Tuesday, July 5, 2022

नफरत के ज़हरीले बीज के जरिए वोट की फसल काटना चाहती है बीजेपी

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से मिल रही कड़ी चुनौती के बीच भाजपा के पास प्रदेश में अपनी पांच साल की सरकार में जनता को बताने के लिये कुछ भी नहीं है इसीलिए भाजपा अब खुले आम तमाम मंचों से नफ़रत के सहारे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में लगी हुई है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्या सब के सब पूरी निर्लज्ज़ता से नफ़रत और सांप्रदायिक घृणा का जहर घोल रहे हैं।

2 जनवरी को मेरठ के सलावा गांव में खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए सांप्रदायिक जुबान में कहा कि- “पहले की सरकारों के खेल का ही नतीजा था कि लोग अपना पुश्तैनी घर छोड़ पलायन के लिए मजबूर हो गए थे। उन्होंने कहा कि हमारे मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लोग कभी भूल नहीं सकते कि लोगों के घर जला दिए जाते थे और पहले की सरकार अपने खेल में लगी रहती थी”।

इससे पहले 23 दिसंबर को वाराणसी में नरेंद्र मोदी ने गाय को मुद्दा बनाकर कहा था कि -“हमारे यहां गाय की बात करना, गोबरधन की बात करना कुछ लोगों ने गुनाह बना दिया है। गाय का नाम लेना कुछ लोगों के लिए गुनाह हो सकता है लेकिन हमारे लिए तो गाय माता है, पूजनीय है। उन्होंने कहा कि गाय-भैंस का मजाक उड़ाने वाले लोग ये भूल जाते हैं कि देश के 8 करोड़ परिवारों की आजीविका ऐसे ही पशुधन से चलती है। “गायें मेरे चारों ओर रहे और मैं गायों के चारों ओर रहूं” यह हमारे शास्त्रों व संस्कृति में कहा गया है”।

इससे पहले 7 दिसंबर को गोरखपुर में नरेंद्र मोदी ने लफंगों वाले टोन में कहा था कि -” लाल टोपी वालों को सत्ता चाहिए। घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जों के लिए, माफियाओं को खुली छूट देने के लिए। लाल टोपी वालों को सरकार बनानी है,आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए, उन्हें जेल से छुड़ाने के लिए इसलिए याद रखिये कि लाल टोपी वाले यूपी के लिए ‘रेड अलर्ट’ हैं, यानी ‘खतरे की घंटी’ हैं”।

21 दिसंबर को प्रयागराज में प्रधानमंत्री ने इस दौरान जनसभा में कहा था कि -” बेटों के लिए विवाह की उम्र कानूनन 21 वर्ष जबकि बेटियों के लिए 18 वर्ष है। बेटियां भी चाहती हैं कि उन्हें पढ़ाई और आगे बढऩे के लिए समय मिले, बराबर का अवसर मिले इसी कारण से हम बेटियों के विवाह की उम्र 21 वर्ष करने का प्रयास कर रहे हैं। देश यह फैसला बेटियों के लिए कर रहा है, लेकिन किसको इससे तकलीफ़ हो रही है इसे सब देख रहे हैं’’।

28 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर की रैली में कहा कि -” ये लोग यह भी कहते हैं कि यह तो हमने किया था। मैं सोच रहा हूं बीते दिनों जो बक्से भर-भरके नोट मिले हैं उसके बाद भी ये लोग यही कहेंगे कि ये भी हमने ही किया है। आप कानपुर वाले तो बिजनेस को अच्छे से समझते हैं 2017 से पहले भ्रष्टाचार का जो इत्र इन्होंने यूपी में छिड़क रखा था वो फिर सबके सामने आ गया है लेकिन वो क्रेडिट लेने नहीं आ रहे। नोटों का जो पहाड़ सबने देखा यही उनकी उपलब्धि है यही उनकी सच्चाई है। यूपी के लोग सब देख रहे हैं इसीलिए जनता विकास करने वालों के साथ है। 

26 दिसंबर को कासगंज में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राम के बहाने मतदाताओं में हिंदू मुस्लिम की रेखा खींचते हुए कहा कि – “पहले अयोध्या में प्रभू श्रीराम का मंदिर बनने की मांग पर डंडे पड़ते थे गोलियां चलाई जाती थीं। जब आपने आशीर्वाद दिया तो प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से अयोध्या में प्रभू श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है”।

