राम मंदिर में चढ़ावे के घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी के मामले की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है।

मंदिर ट्रस्ट ने शनिवार, 13 जून, को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की थी।

एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत (आईएएस), आईजी रेंज किरन एस. (आईपीएस) और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन को शामिल किया गया है। टीम को 7 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी किसी भी संभावित अनियमितता को रोकने के लिए सुझाव भी देने होंगे।

इससे पूर्व, राम मंदिर के दानपात्र से धन के कथित गबन के मामले में जांच एजेंसियों ने रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में छापेमारी की। इस दौरान आरोपी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई है। कार्रवाई राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में की गई।

बताया जा रहा है कि कुछ रकम गोबर में दबाकर छिपाई गई थी, जबकि बाकी पैसे एक बक्से में रखे मिले। सूत्रों के अनुसार, लवकुश मंदिर में चढ़ावे की राशि की गणना करने का काम करता था।

लवकुश के पिता बच्चूलाल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े तीन-चार लोग उनके घर पहुंचे और ताला खोलकर नकदी अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि उन्हें इस धन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी क्योंकि वे लंबे समय से गाजियाबाद में रह रहे थे।

बच्चूलाल ने यह भी कहा कि फैजाबाद में बन रहे मकान को लेकर जो चर्चाएं हो रही हैं, उनका उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार, मकान निर्माण के लिए उन्होंने पहले से खरीदी गई जमीन और लगभग 10-12 बीघा कृषि भूमि गिरवी रखी है।

उन्होंने कहा, ‘मेरा बेटा पिछले पांच-छह महीने से राम मंदिर में काम कर रहा था। उसे वहां नौकरी रवि मिश्रा ने दिलवाई थी, जो हमारे समधी हैं। फैजाबाद में बन रहा मकान हमारी मेहनत और जमीन गिरवी रखकर जुटाए गए पैसों से बन रहा है, उसका बेटे से कोई लेना-देना नहीं है।’

ग्रामीणों के मुताबिक, लवकुश पहले कार मिस्त्री का काम करता था। शादी के बाद करीब एक वर्ष पहले उसे मंदिर ट्रस्ट में नौकरी मिली थी। गांव के लोगों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव आने पर वह खुलकर खर्च करता था।

गांव में यह चर्चा भी है कि लवकुश ने कथित तौर पर कुछ नकदी गांव के एक घूर (कूड़े के ढेर) में छिपाकर रखी थी।

ग्रामीणों का कहना है कि लवकुश के बाबा जगदंबा मिश्रा अक्सर लोगों से कहते थे कि उनका नाती मंदिर में काम करता है और काफी पैसा कमा रहा है। इसी वजह से गांव में उसकी आर्थिक स्थिति को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही।

इस पूरे वित्तीय विवाद की आग को भड़काने में राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी (पूर्व एकाउंट्स इनचार्ज) महिपाल सिंह के दावों ने घी का काम किया है। इन दिनों सोशल मीडिया पर उनके बयानों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ट्रस्ट की नींद उड़ा दी है।

महिपाल सिंह ने वीडियो में सनसनीखेज दावा किया है कि राम मंदिर की दान राशि और चढ़ावे में चोरी की यह घटना कोई नई नहीं है, बल्कि यह खेल बहुत लंबे समय से सुनियोजित तरीके से खेला जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि दान काउंटर पर आने वाले नोटों की गड्डियों में से चालाकी से नोट निकालकर हेराफेरी की जाती थी।

उन्होंने व्यवस्था और ट्रस्ट से जुड़े कुछ बेहद रसूखदार व वरिष्ठ लोगों के नामों का भी खुलकर उल्लेख किया है और आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस चोरी के खिलाफ उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत की थी, तो सच दबाने के लिए उन्हें ही उनके पद से जबरन हटा दिया गया था।

राम लला के दरबार में हुई इस कथित वित्तीय धांधली को लेकर अब अयोध्या के स्थानीय संतों का आक्रोश भी फूट पड़ा है। सरयू तट पर स्थित प्रसिद्ध करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने मीडिया से मुखातिब होते हुए राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के गबन से जुड़े पूरे मामले की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा, “राम मंदिर जैसे पावन स्थल में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और चोरी की खबरें आना पूरे संत समाज और देश के लिए बेहद निंदनीय और गहरी चिंता का विषय है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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