Monday, January 24, 2022

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चुनाव सुधार: ज्यों-ज्यों दवा दिया मर्ज बढ़ता ही गया

भारत में चुनाव सुधारों की चर्चा 90 के दशक के प्रारंभ में शुरू हुई थी। उस समय बैलेट पेपर से चुनाव हुआ करते थे ।बूथों पर कब्जा करना मत पेटियों को लेकर भागना और बाहुबलियों ताकतवर लोगों द्वारा वोट...

पांच साल बेमिसाल: ईन्यूज़रूम ने स्वतंत्र मीडिया के तौर पर बनाई खास पहचान

शाहनवाज़ अख़्तर द्वारा बनाई संस्था ईन्यूज़रूम इंडिया ने बिना किसी राजनीतिक समर्थन, कॉर्पोरेट सहयोग और बड़ी ग्रांट्स के अब तक अपने मीडिया संस्थान को चलाया।  ईन्यूज़रूम इंडिया (eNewsroom India) पूर्वी और मध्य भारत के टियर-2 शहरों को कवर करने वाला...

कारपोरेट शक्ति पर लोक शक्ति की विजय का वर्ष

देश के किसानों के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक आंदोलन की सफलता का वर्ष रहा। वर्ष की शुरुआत बॉर्डरों पर किसान आंदोलन पर सरकारों के बेबुनियाद आरोपों और फ़र्ज़ी मुकदमों से हुई। बॉर्डरों पर किसानों को हमले भी झेलने पड़े।...

कॉरपोरेटी हिंदुत्व के फासीवादी फंदे से देश को निकालना ही नये साल का असली संकल्प

2021 के अंतिम तिमाही में कालिनेम, शिखंडी, खड्गसिंह और गोडसे का जिंदा होना क्या महज संयोग है कि सोचा समझा प्रयोग। 2021 की शुरुआत महामारी की क्रूर छाया और लोकतंत्र पर फासीवाद के मरणांतक हमले के साथ हुई थी।वहीं...

कृषि कानूनों के फिर आने का बरकरार है खतरा

19 नवंबर को किसान आंदोलन के दबाव में तीन कृषि कानूनों को एक तरफा प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा करके वापस लेने का ऐलान किया था। तो मैंने पहली टिप्पणी लिखते हुए कहा था कि, सावधानी हटी दुर्घटना घटी। उस टिप्पणी...

किसान आंदोलन ने बदला देश का राजनैतिक एजेंडा: तपन सेन

कोरबा। किसान आंदोलन ने देश का राजनैतिक एजेंडा बदल दिया है। इस आंदोलन ने दिखा दिया है कि कॉर्पोरेट लूट को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए मजदूर-किसान एकता को मजबूत बनाते हुए वर्ग संघर्ष तेज करना होगा।...

किसान आंदोलन: जश्न के बीच से झांकती चुनौतियां

यहां सड़क पर कीले उगीं हैं। कंटीले तारों ने अपने ही देश के नागरिकों को जानवरों की तरह घेर रखा है। आपका स्वागत फौज़ी बूटों की कर्कश ध्वनियों से होता है। यह कश्मीर नहीं किसानों के आंदोलन-स्थल की तस्वीर...

संघर्ष का टेम्पलेट जो किसान आंदोलन ने दिया है

संयुक्त किसान मोर्चा ने 378 दिन के बाद अपने आंदोलन को स्थगित करते हुए कहा कि ‘लड़ाई जीत ली गई है, लेकिन किसानों के हक-खास कर एमएसपी को किसानों के कानूनी अधिकार के रूप में हासिल करने का युद्ध...

जीत गया लोकतंत्र, हार गयी तानाशाही

लोकतंत्र आज एक बार फिर जीत गया। लोकतंत्र की वह डोर जो छूटती जा रही थी जनता ने आज फिर से उसे मजबूती से पकड़ ली। सत्ता की तमाम संस्थाएं जब अपनी जवाबदेहियों से पीछे हट रही थीं और...

प्रदूषण के असली गुनहगारों की जगह किसान ही खलनायक क्यों और कब तक ?

इस देश में वर्तमान समय की राजनैतिक व्यवस्था में किसान और मजदूर तथा आम जनता का एक विशाल वर्ग सबसे दीन-हीन और कमजोर वर्ग है,क्योंकि सत्ता के कर्णधार अपने लाडले पूँजीपतियों के लिए ही अपनी सारी नीतियों को बनाते...
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यूपी में खदेड़ा होबे, वोट मांगने आये भाजपा विधायक, मंत्री, उपमुख्यमंत्री को जनता ने खदेड़ा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। दूसरी ओर कोरोना का प्रकोप भी जोरो पपर है।...
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