अमित शाह ने आगे कहा कि – “जो मंदिर का विरोध करते थे और राम भक्तों पर गोली चला रहे थे क्या आप उनका साथ देंगे? उन्होंने कहा कि पहले क़ानून व्यवस्था की परिस्थिति इतनी खराब हो गई थी कि लोग अपनी बच्चियों को स्कूल-कॉलेज भेजने से कतराते थे। 5 साल के अंदर ही योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सारे गुंडे उत्तर प्रदेश से पलायन कर गए।

इससे पहले 26 नवंबर को जालौन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुस्लिम विरोधी कार्ड खेलते हुए कहा था कि – “अभी अखिलेश बाबू बहुत गुस्सा हैं इसका कारण यह है कि हमने तीन तलाक़ समाप्त कर दिया। अखिलेश बाबू विरोध कर रहे हैं, क्यों अखिलेश बाबू तलाक़ से आपका क्या लेना-देना है?” 

इसके अलावा राष्ट्रवाद का कार्ड खेलते हुये अमित शाह ने कहा कि -” कांग्रेस के समय में आए दिन आतंकवादी घुस आते थे। हमारे लोगों, जवानों को मारकर चले जाते थे। आतंकवादियों ने पुलवामा, उरी में हमला किया। यह भूल गए कि इस बार कांग्रेस की सरकार नहीं है, मनमोहन सिंह PM नहीं हैं। हमने10 दिनों में सर्जिकल और एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान में घुसकर बदला लिया।”

इसके अलावा 30 दिसंबर को अलीगढ़ में अमित शाह ‘निजाम’ शब्द के बहाने समाजवादी पार्टी को मुस्लिम परस्त बताते हुये एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम की खाईं को चौड़ा करने की कोशिश करते हुए कहा कि -” निजाम का मतलब शासन होता है लेकिन अखिलेश यादव के लिए इसका मतलब कुछ और है। उन्होंने कहा कि एन का मतलब नसीमुद्दीन, आई का मतलब इमरान मसूद, जेड ए का मतलब आजम खान और एम का मतलब मुख्तार अंसारी है। उन्होंनें कहा कि मैं राज्य की जनता से पूछना चाहते हैं कि राज्य में आपको अखिलेश का निजाम चाहिए या योगी-मोदी का विकास ।

इतना ही नहीं अमित शाह ने पूरी निर्लज्ज़ता के साथ मंच से झूठ बोलते हुये कहा कि सपा की सरकार आई तो राम मंदिर का काम रोक देगी। उन्होंने कहा कि – ” अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश बाबू को गुस्सा आ रहा है। चाहे वो जितना भी जोर लगा लें मंदिर निर्माण नहीं रुकेगा। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा 300 से अधिक सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में हर जिले में गुंडे-मवाली होते थे। यूपी अब गुंडा मुक्त हो गया है। प्रदेश में बलात्कार के मामलों में प्रतिशत में कमी आई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास करा रहे हैं। अखिलेश यूपी में सरकार बनाने का सपना देख रहे हैं और राम मंदिर काम बंद करने की बात कर रहे हैं।

22 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नफरती भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि – “पिछली सरकारों ने रामभक्तों पर गोलियां चलाईं और वर्तमान सरकार रामभक्तों पर पुष्पवर्षा करती है।अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण प्रारम्भ हो गया है। पहले कांवड़ यात्रा पर रोक लगती थी अब काशी का भव्य-नव्य स्वरूप सभी के समक्ष है। उन्होंने कहा कि  वर्ष 2017 से पहले पर्व और त्योहारों पर दंगे होते थे,

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा नहीं करने दी जाती थी। रामलीला के आयोजनों को रोका जाता था। अब सारे आयोजन बिना किसी व्यवधान के हो रहे हैं क्योंकि दंगाइयों को उनकी सही जगह पहुंचा दिया गया है। आज कोई भी दंगाई प्रदेश में सिर नहीं उठा सकता। आज माफियाओं की अवैध कमाई पर सरकारी बुलडोजर चल रहा है। 

प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री जब नफरती भाषा बोलने में लगे हों तो डिप्टी सीएम कैसे पीछे रहते। 1 दिसंबर को केशव मौर्या ने ट्वीट कर कहा कि अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है और मथुरा की तैयारी है। 

बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मथुरा में तैयारी राजनैतिक मुद्दा नहीं है आस्था का विषय है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना पर काम चल रहा है और अब मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर एक मंदिर के निर्माण की प्रतीक्षा हो रही है। बीजेपी के लिए ये चुनावी मुद्दे नहीं हैं। ध्रुवीकरण के आरोप ग़लत हैं। 

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