Monday, December 5, 2022

भाजपा की बी टीम को मज़बूत करता संघ!

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पिछले कुछ दिनों से सत्तारूढ़ भाजपा की रीति नीति में थोड़ी छद्म तब्दीली का जो आभास लोगों को कराया जा रहा है उस पर किसी को भरोसा नहीं हो रहा है यही वजह है संघ ने अब अपनी बी टीम को विस्तार देने का दूसरा षड्यंत्र पुरजोर तरीके से प्रारंभ कर दिया है ।वह भली-भांति समझ गया है कि पहले जिन अन्य दलों के गठबंधन में ममता जुट रहीं थीं उसे कांग्रेस से दूर रखा जाए तथा अन्य दलों को साथ लेकर जनता को नये चक्रव्यूह में फांस लिया जाए। इसलिए पहली कोशिश नाकाम हो गई।

अब ममता भाजपा की बी टीम का एक चेहरा बनके सबके सामने आ चुकी हैं। जैसे अरविंद केजरीवाल और ओवैसी ने पिछले दिनों भाजपा के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर काम किया। ममता के लिए यह डगर कठिन नहीं थी क्योंकि अटल जी के मंत्रिमंडल में वे शामिल रहीं एनडीए की सदस्य थीं। चूंकि बंगाल में वे संघ के प्रमुख शत्रु वामदलों को परास्त की हैं इसलिए संघ उन पर पहले से ही मेहरबान है। अप्रत्यक्ष सहयोग भी मिला हो ऐसा लगता है। ममता और मायावती दो ऐसे राजनैतिक चेहरे हैं जिन पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। अरविंद और ओवैसी तो जिस तरह भाजपा के खिलाफ भाषणों में आग लगाने का काम कर रहे हैं उसे देश का सीधा साधा अवाम नहीं समझ पा रहा है।

अब ममता के प्रति भी कोई संदेह नहीं रहा। उन्होंने जिस तरह बिला वजह कांग्रेस से दूरी बनाई । प्रशांत किशोर को भेजा और फिर मुख मोड़ा है। यह बहुत कुछ कहता है। प्रशांत किशोर भी उसी खेमे से आते हैं जिससे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, किरण बेदी वगैरह अन्ना हजारे जैसे संघी के नेतृत्व में साथ थे। वे जिस लक्ष्य लोकपाल के लिए जुटे थे वो सब फ्राड था और उनकी सत्यता आने के बाद जिसका कभी नाम भी नहीं लिया गया।अन्ना तो शीतमुद्रा में चले गए।जिन लोगों ने संघ के इस षड्यंत्र को समझ लिया है वे अब इस कथित भाजपा की बी टीम को भी संदेहास्पद मान रहे हैं। क्योंकि संघ और भाजपा के तमाम राजनीतिक खेल गुपचुप ही चलते हैं।

ममता का अडानी जैसे लुटेरे और देश के प्रमुख संस्थानों के खरीदार को बंगाल में लूट के लिए आमंत्रण देना यह बताता है कि वे भी मोदी की रीति नीति की कायल हैं और गरीबों के प्रति नहीं बल्कि अमीरों के प्रति वफ़ादार हैं। ममता यह भी ना भूलें कि सिंगूर में टाटा के नैनो कार के कारखाने के प्रतिरोध ने ही बंगाल की सत्ता शिखर पर पहली बार बैठाया था। वह कारखाना तब गुजरात चला गया था और आज गुजरात के अडानी को बंगाल बुलाकर कारखाना बनाने का आमंत्रण दिया जा रहा है।जनता सब याद रखती है।

अब तो लोग यह भी कह रहे हैं कि कल अखिलेश यादव और राकेश टिकैत पर भी डोरे डाले जा सकते हैं। संघ 2024 जीतने की तैयारी में कुछ भी कर सकता है। इस बात को सिर्फ वामदल और कांग्रेस समझ रहे हैं बाकी दल यदि इस साज़िश को नहीं समझे तो देश को बहुत नुकसान होगा। वामदल और कांग्रेस को व्यापक तौर पर इस घटिया साजिश का खुलासा करने के लिए सक्रिय होना पड़ेगा। आज भी कांग्रेस के पास बड़ा जनाधार है और वामदलों की कार्यप्रणाली के बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं।जनता भाजपा से सख्त नाराज भी है इसे वोट में बदला जा सकता है। इस नरेंद्र गठजोड़ के ख़िलाफ़ खड़े होना होगा। यहां यह कहना भी उचित होगा कि आज संघ और भाजपा की हालत इतनी गंभीर है कि वे राजनीति को एक घृणित स्वरूप देने पर आमादा है। इसे रोकना ही होगा।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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