शादी में शामिल होने के बाद से ही बीमार पड़े हैं। पांच दिन हो गये दवाई लिया लेकिन जैसे अब भी पूरे शरीर से आग की लपटें निकल रही हैं। शरीर में दम ही नहीं है। शरीर का पोर-पोर दुख रहा है। लगता है बस कोई मींजता दबाता रहे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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