बीच बहस

सावित्राईबाई फुले के दो काव्य संग्रह:  ब्राह्मणवाद-सामंतवाद के खिलाफ विद्रोह और आधुनिक संवेदना-चेतना की सृजनात्मक अभिव्यक्तियां

अतीत के इन ब्राह्मणों के धर्मग्रंथ फेंक दो करो ग्रहण शिक्षा, जाति की बेड़ियों को तोड़ दो… Read More

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तज़ू ही सही: आइए, नये साल का स्वागत करें!

नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तज़ू ही सहीनहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही/गर इंतज़ार है कठिन… Read More