झारखंड के युवाओं ने 5 अगस्त को विधान सभा घेरने का किया ऐलान, सरकार से आर-पार की लड़ाई का आह्वान

रांची। झारखंड जनाधिकार महासभा के युवा कार्यकर्ताओं ने आज रांची प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 5 अगस्त 2025 को विधान सभा घेरने की घोषणा की। उन्होंने अपनी पांच प्रमुख मांगों को सामने रखते हुए कहा कि झारखंड के युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक रोज़गार से वंचित हैं, जिसके कारण उन्हें अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। यह झारखंड के युवाओं के साथ हो रहा “घोर सामाजिक अन्याय” है।

सरकार पर गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार से सवाल किया, “स्थानीय नीति और नियोजन नीति पर अब तक चुप्पी क्यों?” उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती रघुवर सरकार की जनविरोधी स्थानीय नीति अभी भी लागू है और छह साल की हेमंत सरकार में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। नियोजन नीति की अस्पष्टता ने भर्ती प्रक्रियाओं को जटिल और भेदभावपूर्ण बना दिया है।

उदाहरण के तौर पर, पलामू, लातेहार और खूंटी में चौकीदार भर्ती में अनुसूचित जाति के लिए एक भी सीट आरक्षित नहीं की गई, जो संवैधानिक आरक्षण नीति की अनदेखी है। पलामू में 2017 से कार्यरत 251 चतुर्थ वर्गीय कर्मियों का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया और उन्हें स्थाई नियुक्ति नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी विज्ञापन संख्या 1/2025 को स्थानीय नियमावली का हवाला देकर प्रभावहीन कर दिया गया, जिससे 35,000 से अधिक अभ्यर्थियों के साथ धोखा हुआ।

परीक्षाओं में अनियमितता और विश्वास का संकट

महासभा ने बताया कि JSSC-CGL की जनवरी और सितंबर 2024 की परीक्षाएं पेपर लीक के कारण रद्द हो गईं, लेकिन हाई कोर्ट में CBI जांच की मांग के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उत्पाद सिपाही भर्ती में नियमावली बदलने से प्रक्रिया ठप हो गई, जिसमें 12 अभ्यर्थियों की असमय मौत हो गई। इसी तरह, झारखंड सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के 4919 पदों का विज्ञापन वापस ले लिया गया, जिससे हजारों उम्मीदवारों की मेहनत बेकार चली गई।

बेरोजगारी और पलायन की भयावह स्थिति

झारखंड में बेरोजगारी दर 17% को पार कर चुकी है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना अधिक है। हर साल लाखों युवा रोज़गार की तलाश में दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, और अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रवासी श्रमिक सेल के अनुसार, 10 लाख से अधिक झारखंडी प्रवासी श्रमिक हैं, जो शोषण, भेदभाव और कम वेतन जैसे सामाजिक अन्यायों का सामना कर रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था की बदहाली

राज्य में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। UDISE+ के अनुसार, 7,900 से अधिक प्राथमिक सरकारी स्कूलों में केवल एक शिक्षक है, जहाँ 3.8 लाख बच्चे पढ़ते हैं। 17,850 शिक्षक पद और 1.58 लाख से अधिक सरकारी पद खाली हैं। रांची विश्वविद्यालय सहित अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में 2008 के बाद कोई नियमित फैकल्टी नियुक्ति नहीं हुई। 4,000 से अधिक शिक्षक और कर्मचारी पद खाली हैं, विशेषकर SC/ST/OBC वर्गों के लिए।

निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं की उपेक्षा

महासभा ने बताया कि निजी कंपनियों में केवल 21% रोज़गार झारखंडियों को मिल रहा है, जबकि सरकार ने 40,000 रुपये से कम वेतन वाली नौकरियों में 75% स्थानीय आरक्षण अनिवार्य किया है। इस नियम का पालन नहीं हो रहा, जिससे सामाजिक प्रतिनिधित्व और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

प्रमुख मांगें

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजय एक्का, अलका आईंद, अपूर्वा, दीपक रंजीत, मनोज भुइयां और रिया तूलिका पिंगुआ ने महासभा की सात प्रमुख मांगें रखीं:

  1. रघुवर सरकार की स्थानीयता नीति रद्द कर मूल गांव आधारित नीति बनाई जाए।
  2. स्थायी और विवादमुक्त नियोजन नीति लागू हो।
  3. सभी रिक्त पदों पर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले।
  4. अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को बढ़ा हुआ आरक्षण मिले।
  5. भूमिहीन दलितों के लिए जाति प्रमाण पत्र और जमीन देने की प्रक्रिया सरल हो।
  6. पलायन रोकने के लिए कौशल विकास और मज़दूर अधिकारों की नीति बने।
  7. शोध और उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।

5 अगस्त को विशाल धरना

महासभा ने 5 अगस्त 2025 को विधान सभा के पीछे विशाल धरने का आह्वान किया है। छह जिलों के छात्र-युवा प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह धरना केवल विरोध नहीं, बल्कि सरकार को चेतावनी है। यदि नियोजन नीति, स्थानीय आरक्षण, शिक्षा सुधार और अन्य मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक होगा। यह झारखंड की पहचान, सम्मान और अधिकार की लड़ाई है।

(झारखंड से विशद कुमार की रिपोर्ट)

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