Tuesday, July 5, 2022

अरुण माहेश्वरी

‘अग्निपथ’ हिंदुओं के सैन्यीकरण का कोई संघी प्रकल्प तो नहीं है ! 

मोदी सरकार ने भारतीय सेना में भर्ती के एक अजीबोग़रीब प्रकल्प को अपनाया है । प्रकल्प को नाम दिया गया है - अग्निपथ । इस प्रकल्प में पहले 17 से 21 साल के कुछ हज़ार नौजवानों को छः महीनों...

दिलचस्प नाटक में तब्दील हो गया है नुपुर-नवीन कांड

बीजेपी के नूपुर-नवीन कांड ने अब सचमुच एक मज़ेदार नाटक का रूप ले लिया है । मोदी-भागवत अपने मूल चरित्र पर पर्दा डाल रहे हैं, और सारे संघी कार्यकर्ता मिल कर उसे और ज़्यादा उघाड़ रहे हैं ! दोहरा...

बांग्ला नववर्ष और जातीय अस्मिता के सवाल पर कुछ विचार

हम अपने जीवन में ही पोयला बैशाख से जुड़ी बंगवासियों की अस्मिता के पहलू के नाना आयामों और उनके क्रमिक क्षरण के साक्षी रहे हैं। हर साल बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में हम इस पर एक प्रकार के विलाप के स्वरों...

सीपीआई(एम) की 23वीं कांग्रेस: संघर्ष की नई वामपंथी रणनीति के एकजुट संकल्प की कांग्रेस 

केरल के कन्नूर शहर में सीपीआई (एम) की 23वीं कांग्रेस (6-10 अप्रैल 2022) पूरी भव्यता के साथ संपन्न हो गई। फिर से सीताराम येचुरी का महासचिव पद पर चुनाव और कुछ पुराने, जमे-जमाये नेताओं की विदाई और पोलित ब्यूरो...

हिंदी का लेखक-प्रकाशक विवाद: साहित्य और जीवन के भ्रम और यथार्थ

सोशल मीडिया पर हिंदी के लेखकों और प्रकाशकों के बीच संबंध के बारे में अभी जो बहस उठी है, वह जितनी दिलचस्प है, उतनी ही विचारोत्तेजक भी है। इसमें एक प्रकार से हिंदी साहित्य और पाठकों के बीच के...

सीपीएम की 23वीं कांग्रेस: अन्तर्विरोधों और द्वंद्वों की सही समझ के आधार पर पूरे मसौदा दस्तावेज का होना चाहिए पुनर्लेखन!

सीपीआई(एम) की 23वीं कांग्रेस केरल के कन्नूर शहर में आगामी 6-10 अप्रैल 2022 को होने जा रही है। इस कांग्रेस में बहस के लिए पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने राजनीतिक प्रस्ताव का एक मसौदा जारी किया है। आगे एक...

यूक्रेन मामले में तटस्थता अब कतई उचित नहीं

फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से लंबी बातचीत में पुतिन ने यह साफ़ संकेत दे दिया है कि वह यूक्रेन पर अपने हमले को जल्द ख़त्म करने वाला नहीं है। मैक्रों के शब्दों में - “अभी और भी भारी तबाही...

यूपी चुनाव: मोदी जी आख़िर इतनी बेतुकी बातें क्यों कर रहे है ?

सब लोग अब यह गौर करने लगे हैं कि यूपी के चुनाव में मोदी के भाषण कुछ अजीबोग़रीब हो रहे हैं। सिवाय कुछ सचेत सांप्रदायिक विभाजनकारी बातों के किसी को उनके भाषणों में कोई तुक नज़र नहीं आ रहा...

‘जीते जी इलाहाबाद’: जहां जमुना के छलिया जल जैसे सत्य से आँखें दो-चार होती हैं!

दो दिन पहले ही ममता कालिया जी की किताब ‘जीते जी इलाहाबाद’ प्राप्त हुई, और पूरी किताब लगभग एक साँस में पढ़ गया । इलाहाबाद का 370, रानी मंडी का मकान। नीचे प्रेस और ऊपर रवीन्द्र कालिया-ममता कालिया का घर;...

सीमित ज्ञान का शिकार – भोला पंडित

सोशल मीडिया के ऐसे राजनीतिक टिप्पणीकार मसलन् पुण्य प्रसून वाजपेयी, विजय त्रिवेदी, राहुल देव तथा टीवी और यूट्यूब की बहसों में आने वाले पत्रकार, जिन्होंने आरएसएस और उसके तंत्र का बाक़ायदा अध्ययन किया है, उनमें अक्सर यह देखा जाता...

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