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1857 का विद्रोह : ‘झंडा सलामी गीत’ और राष्ट्रीयता का विचार

ब्रिटिश शासकों, इतिहासकारों, अध्येताओं, लेखकों, लोकगीतकारों ने 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुए सिपाही विद्रोह… Read More

क्या तीसरी बार भी ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं बिकने दूंगा’ थीम सांग बनेगा?

बॉलीवुड के मशहूर गीतकार, प्रसून जोशी का एक गीत पिछले 10 साल से देश के चुनावों में… Read More

प्रेम धवन, जिनके गाने आज भी लोगों को देश प्रेम के रंग में डुबो देते हैं

प्रेम धवन की शिनाख़्त एक वतनपरस्त गीतकार की रही है। जिन्होंने अपने गीतों से देशवासियों में वतनपरस्ती… Read More

स्मृति दिवस पर विशेष: ‘बेड़ु पाको’ के बहाने पहाड़ी लोक के चितेरे मोहन उप्रेती की याद

”बेड़ु पाको बारामासा.. ओ नरैण काफल पाको चैता.. मेरी छैला.. रूण-भूणा दीन आया.. ओ नरैण मैं पुजै… Read More

जीते जी किसी के सामने न झुकने वाले मज़रूह को मौत के बाद झुकाने की कोशिश

मजरूह सुल्तानपुरी के गृह जनपद सुल्तानपुर जिसके कुशभवनपुर होंने की चर्चा आम है, में एक पार्क इस… Read More

जयंती पर विशेष: खुमार बाराबंकवी, जिनकी शायरी का खुमार आज भी दिल से उतारे नहीं उतरता

खुमार बाराबंकवी का शुमार मुल्क के उन आलातरीन शायरों में होता है, जिनकी शानदार शायरी का खुमार… Read More

जन्मदिन पर विशेष: अमीर ख़ान; राह चलता फकीर जिसका जहान संगीत में ही बनता, खुलता और बंद होता था!

अमीर ख़ान का गाना सुनते हुए आप सबसे पहले क्या राय बनाते हैं उनके बारे में? क्या… Read More

जिसकी धुन में राग-रागिनी ही नहीं हिस्ट्री-ज्योग्राफ़ी भी

राग-रागिनी के नोट्स बनाना और उसे रियाज़ के ज़रिये अपने मौसिक़ी में उतार लेना एक बात है,… Read More