Tuesday, July 5, 2022

जहां मरने को अभिशप्त है अवैध उत्खनन में लगा मजदूर

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रांची। झारखंड के कोयलांचल में जहां कोयले के अवैध उत्खनन में लगा मजदूर क्लास  मरने को अभिशप्त है वहीं माफिया, प्रशासन व राजनीतिक गठजोड़ का पौ बारह है। बताना जरूरी होगा कि कोयले के अवैध उत्खनन के दौरान लगातार हो रहीं मौतों के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा अवैध खनन का कारोबार। हम केवल धनबाद के निरसा की बात करें तो अक्टूबर 2021 से अब तक निरसा पुलिस अनुमंडल क्षेत्र में अवैध खनन में 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि झारखंड धनबाद जिलान्तर्गत निरसा क्षेत्र में 22 मई को सुबह इसीएल की राजा कोलियरी आउटसोर्सिंग में अवैध उत्खनन के दौरान चाल धंसने से एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि तीन अन्य मलबे में दबने से घायल हो गये। मृतक सांगामहल गांव का रहने वाला बताया जाता है, जबकि तीनों घायल डांगापाड़ा क्षेत्र के रहने वाले बताये जाते हैं। खबर के मुताबिक घटना की जानकारी पुलिस प्रशासन को नहीं है, वहीं यह खबर स्थानीय मीडिया से भी गायब है। सूचना है कि घायलों का गुप्त रूप से बंगाल के एक निजी नर्सिंग होम में इलाज कराया जा रहा है।

घटना के बारे जो बातें छन कर आई हैं उसके मुताबिक निरसा के राजा कोलियरी आउटसोर्सिंग में 22 मई को तड़के चार बजे 300-400 लोग अवैध खनन कर रहे थे। इसी दौरान ऊपर से मलबा ढहने से चार लोग दब गये। मलबा में दबे चारों में से एक व्यक्ति की मौत हो गयी जबकि तीन घायल हो गये। घटना के बाद आनन-फानन में कोयला तस्करों द्वारा मृतक के शव को ले जाकर सांगामहल क्षेत्र के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना पर चौंकाने वाला पहलू यह है कि कोयला तस्करों ने शव को जलाकर अंतिम संस्कार कर दिया और पुलिस प्रशासन को जानकारी तक नहीं हुई, जबकि घटना की सूचना पाकर कई लोग घटनास्थल पर पहुंचे। कुछ स्थानीय मीडियाकर्मी भी पहुंचे थे। बावजूद इसके पुलिस को इसकी जानकारी न होना इस बात का पुख़्ता सबूत है कि ऐसे मामलों में पुलिस प्रशासन की कितनी गहरी मिलीभगत है।

दूसरी तरफ ग्रामीणों से मृतक और घायलों का नाम पूछे जाने पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। एक-दो ग्रामीणों ने काफी सहमे हुए और फुसफुसाते हुए बताया कि घटना के बाद लोग दहशत में हैं। अवैध कोयला धंधेबाजों द्वारा चेताया गया कि मीडिया कर्मियों या किसी को मृतक व घायलों का नाम बताया तो बाद में इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

बता दें कि राजा कोलियरी आउटसोर्सिंग से अवैध खनन कर भारी मात्रा में कोयला स्कूटर, मोटरसाइकिल एवं ट्रैक्टर के माध्यम से क्षेत्र के चिन्हित भट्ठों में खपाया जाता है। अवैध कोयला को खुदिया फाटक स्थित एक फैक्ट्री एवं नीलकुठी मोड़ स्थित फैक्ट्री में पहुंचाया जाता है।

सबसे दुखद पहलू यह है कि अक्टूबर 2021 से अब तक निरसा पुलिस अनुमंडल क्षेत्र में अवैध खनन में 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जिसमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं, इसके बावजूद अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह बेरोजगारी है।

बताना जरूरी होगा कि बेरोजगारी के अंधकूप से घिरे मजदूर क्लास के लोग अपनी जान की बिना परवाह किए केवल अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए, इस अवैध कोयला खनन में लगे रहते हैं और आए दिन अपनी जान गंवाते रहते हैं।

बताते चलें कि धनबाद जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में कोयले की बेखौफ तस्करी के ‘काले कारोबार’ ने इस बार तस्करी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले के विभिन्न हिस्सों से प्रतिमाह कोयले का अवैध कारोबार करीब 600 करोड़ रुपये का होता है। तस्करों द्वारा बीसीसीएल-इसीएल की विभिन्न कोलियरियों में हर रोज करीब एक हजार हाईवा इस अवैध कारोबार में इस्तेमाल होता है। कोयले का यह अवैध कारोबार जिले के झरिया, निरसा, बाघमारा से लेकर महुदा तक धड़ल्ले से हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने पिछले दिनों निरसा इलाके का निरीक्षण किया। एनजीटी को अनुमान है कि सिर्फ निरसा इलाके से ही रोज 10 हजार टन कोयले का अवैध कारोबार हो रहा है।

एक खबर के अनुसार वर्तमान में बीसीसीएल हर दिन औसतन 85-90 हजार टन कोयले का उत्पादन कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक कंपनी के उत्पादन का करीब 15-20 फीसदी कोयला चोरी हो जा रहा है। खासकर झरिया, निरसा व बाघमारा कोयलांचल में अवस्थित बीसीसीएल-इसीएल की विभिन्न कोलियरियों में तो मानों कोयला लूट की पूरी छूट मिल चुकी है।

