Wednesday, August 10, 2022

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जन्मदिन पर विशेष: टैगोर की दृष्टि में राष्ट्रवाद और देशभक्ति

गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व थे। बंगाल के कुछ बेहद सम्पन्न लोगों में उनका परिवार आता था। उनके बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर, देश के प्रथम हिंदुस्तानी, 1864 बैच के आईसीएस थे। अपने माता-पिता की आठ संतानों...

बांग्ला नववर्ष और जातीय अस्मिता के सवाल पर कुछ विचार

हम अपने जीवन में ही पोयला बैशाख से जुड़ी बंगवासियों की अस्मिता के पहलू के नाना आयामों और उनके क्रमिक क्षरण के साक्षी रहे हैं। हर साल बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में हम इस पर एक प्रकार के विलाप के स्वरों...

बांग्ला साहित्य की विद्रोही दलित चेतना का हिंदी दीप

जब बांग्ला साहित्य और समाज की उदार और विद्रोही चेतना को हिंदी इलाके के संकीर्ण राष्ट्रवाद और बंगाल में पहले से मौजूद हिंदू चेतना से पराजित करने का राजनैतिक अभियान और सांस्कृतिक आख्यान अपने चरम पर हो तब प्रोफेसर...

दावत, जहां मेजबान और मेहमान में गुफ्तगू तक नहीं!

दावत चाहे किसी धन कुबेर की हो या किसी निर्धन की, उसमें एक गर्म जोशी होती है, मिलने मिलाने का सिलसिला होता है और मेहमान और मेजबान के बीच संवाद होता है। पर कुछ दावतें ऐसी भी होती हैं...
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शिशुओं का ख़ून चूसती सरकार!  देश में शिशुओं में एनीमिया का मामला 67.1%

‘मोदी सरकार शिशुओं का ख़ून चूस रही है‘ यह पंक्ति अतिशयोक्तिपूर्ण लग सकती है पर मेरे पास इस बात...
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