Thursday, July 7, 2022

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ग्राउंड रिपोर्ट: युवाओं में अभी जिंदा है अग्निपथ योजना की हताशा की आग

बोकारो। अग्निपथ योजना को लेकर बेरोजगारों में जिस तरह से स्वत: स्फूर्त विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ और जब यह विरोध, आंदोलन में परिणत हुआ, तो एक बारगी लगा कि बेरोजगारों का यह आंदोलन, आंदोलनों के इतिहास में एक अलग कहानी...

ज़किया जाफ़री पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ़्तारी की कड़ी भर्त्सना

"देश में बढ़ता धार्मिक बहुसंख्यकवाद और सर्वभक्षी कारपोरेटी हमला लोकतंत्र और संविधानिक मूल्यों के लिए बड़े खतरे" पर 26 जून को झारखंड जनाधिकार महासभा द्वारा बगईचा, रांची में आयोजित एक सेमिनार में चर्चा हुई जिसमें राज्य के अनेक जन...

हसदेव अरण्य: लाखों पेड़ों की कटाई के खिलाफ उठ खड़े हुए लोग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास और जीवन के बीच संघर्ष की स्थिति बन गई है। एक ओर जहां सत्ता और कॉरपोरेट कोयला उत्खनन के लिये जंगल काटने की फिराक में हैं तो दूसरी ओर आम ग्रामीण संविधान में प्रदत्त शक्तियों...

कॉरपोरेटी मुनाफे के यज्ञ कुंड में आहुति देते मनु के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

2 तथा 3 मई की दरमियानी रात मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के गाँव सिमरिया में जो हुआ वह भयानक था। बाहर से गाड़ियों में लदकर पहुंचे बजरंग दल और राम सेना के गुंडा गिरोह ने पहले घर में...

क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस को हिंदुत्व से लड़ने के लिए तैयार करेंगे ?

आखिरकार प्रशांत किशोर को 2024 के चुनावों में कांग्रेस को उबारने की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। कई चुनावों में उन्होंने अपने हुनर का कमाल दिखाया है और उन लोगों ने राहत की सांस ली होगी जो नरेंद्र मोदी को...

क्या और व्यापक होगा किसान आंदोलन का दायरा?

अपनी ऐतिहासिक विजय के बाद 31 जनवरी को किसान संगठन फिर जुट रहे हैं, अपने अभूतपूर्व और शांतिपूर्ण आंदोलन की समीक्षा के लिये वे 31 जनवरी का दिन, देश भर में “विश्वासघात दिवस” के रूप में मनाएंगे। यह विश्वासघात...

भारतीय गणतंत्र पर छाया संकट का घटाटोप

भारतीय गणतंत्र की स्थापना का 73वां शुरू होने जा रहा है। किसी भी राष्ट्र या गणतंत्र के जीवन में सात दशक की अवधि अगर बहुत ज्यादा नहीं होती है तो बहुत कम भी नहीं होती। इसमें कोई दो राय...

काशी विश्वनाथ धाम कोरिडोर: धर्म क्षेत्र का कारपोरेटीकरण

प्रथमचरण 30 वर्ष पहले उदारीकरण निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियां भारत में लागू की गईं। जहां से भारत के विविध क्षेत्रों का निजीकरण यानी कॉरपोरेटाइजेशन शुरू हुआ। पहली प्राथमिकता थी कि इन नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए अब तक...

चुनाव सुधार: ज्यों-ज्यों दवा दिया मर्ज बढ़ता ही गया

भारत में चुनाव सुधारों की चर्चा 90 के दशक के प्रारंभ में शुरू हुई थी। उस समय बैलेट पेपर से चुनाव हुआ करते थे ।बूथों पर कब्जा करना मत पेटियों को लेकर भागना और बाहुबलियों ताकतवर लोगों द्वारा वोट...

पांच साल बेमिसाल: ईन्यूज़रूम ने स्वतंत्र मीडिया के तौर पर बनाई खास पहचान

शाहनवाज़ अख़्तर द्वारा बनाई संस्था ईन्यूज़रूम इंडिया ने बिना किसी राजनीतिक समर्थन, कॉर्पोरेट सहयोग और बड़ी ग्रांट्स के अब तक अपने मीडिया संस्थान को चलाया।  ईन्यूज़रूम इंडिया (eNewsroom India) पूर्वी और मध्य भारत के टियर-2 शहरों को कवर करने वाला...
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द्रौपदी मुर्मू, आदिवासी समुदाय और हिंदू राष्ट्र का एजेंडा

एक महीने के अंदर भारत एक नए राष्ट्रपति को देखेगा। तब तक इस लेख के प्रकाशन का शायद कोई...
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