Monday, December 5, 2022

गुजरात विधानसभा चुनावों की घोषणा को लेकर चुनाव आयोग पर भाजपा को अनुचित लाभ पंहुचाने का आरोप

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चुनाव तारीखों की घोषणा को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने सफाई देते हुए कहा है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने में आयोग ने परंपराओं का पालन किया है। वर्ष 2017 में भी दोनों राज्यों के चुनावों की घोषणा अलग-अलग तिथियों पर की गई थी लेकिन मतगणना एक ही तिथि पर कराई गई थी।जबकि हिमाचल प्रदेश के साथ गुजरात विधानसभा चुनावों का एलान नहीं किए जाने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बड़े-बड़े वादे करने व उद्घाटन करने के लिए और समय मिल गया है। इसलिए यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है। हकीकत देखने पर विपक्ष के आरोपों में दम दिखाई पड़ रहा है क्योंकि पीएम मोदी ने इस बीच 5 दिन गुजरात में बिताए, कम से कम 7,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया; किसानों से गृहिणियों से लेकर होमगार्ड तक, सभी को राहत देने की कोशिश की है।

गुजरात में 1 और 5 दिसंबर को चुनाव होने हैं। तारीखों की घोषणा कुछ देर से की गई और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मौका मिल गया कि वे अंतिम कुछ हफ्तों के दौरान ‘सरकारी खर्चे’ पर जमकर चुनाव प्रचार कर सकें। पिछले एक माह के दौरान गुजरात की अपनी चार यात्राओं के दौरान अकेले प्रधानमंत्री मोदी ने दो लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जो घोषणाएं कीं, जाहिर ही वे इससे अलग हैं। राज्य में हुए पिछले डिफेंस एक्सपो में भी जो निवेश के वादे हुए, वे भी इससे अलग हैं।

14 अक्टूबर से 20 दिनों में, जब चुनाव आयोग (ईसी) ने हिमाचल प्रदेश के लिए विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की, लेकिन गुजरात चुनाव की तारीखों को अधिसूचित नहीं किया, गुजरात में भाजपा सरकार ने कई समुदायों को लक्षित करते हुए घोषणाएं कीं । प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य में हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए पांच दिन बिताए। आदर्श आचार संहिता घोषणा के दिन से लागू होती है, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने वाले किसी भी नए निर्णय की घोषणा नहीं की जा सकती है।

15 अक्टूबर को गुजरात सरकार ने भारतीय किशन संघ के मुद्दों पर गौर करने के लिए 10 सदस्यीय पैनल का गठन किया, जो एक भाजपा सहयोगी संगठन है, जो लंबे समय से किसानों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विरोध कर रहा है।

17अक्टूबर को राज्य सरकार ने पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) पर मूल्य वर्धित कर (वैट) में 10 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की; उज्जवला योजना के तहत 38 लाख लाभार्थियों को दो मुफ्त गैस सिलेंडर; वन विभाग में करीब 823 रिक्त पदों को भरने की घोषणा।

18 अक्टूबर को दिवाली से पहले, सरकार ने घोषणा की कि वह राज्य के 71 लाख कार्ड राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम कार्ड धारकों को रियायती दरों पर अतिरिक्त 1 किलो चीनी और 1 लीटर खाद्य तेल वितरित करेगी।

20 अक्टूबर को पीएम मोदी ने गांधीनगर में डिफेंस एक्सपो और मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया । जूनागढ़ में उन्होंने 4155 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया ।

21 अक्टूबर को जीवन (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) पहल और तापी को लॉन्च करने के लिए पीएम ने केवड़िया में सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया, जहां मोदी ने 2,192 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की।मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि तापी में उकाई बांध परियोजना से प्रभावित लगभग 16,000 व्यक्तियों को दी गई 18,000 एकड़ प्रतिपूरक भूमि को बिना किसी प्रीमियम के पुराने कार्यकाल से नए कार्यकाल में परिवर्तित किया जाएगा।संगठित श्रमिकों के लिए एक स्वास्थ्य जांच योजना की घोषणा की गई और आउटबोर्ड मशीन (ओबीएम) नौकाओं वाले मछुआरों को वित्तीय सहायता दोगुनी कर दी गई।

गृह मंत्री हर्ष संघवी ने घोषणा की कि 27 अक्टूबर को भाई दूज तक, राज्य में यातायात पुलिस व्यक्तियों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने के लिए दंडित नहीं करेगी, बल्कि उन्हें लाल गुलाब देगी।

