Wednesday, August 10, 2022

Solicitor General

देश में असहमति के प्रति बढ़ती असहनशीलता लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा

न सिर्फ देश का सर्वोच्च न्यायालय,अनेक उच्च न्यायालय,अनेक समाचार पत्र,संविधान एवं न्यायिक क्षेत्र के  अनेक विशेषज्ञ, यहां तक कि दुनिया के विभिन्न देशों की मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्ध संस्थाएं यह मानती हैं कि भारत में...

किसान आंदोलन पर आखिर किस बिना पर सॉलिसिटर/अटार्नी जनरल कर रहे थे दावा!

सरकार के साथ किसानों की 8 जनवरी को आठवें दौर की बातचीत फेल हो गई है, क्योंकि सरकार तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस न लेने पर अड़ी है और किसान कानूनों की वापसी से कम पर समझौता नहीं...

पराली संकट: तुषार मेहता के विरोध के बावजूद जस्टिस लोकुर की नियुक्ति

‘खाता न बही जो उच्चतम न्यायालय में सॉलिसिटर जनरल कहें वो सही’, की उक्ति से उच्चतम न्यायालय बाहर निकलता प्रतीत हो रहा है। यह महज संयोग नहीं हो सकता कि पिछले दो-तीन साल के दौरान जब केंद्र सरकार की...

दिल्ली दंगेः तुषार मेहता की अध्यक्षता वाले पैनल पर क्यों अड़े हैं उप राज्यपाल

दिल्ली की केजरीवाल सरकार का मानना है कि क्रिमिनल जस्टिस का मूल सिद्धांत है कि जांच पूरी तरह से अभियोजन से स्वतंत्र होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस दिल्ली दंगों की जांच एजेंसी रही है। ऐसे में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता...

कोरोना संकट में विफल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से शाबाशी!

कोरोना संकट पर उच्चतम न्यायालय में भी लगता है चीन्ह-चीन्ह के सुनवाई चल रही है, ताकि सरकार की कमजोरियों को वैध बनाया जा सके और हिडेन एजेंडो को कनून की आड़ लेकर न्यायिक आदेशों से लागू कराया जा सके।...

1984 नहीं दोहराने देंगे, अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के विरुद्ध क्यों नहीं दर्ज हुई एफआईआरः दिल्ली हाई कोर्ट

देश की राजधानी में पिछले तीन दिनों से जारी हिंसा पर दिल्‍ली हाईकोर्ट ने बेहद तल्‍ख टिप्‍पणी की है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि दिल्‍ली हाईकोर्ट के रहते हुए 1984 के दंगे की घटना को दोहराने...
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शिशुओं का ख़ून चूसती सरकार!  देश में शिशुओं में एनीमिया का मामला 67.1%

‘मोदी सरकार शिशुओं का ख़ून चूस रही है‘ यह पंक्ति अतिशयोक्तिपूर्ण लग सकती है पर मेरे पास इस बात...
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