भाजपा लोकतंत्र और संविधान पर हमले बंद करे, दमनकारी कार्रवाइयों का जवाब दे – भाकपा माले

भाकपा-माले ने भाजपा के ‘अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ नारे और कार्यक्रमों को ढोंग तथा सरकार की जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया है। पार्टी के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि भाजपा खुद देशभर में अराजकता का माहौल बना रही है और लोकतंत्र एवं संविधान को कमजोर करने में लगी है। ऐसे में लोकतंत्र बचाने का नारा देना उसके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

कुणाल ने कहा कि 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा सरकार के कार्यकाल में विरोध की आवाजों को दबाने, विपक्षी नेताओं को फर्जी मुकदमों में जेल भेजने, लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाने और पूंजीपतियों को प्राकृतिक एवं सार्वजनिक संसाधनों के दोहन की खुली छूट देने जैसी कार्रवाइयों ने अराजक माहौल  बनाया हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बलात्कार के दोषियों और समाज में नफरत एवं हिंसा फैलाने वाले संगठनों से जुड़े लोगों को संरक्षण और सम्मान देती रही है। ऐसी राजनीति करने वाली पार्टी का लोकतंत्र बचाने का दावा पूरी तरह विरोधाभासी है।

उन्होंने कहा कि आज देशभर में छात्र-नौजवान अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है। चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी इसी व्यापक असंतोष का हिस्सा है। भाजपा इन सवालों का जवाब देने के बजाय लोकतंत्र बचाने के नाम पर ढोंग कर रही है।

कुणाल ने कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार प्रदर्शन करने के नागरिक अधिकार पर पाबंदियां लगाती है, सवाल पूछने वालों को जेल भेजती है और असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश करती है, वहीं दूसरी तरफ लोकतंत्र बचाने का दिखावा करती है। भाजपा ने सत्ता संभालने के बाद से ही लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों पर हमले किए हैं। दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक और कथित वोट चोरी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिसिया कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

भाकपा-माले राज्य सचिव ने कहा कि लोकतंत्र केवल नारों और आयोजनों से नहीं बचता। लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिकों के विरोध करने, सवाल पूछने और सरकार की नीतियों की आलोचना करने के अधिकार का सम्मान करना जरूरी है। भाजपा को लोकतंत्र बचाने की बात करने से पहले अपने शासन में हुई दमनकारी कार्रवाइयों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों का जवाब देना चाहिए।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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