पुलिस दमन, झूठे मुकदमों के खिलाफ गुजरात कांग्रेस का प्रदर्शन

गांधीनगर। गुजरात में पुलिस की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई, विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों तथा सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले नागरिकों को निशाना बनाए जाने के आरोपों को लेकर गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को प्रदर्शन किया और गांधीनगर स्थित गुजरात पुलिस भवन में राज्य के पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. तुषार चौधरी के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदर्शन में विधानसभा में विपक्ष के पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी, विधायक दिनेशजी ठाकोर, कांति खराड़ी, इमरान खेड़ावाला और अमरतजी ठाकोर सहित कई नेता शामिल हुए। ओडिशा के प्रभारी लालजी देसाई, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष गीताबेन पटेल, अहमदाबाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष सोनल बेन पटेल और गांधीनगर शहर कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिकुमार पटेल सहित शहर एवं जिला इकाइयों के पदाधिकारी, पार्षद और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

‘सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई हो रही है’

ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस और प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करने के बजाय सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर कार्रवाई कर रहे हैं। अमित चावड़ा ने कहा कि ‘’गुजरात और देश में ऐसी स्थिति बन रही है, जिसमें सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को देशद्रोही बताकर कथित झूठे मामलों में जेल भेजने की कोशिश की जाती है।‘’

चावड़ा ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन का रवैया भाजपा कार्यकर्ताओं जैसा हो गया है। उनके मुताबिक, भाजपा के कार्यकर्ताओं को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचकर विरोध करने की खुली छूट मिलती है, जबकि विपक्ष और आम नागरिकों की आवाज को रोकने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए पुलिस अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराने की मांग की। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जिन अधिकारियों की संपत्ति उनकी ज्ञात आय से कई गुना अधिक होने की शिकायतें हैं, उनकी आय और संपत्ति की जांच होनी चाहिए।

चावड़ा ने कहा कि कांग्रेस जिग्नेश मेवाणी, पाटण की महिला नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मामलों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

स्थानीय निकाय चुनावों में पुलिस के दुरुपयोग का आरोप

डॉ. तुषार चौधरी ने स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवारों को कथित रूप से परेशान किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाने, चुनाव प्रचार में बाधा डालने और मतदाताओं को डराने के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया गया।

चौधरी ने कहा कि विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों को विरोध प्रदर्शन की अनुमति लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जबकि भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों को आसानी से मंजूरी मिल जाती है। उन्होंने कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों और पुतला दहन की घटनाओं में पुलिस की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की।

उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के दौरों के दौरान विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर नजरबंद या हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान इस प्रकार की कार्रवाई नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करती है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कथित सेंसरशिप को भी गंभीर मुद्दा बताया।

गांधीनगर चुनाव में उम्मीदवार यूनुस परमार की हिरासत का मामला

ज्ञापन में हालिया गांधीनगर महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुलिस की भूमिका पर विशेष सवाल उठाए गए। कांग्रेस के मुताबिक, वार्ड नंबर चार के पार्टी उम्मीदवार यूनुस परमार को चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हिरासत में लिया गया था। उनके कुछ समर्थकों को भी स्थानीय अपराध शाखा द्वारा सेक्टर-7 पुलिस स्टेशन ले जाए जाने का आरोप लगाया गया।

कांग्रेस ने कहा कि उम्मीदवार और उनके समर्थकों को छुड़ाने के लिए विधायक जिग्नेश मेवाणी तथा सूर्यसिंह डाभी सहित पार्टी के नेता पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। इसके बाद इन नेताओं के खिलाफ भी मामले दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया।

पार्टी ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि उम्मीदवार तथा उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव के दौरान पुलिस की कार्रवाई से उसके उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को नुकसान पहुंचा। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस या प्रशासन का पक्ष प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।

पाटण में महिला कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल

कांग्रेस ने पाटण स्थित पार्टी कार्यालय में हुई एक घटना को भी ज्ञापन में शामिल किया। पार्टी के अनुसार, राहुल गांधी की तस्वीर पर स्याही डालने की कथित कोशिश को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में महिला नेताओं जमाबेन ठाकोर और भूमिकाबेन पटेल के खिलाफ कार्रवाई की गई।

कांग्रेस ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई समान आधार पर की गई या नहीं। पार्टी ने कुछ यूट्यूबरों और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं के अकाउंट बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस के अनुसार, इन अकाउंटों को बंद करने के लिए किस कानूनी आधार का इस्तेमाल किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।

खोरज जमीन विवाद में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

ज्ञापन में गांधीनगर जिले के खोरज गांव में एक ठाकोर परिवार की जमीन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लगभग 150 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही जमीन को एक करोड़ रुपये में अपने नाम कराने का प्रयास किया गया था।

पार्टी ने इस मामले में गांधीनगर रेंज के आईजी वीरेंद्र यादव, अडालज पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक देसाई और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कांग्रेस का दावा है कि जमीन के मालिक परिवार पर दबाव बनाया गया था।

इसके अलावा, पूर्व सांसद और गुजरात प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ठाकोर का नाम शिकायत में शामिल कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया गया। कांग्रेस ने मांग की कि जमीन विवाद के सभी पहलुओं, संबंधित शिकायतों और अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र रूप से जांच की जाए। ये आरोप कांग्रेस के ज्ञापन में लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।

धवल दवे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग

कांग्रेस ने भाजपा के बनासकांठा जिला प्रभारी धवल दवे के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन के अनुसार, वडगाम के कांग्रेस विधायक की बहन के बारे में सोशल मीडिया पर कथित अभद्र टिप्पणियां की गई थीं।

कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। पार्टी ने संबंधित शिकायत पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलने की आशंका पैदा हो सकती है।

शराब, ड्रग्स, हत्या और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग

कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में पुलिस की कार्यप्रणाली के साथ-साथ राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी चिंता जताई। पार्टी ने शराब, चरस, गांजा और अन्य मादक पदार्थों के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।

इसके अलावा, हवाला रैकेट, हत्या, बलात्कार और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में उचित कार्रवाई करने की अपील की गई। कांग्रेस ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई करना और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखना भी है।

स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पुलिस के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए निष्पक्ष समिति गठित करने की मांग की। पार्टी चाहती है कि विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मामलों की समीक्षा की जाए और जहां कानूनी आधार नहीं बनता, वहां उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाए।

कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शनों की अनुमति में कथित भेदभाव, नागरिकों की शिकायतें दर्ज करने में लापरवाही, जमीन और संपत्ति विवादों में पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता, राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान हिरासत और गिरफ्तारियों तथा पुलिस अधिकारियों की संपत्ति एवं भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जांच कराने की मांग भी रखी।

ज्ञापन में कहा गया कि पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उसकी कार्यप्रणाली निष्पक्ष होनी चाहिए और कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि प्रस्तुत शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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