झरिया के एनटी-एसटी, ऐना, बस्ताकोला, कुइयां, भौंरा, पाथरडीह, टासरा व बाघमारा क्षेत्र के गजलीटांड़, मुराईडीह, सोनारडीह, चैतुडीह, तेतुलमारी, एकेडब्ल्यूएम, शताब्दी परियोजना क्षेत्रों समेत आस-पास के सभी इलाकों में बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध कारोबार चल रहा है। यह कारोबार न सिर्फ रात में, बल्कि दिन के उजाले में भी धड़ल्ले से संचालित हो रहा है।

खास बात यह कि सिर्फ झरिया व बाघमारा कोयलांचल में अवस्थित बीसीसीएल की खदानों से हर दिन औसतन 650 से 700 हाईवा कोयला लोड हो कर निकलता है, जबकि निरसा से भी करीब 300 हाईवा कोयला प्रतिदिन टपाया जा रहा है।

इन हाइवा पर लोड कोकिंग कोल बरवाअड्डा, गोविंदपुर, बलियापुर सहित अन्य स्थानीय हाडकोक भट्ठों में खपाया जा रहा है, जबकि नन कोकिंग कोयले की खपत पश्चिम बंगाल, बिहार व यूपी की मंडियों में हो रही है। इस इलाके के लोग बताते हैं कि कोयले की ऐसी चोरी पहले कभी नहीं देखी। एक अनुमान के मुताबिक धनबाद से प्रतिदिन 20 करोड़ और महीने में 600 करोड़ से अधिक के अवैध कोयले का कारोबार हो रहा है।

कोयले के इस अवैध कारोबार के गणित को देखें तो झरिया, निरसा व बाघमारा कोयलांचल में अवस्थित बीसीसीएल-इसीएल की खदानों से हर दिन 18-20 हजार टन कोयले की अवैध निकासी हो रही है। वर्तमान में बीसीसीएल औसतन 12 हजार रुपया प्रतिटन कोयले की बिक्री कर रही है, जबकि कोकिंग कोल की बिक्री 17 हजार रुपया प्रतिटन हो रही है। ऐसे में अवैध कोयले का रेट औसतन 10 हजार रुपया प्रतिटन ही मान लिया जाए तो प्रतिदिन 20 करोड़ रुपया, यानी हर माह करीब 600 करोड़ रुपये के कोयले का अवैध कारोबार हो रहा है।

पूरे जिले में संचालित हो रहे अवैध कोयले के इस धंधे में यूं तो छोटे-बड़े कई सिंडिकेट सक्रिय हैं। परंतु हर क्षेत्र में कुछ खास लोग ही किंगपिन बने हुए हैं। जानकारी के मुताबिक निरसा कोयलांचल में संचालित हो रहे कोयले के इस अवैध धंधे पर रमेश गोप, आर एस सिंह और एम खान के सिंडिकेट का पूरी तरह से कब्जा है।

इनकी छत्रछाया में ही निरसा कोयलांचल में छोटे-बड़े तस्कर कोयले का अवैध कारोबार कर रहे हैं, जबकि झरिया में एम सिंह, जी यादव, एम यादव, एस-एस व के कुमार का कब्जा है।

वहीं बाघमारा कोयलांचल में आर टुडू का एकछत्र राज है। उसकी छत्रछाया में ही कई छोटे-बड़े सिंडिकेट व धंधेबाज कोयले का अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं। यहां टुडू के इशारे पर ही अवैध धंधेबाजों का पूरा सिंडिकेट संचालित हो रहा है। बिना टुडू की अनुमति के काम करने वाले लोगों की गाड़ियां पकड़ ली जाती हैं। सूत्र बताते हैं कि टुडू को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, वहीं क्षेत्र के विधायक का भी वरदहस्त प्राप्त है, क्योंकि दो अलग-अलग राजनीतिक धारा के बावजूद दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

सूत्र बताते हैं कि एक तरफ जहां जी पांडेय, वी चौधरी, वी महतो व आर शर्मा के पेपर पर बिहार व यूपी की मंडियों में अवैध कोयला पहुंच रहा है। वहीं एस मंडल व आर गोप के पेपर पर पश्चिम बंगाल में कोयला खपाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ जी पांडेय के पेपर पर बिहार-यूपी से पुरुलिया तक कोयला भेजा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक बिहार-यूपी के लिए पेपर बनाने के एवज में 350-450 रुपया प्रति टन, पश्चिम बंगाल के लिए 800 रुपया प्रति टन व पुरुलिया के पेपर के लिए 700 रुपया प्रतिटन के हिसाब से राशि की वसूली की जा रही है। सर्वाधिक 500 गाड़ियां बिहार-यूपी, 250 गाड़ियां बंगाल व करीब 100 गाड़िया हर दिन पुरुलिया भेजी जा रही हैं।

कहना ना होगा कि जहां इस अवैध कोयला कारोबार से केवल जिले के नहीं अपितु पूरे राज्य के कोयला माफियाओं सहित प्रशासनिक हलका, राजनीतिक गिरोह व सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों का पौ बारह है, वहीं बेरोजगारी के अंधकूप से घिरे मजदूर क्लास के लोग अपनी जान की बिना परवाह किए केवल अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए, इनके इस अवैध कोयला खनन में लगे रहते हैं और आए दिन अपनी जान गंवाते रहते हैं।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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