Tuesday, August 9, 2022

book

बरनवालः गांधीवादी चिंतक की गुमनाम विदाई

वीरेंद्र कुमार बरनवाल के निधन की सूचना वरिष्ठ पत्रकार और बड़े भाई जयशंकर गुप्त जी की पोस्ट से मिली। अचानक मुलाकात की बारह साल पुरानी स्नेहिल स्मृतियां कौंध गईं। 10 नवंबर 1945 को आजमगढ़ में जन्मे बरनवाल जी हीरक...

अथातो चित्त जिज्ञासा- भाग 4: मनोविश्लेषण का अपना नया सामाजिक संदर्भ

अथातो चित्त जिज्ञासा- भाग 4 (जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित aएक विमर्श की प्रस्तावना) (4) मनोविश्लेषण का अपना नया सामाजिक संदर्भ मानव जीवन के समग्र सांस्कृतिक परिदृश्य में अधुनातन यंत्रों के प्रयोग से आए मूलभूत परिवर्तनों का हमें पूरा अंदाज...

जसवंत सिंह कंवल: विदा हो गया पंजाबी लोकाचार का प्रतिबद्ध महान कलमकार!   

पंजाबी साहित्य को मानों ग्रहण लग गया है। कल डॉ. दलीप कौर टिवाणा विदा हुईं, अभी उनका अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ था कि खबर मिली, पंजाबी गल्प की महान शख्सियत जसवंत सिंह कंवल जिस्मानी तौर पर अलविदा कह...

आखिर क्यों कहना पड़ता है -‘आई कुड नॉट बी हिन्दू’ !

आज संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है, बाबा साहब ने अपने लेखन में सामाजिक विषमता के कारक तत्वों की खोज करते हुए पाया था कि हिन्दू धर्म एक चार मंजिला इमारत है,जिसमें सीढ़ियां नहीं है, जो जहां...

खूनी हमलों में 2000-2018 के बीच 65 पत्रकारों ने गंवाई जान, ‘साइलेंसिंग जर्नलिस्ट्स इन इंडिया’ किताब में विस्तृत रिपोर्ट

नई दिल्ली। देश में प्रेस की आज़ादी एक चुनौतीपूर्ण दौर से होकर गुज़र रही है जब पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं और उन्हे अपने काम से रोकने के लिए मुकदमों में फंसाया जाना जारी है। प्रेस की आज़ादी के...

गांधी स्मृति श्रृंखला (भाग-1): “भारत में मैं मुस्लिम परस्त हूं तो पाकिस्तान में हिन्दू परस्त”

(राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म का 150वां साल चल रहा है। इस मौके पर गांधी की शिक्षा, विचार, सिद्धांतों और उनके रहन-सहन के तरीकों को लेकर देश में जिस तरह से विचार-विमर्श और आयोजन होने चाहिए थे। गोष्ठियों, सेमिनारों और कन्वेंशनों का...

अपने समय से मुठभेड़ करती एक किताब

(“मैं कार सेवक था” राजस्थान के चर्चित पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी की नई किताब है। नवारुण प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब में मेघवंशी के शुरुआती सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की दास्तान और उसका अनुभव शामिल है। यह किताब आज के...

मोदी सरकार की असलियत को उघाड़ कर रख देती है सुभाष गाताडे की किताब ‘मोदीनामा : हिंदुत्व का उन्माद’

सुभाष गाताडे की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक 'मोदीनामा : हिंदुत्व का उन्माद' को पढ़ते हुए वर्तमान राजनीति की दिशा और दशा का बेहतरीन जायजा मिलता है। एक आम पाठक को किताब की सरल-प्रवाह युक्त भाषा, सहज तर्क प्रणाली...

वर्तमान सत्ता के मद का निकृष्टतम उदाहरण है प्रोफेसर रोमिला थापर का अपमान

प्रोफ़ेसर रोमिला थापर से जेएनयू प्रशासन ने उनका सीवी, अर्थात् उनके अकादमिक कामों का लेखा-जोखा माँगा है ताकि वह उनको दिये गये प्रोफ़ेसर एमिरटस के पद पर पुनर्विचार कर सके । जाहिर है कि यूनिवर्सिटी की यह माँग उनके...

भारत में एक शानदार बौद्धिक प्रतिरोध की शुरुआत हो चुकी है: अरुंधति रॉय

(लंदन से प्रकाशित दि गार्जियन में छपा मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय का यह साक्षात्कार गैरी यौंग ने लिया है। अंग्रेजी में प्रकाशित इस इंटरव्यू का हिंदी में अनुवाद रविंद्र सिंह पटवाल ने किया है। पेश है पूरा साक्षात्कार- संपादक) गैरी...
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बिहार में सियासत करवट लेने को बेताब

बिहार में बीजेपी-जेडीयू की सरकार का दम उखड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस दमघोंटू वातावरण से निकलने को...
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