संस्कृति-समाज

क्या आज कोई देवेन उर्दू शायर नूर शाहजहानाबादी का ‘मुहाफ़िज़’ बन पाएगा ? 

”मैं तो आपको एक ख़ुशख़बरी सुनाने आया था, नूर साहब ने अपना नया कलाम मेरी हिफ़ाज़त में… Read More

पुस्तक समीक्षा : मार्क्सवादी पद्धति से ‘गरीबी का चक्रव्यूह’ का विश्लेषण करती किताब

अवतार सिंह जसवाल की पुस्तक ‘गरीबी का चक्रव्यूह ‘ मजदूर वर्ग और कार्यकर्ताओं को शिक्षित करने की… Read More

अन्वेषा वार्षिकांक : प्रतिकूल समय में एक जरूरी रचनात्मक हस्तक्षेप

अन्वेषा का वार्षिकांक आए हुए कई दिन हो गए। यह प्रवेशांक बहुत भारी-भरकम अंक है। 544 पृष्ठ,… Read More

‘मनुष्य न कहना’: मानवीय संवेदनाओं का कोलाज है ममता जयंत की कविताएं

ममता जयंत मनुष्य की भावनाओं को चित्रित करने वाली कवयित्री है। हाल ही में प्रकाशित उनका कविता… Read More

अंबेडकर जयंती विशेष: अंबेडकर से प्रेम तो उनके विचारों से परहेज क्यों?

अंबेडकर जयंती पर हर वर्ष सरकार बाबा साहेब को याद करती है। देश के लिए उनके योगदान… Read More

अंबेडकर जयंती पर विशेष : समकालीन दलित राजनीति- विकल्प की त्रासदी

हमारे समय के सर्वकालिक महान विचारक कार्ल मार्क्स का कथन है, “इतिहास अपने को दोहराता ज़रूर है,… Read More