संस्कृति-समाज

पहलगाम: ‘वायरल हीरो’ ने कहा ”इससे अच्छा था हमारे घरों के दरवाज़े खोलकर हमें मार देते वो

देर रात हमने सज्जाद अहमद भट्ट को फोन किया, दूसरी तरफ से बहुत ही धीमी आवाज़ थी, जिसमें… Read More

भारतीय समाज का सच देखने और दिखाने के लिए तैयार नहीं है केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड

फिल्म संतोष उस समय चर्चा में आई जब भारत में इसे रिलीज होने से रोक दिया गया।… Read More

पत्रकारिता के बीच देखी संवेदनहीन समाज की आवाज़ है ‘प्रतिरोध के स्वर”

समदर्शी प्रकाशन से प्रकाशित ‘प्रतिरोध के स्वर’ काव्य संग्रह के कवि वरिष्ठ लेखक पत्रकार प्रमोद झा हैं।… Read More

मंडलोई की आत्मकथा सतपुड़ा और भूख का जीवंत अनुभव कराती है : विश्वनाथ त्रिपाठी

नई दिल्ली। लीलाधर मंडलोई की आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ न सिर्फ़ एक व्यक्ति के जीवन… Read More

निर्मला जैन को मंज़ूर नहीं था कि केवल स्त्री होने के नाते उन्हें जाना जाए : प्रो. वीर भारत तलवार

नई दिल्ली। हिन्दी आलोचना की परंपरा को नई दृष्टि और वैचारिक दृढ़ता देने वाली विदुषी डॉ. निर्मला… Read More

क्या आज कोई देवेन उर्दू शायर नूर शाहजहानाबादी का ‘मुहाफ़िज़’ बन पाएगा ? 

”मैं तो आपको एक ख़ुशख़बरी सुनाने आया था, नूर साहब ने अपना नया कलाम मेरी हिफ़ाज़त में… Read More

पुस्तक समीक्षा : मार्क्सवादी पद्धति से ‘गरीबी का चक्रव्यूह’ का विश्लेषण करती किताब

अवतार सिंह जसवाल की पुस्तक ‘गरीबी का चक्रव्यूह ‘ मजदूर वर्ग और कार्यकर्ताओं को शिक्षित करने की… Read More