लोकतांत्रिक समाज में पत्रकारिता को “चौथे स्तंभ” के रूप में देखा जाता है, जिसकी भूमिका केवल सूचना… Read More
बीच बहस
एक मित्र हुआ करते थे, जो संघी थे लेकिन बुद्धिहीन भक्त नहीं थे। एक तो वर्किंग क्लास… Read More
“समाचार वही है जो कोई कहीं दबाना चाहता है, बाक़ी सब विज्ञापन है।” – अल्फ्रेड हर्म्सवर्थ, डेली… Read More
5 जनवरी को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया… Read More
(मौजूदा समय में मनोरंजन और फिल्म की दुनिया में वेबसीरीज ने अपनी एक अलग ही पहचान कायम… Read More
रविवार की सुबह जब मैंने ‘द संडे एक्सप्रेस’ को उठाया तब सबसे पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस… Read More
(मार्क्स का पेशा था- दुनिया की वैज्ञानिक व्याख्या और दुनिया को बदलने के लिए क्रांतिकारी व्यवहार।) दुनिया… Read More
अपनी शुरुआत से ही, राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)… Read More
यह फ़िल्म मैंने पहले पोस्ट-प्रोडक्शन चरण में बिना म्यूजिक, एफएक्स या डीआई के देखी थी। मुझे लगा… Read More
भारत और पाकिस्तान के देश प्रमुखों पर जिस तरह आपरेशन सिंदूर बंद कराने की ज़ुर्रत अमेरिकी राष्ट्रपति… Read More