राज्यसभा चुनाव में फासीवादी ताकतों को पराजित करना समय की आवश्यकता – दीपांकर भट्टाचार्य 

रांची। भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार, 14 जून, को कहा, “झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाकपा-माले इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेगी और पार्टी को विश्वास है कि इंडिया गठबंधन निश्चित रूप से जीत दर्ज करेगा।”

वह यहाँ आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फासीवादी ताकतों को पराजित करने के लिए विपक्षी एकता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “इसके माध्यम से बड़ी संख्या में गरीब, दलित, प्रवासी मजदूरों और खासकर मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। झारखंड में भी इस तरह की प्रक्रिया चल रही है और बगोदर विधानसभा क्षेत्र में ही लगभग 1.40 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की सूचना मिली है।

उन्होंने कहा कि पार्टी ‘वोट बचाओ’ अभियान चलाकर जनता के बीच व्यापक हस्तक्षेप करेगी और मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करेगी।”

दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि “देशभर में छात्र-नौजवान सड़कों पर हैं। नीट, सीयूईटी, सीबीएसई, एसएससी तथा अन्य परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं का आक्रोश अब सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है। यह छात्रों और नौजवानों के भविष्य तथा बदलाव का आंदोलन है। भाकपा-माले इन आंदोलनों का समर्थन करती है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग कर निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली स्थापित करने की मांग करती है।”

उन्होंने कहा कि “पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के लिए जिस प्रकार की अनियमितताओं का सहारा लिया जा रहा है, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व है और लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं चुनावी प्रक्रिया के साथ खुली जालसाजी है।”

पार्टी महासचिव ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “कमजोर होता रुपया, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव तथा कॉरपोरेटपरस्त आर्थिक नीतियों के कारण आम जनता पर संकट लगातार बढ़ रहा है। ईरान के खिलाफ जारी युद्ध और तेल-गैस आपूर्ति संकट की आड़ में वास्तविक आर्थिक संकटों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। भाकपा-माले निजीकरण, सार्वजनिक खर्च में कटौती और कॉरपोरेटपरस्त नीतियों का विरोध करते हुए अधिक सार्वजनिक निवेश, रोजगार की सुरक्षा, महंगाई पर नियंत्रण तथा मजदूरों-किसानों और आम जनता की आय बढ़ाने वाली आर्थिक नीतियों की मांग करती है।”

बता दें भाकपा माले की दो दिवसीय राज्य कमिटी की बैठक हटिया गेस्ट हाउस 13-14 जून को संपन्न हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी के खिलाफ “फासीवाद के खिलाफ दाम बांधो काम दो और जीने लायक वेतन दो,” “बुलडोजर राज हो बर्बाद”, “सभी भारतीयों को वोट का अधिकार बहाल करो” तथा “नागरिकों को बंदी बनाना बंद करो” जैसे नारों के साथ 16 जुलाई से अगस्त माह तक देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा।

उक्त बैठक में बताया गया कि पार्टी अमन और इंसाफ की रक्षा के लिए तथा नफरत और हिंसा की राजनीति के खिलाफ संघर्ष को और तेज करेगी। साथ ही सामंती जुल्म के खिलाफ राज्य भर में लड़ाई तेज करेगी। झारखंड में राज्यसभा चुनाव में फासीवादी ताकतों को पराजित करने के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करेगी।

पार्टी के राज्य कमिटी की  बैठक में खूंटी और गोदलपुरा के आंदोलन से जुड़े लोगों ने सैकड़ों की संख्या में पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए। 

प्रेस वार्ता में पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य सहित भाकपा माले राज्य सचिव मनोज भक्त, पोलित ब्यूरो सदस्य हलधर महतो, पार्टी विधायक अरूप चटर्जी एवं पार्टी विधायक चंद्रदेव महतो मौजूद थे।

(जनचौक ब्यूरो)

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