भाजपा वर्ष 1995 से गुजरात जीत रही है। नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल राष्ट्रीय राजनीति और प्रधान मंत्री के कार्यालय की उनकी यात्रा के लिए लॉन्च-पैड बन गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में, कांग्रेस ने भाजपा को करीबी मुकाबले में 100 सीटों से नीचे ला दिया। भाजपा पर इसबार खतरा मडरा रहा है और पीएम मोदी ने गुजरात जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।

आम आदमी पार्टी की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है । 1990 में भाजपा के साथ गठबंधन का नेतृत्व करने के तुरंत बाद वर्ष 1990 के दशक में जनता दल की राज्य इकाई के विघटन के बाद से गुजरात दो-पक्षीय राज्य रहा है, । भाजपा के बागी शंकरसिंह वाघेला के तीसरे स्थान को बनाने के प्रयास सफल नहीं हुए, हालांकि वे कांग्रेस के समर्थन से थोड़े समय के लिए सीएम भी रहे । जनता दल और वाघेला के विपरीत, आप गुजरात की राजनीति में एक बाहरी पार्टी  है। 2021 सूरत नगर निगम चुनाव में पार्टी की अप्रत्याशित सफलता,जिसमें कांग्रेस एक भी वार्ड जीतने में विफल रही, ने यह धारणा बनाई है कि एक गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेसी पार्टी के लिए जगह गुजरात में मौजूद है और आप इस खाली जगह को भर सकती है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के राज्य में समय बिताने के साथ आप  आक्रामक अभियान चला रही है। यह देखा जाना बाकी है कि क्या पार्टी का शहरी-केंद्रित अभियान दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी सरकार के दावों पर केंद्रित है और हिंदुत्व गैलरी से खेलने से ग्रामीण गुजरात में संगठनात्मक उपस्थिति की कमी की भरपाई हो सकती है।

वर्ष 2017 में, पाटीदार अशांति और कृषि संकट से परेशान ग्रामीण गुजरात ने कांग्रेस का समर्थन किया था जबकि अहमदाबाद , वडोदरा, सूरत और राजकोट सहित शहरी केंद्रों के निकट-स्वीप से भाजपा की संख्या बढ़ी थी। कांग्रेस ने युवा नेताओं, हार्दिक पटेल , जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर, के साथ पार्टी के संदेश को बढ़ावा देने के लिए एक उत्साही अभियान चलाया। पटेल और ठाकोर अब भाजपा के साथ हैं और कांग्रेस ने चुनाव अभियान की रणनीति बदल दी है और ख़ामोशी से खटिया राजनीती कर रही है । 2024 के लोकसभा के आम चुनाव से पहले मोदी की विश्वसनीयता ध्वस्त करने के लिए गुजरात में भाजपा को हराना महत्वपूर्ण होगा।

28 अक्टूबर को सीएम पटेल ने किसानों के लिए 630 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की – उनमें से आठ लाख को लाभान्वित करने के लिए कहा – जिन्होंने 2022 के खरीफ सीजन में अत्यधिक बारिश के कारण नुकसान पहुंचाया।

29 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया। इसने पंचायत और पुलिस विभागों में 13,000 रंगरूटों को नियुक्ति पत्र सौंपे और समर्थन मूल्य पर सोयाबीन, मूंगफली, मूंग और अरहर की खरीद शुरू की।

30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच तीन दिवसीय दौरे के पहले दिन, मोदी ने टाटा-एयरबस निर्माण परियोजना की आधारशिला रखी। उस शाम मोरबी में निलंबन पुल ढह गया, जिसमें 135 लोगों की मौत हो गई।31 अक्टूबर को, मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी साइट पर एकता दिवस कार्यक्रम में भाग लिया, और बनासकांठा जिले और अहमदाबाद के असरवा में परियोजनाओं का उद्घाटन किया।उन्होंने एक नवंबर को पंचमहल जिले के जंबुघोड़ा में 885 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया।मोदी दिन में बाद में मोरबी गए।

उद्घाटन करने से कुछ घंटे पहले, गृह मंत्री हर्ष संघवी ने राज्य में होमगार्ड और ग्राम रक्षक दल कैडर के सैनिकों के लिए मानदेय राशि – 300 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये करने की घोषणा की।

अब प्रचार के लिए लगभग चार हफ्ते का समय है और यही उम्मीद की जा सकती है कि बीजेपी और मोदी हर वह कार्ड खेलेंगे, जिसमें उन्हें वोट मिलने की संभावना दिखती हो।

नरेंद्र मोदी अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो इतने बड़े पैमाने पर चुनाव प्रचार में भाग लेते हैं। 2017 के चुनाव में उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता अहमद पटेल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की साजिश पाकिस्तान की ओर से रची जा रही है। मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के घर रात के खाने के दौरान उनके खिलाफ साजिश रची गई। अब देखना है कि इस बार वह किस-किस तरह के और किस-किस पर आरोप मढ़ते हैं।

मोरबी त्रासदी ने भी बीजेपी के अभियान को कुछ हद तक प्रभावित किया है। सिर्फ पुल गिरने से ही बीजेपी और सरकार को शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ी, प्रधानमंत्री के दौरे से पहले अस्पताल को रंगरोगन करने की तस्वीरें भी वायरल हो गईं और इससे सत्ता पक्ष मुश्किल में रहा। पार्टी को तब भी शर्मिंदगी उठानी पड़ी जब सोशल मीडिया पर वह फोटो वायरल हो गई जिसमें प्रधानमंत्री को कार्ड-बोर्ड से आनन-फानन में बनाए गए क्लास रूम में एक स्कूली बच्चे के बगल में कंप्यूटर पर नजरें गड़ाए दिखाया गया। यह आम आदमी पार्टी के उस वादे की काट के लिए था कि वह राज्य में स्कूलों और स्कूली शिक्षा को बदल कर रख देगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर खास तौर पर सौराष्ट्र के युवाओं में आम आदमी पार्टी ने जिस तरह अपनी पहुंच बनाई है, उससे बीजेपी बैकफुट पर है। बीजेपी ने वैसे तो मान लिया था कि आम आदमी पार्टी के कारण ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा। लेकिन शायद उसे अब समझ में आने लगा है कि केजरीवाल एंड कंपनी तो उसकी जमीन ही ज्यादा हड़पती दिख रही है।

ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी 55 शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में कड़ी टक्कर देने जा रही है जहां उसे युवाओं का समर्थन मिल रहा है। ये मुख्यतः बीजेपी के गढ़ रहे हैं और पिछली बार ऐसे 48 में से 44 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी ने जीत हासिल की थी। राज्य का अंतिम चुनाव परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि आम आदमी पार्टी इन सीटों पर किस हद तक सेंध लगाती है।

हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी एक ऑटोरिक्शा चालक के घर रात के खाने के लिए जाने के बाद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। ऑटोरिक्शा चालक ने बाद में खुलासा किया कि यह एक पूर्व नियोजित यात्रा थी और वह तो नरेंद्र मोदी का फैन है।

आम आदमी पार्टी ने 2017 में भी गुजरात में विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उसने सभी 30 सीटों पर जमानत गंवा दी थी। इस बार, विज्ञापन पर मोटा पैसा खर्च करके और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार से मिल रही मदद की बदौलत वह ज्यादा उत्साह के साथ चुनाव मैदान में जमी हुई है।

बीजेपी को तो भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत अपील की वजह से उसकी नैया पार लग जाएगी और इसे देखते हुए ही मोदी कार्यकर्ताओं को अति आत्मविश्वास और खुशफहमी से बचने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने गांवों में घर-घर जाकर प्रचार करते हुए उन्हें बदनाम करने का काम आम आदमी पार्टी को आउटसोर्स कर दिया है।

कांग्रेस इस बार एक अलग रणनीति पर चल रही है। वह ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में ‘खटिया बैठक’ के अलावा छोटी रैलियों और यात्राओं पर ध्यान दे रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और रघु शर्मा के नेतृत्व में चल रहे प्रचार अभियान की विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के कांग्रेस प्रभारियों द्वारा की जा रही है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पार्टी 125 निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है, हालांकि वह सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इनमें गोधरा से लेकर विसनगर तक वे 16 निर्वाचन क्षेत्र भी हैं जहां पार्टी को कम अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा। पिछली बार कांग्रेस गोधरा में 258 वोटों से हार गई थी।

2017 में कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थीं और तब यकीनन नरेंद्र मोदी की अपील कहीं दमदार थी। यही वजह है कि बीजेपी चुनौती को खारिज नहीं कर सकती। चुनाव मैदान में तीनों पार्टियों के लिए बहुत कुछ दांव पर है। बीजेपी के लिए यह अस्तित्व का चुनाव है जिसे वह हर हाल में जीतना चाहेगी। क्या इस बार के चुनाव परिणाम इस आम धारणा को गलत साबित करने वाले हैं कि गुजरात में मोदी और बीजेपी को मात नहीं दी जा सकती?

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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