Sunday, January 29, 2023

चित्रकूट में आदिवासी नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Follow us:

ज़रूर पढ़े

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चित्रकूट जिला प्रशासन से नाबालिग आदिवासी लड़कियों के यौन शोषण मामले में 28 जुलाई तक रिपोर्ट तलब की है। चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस एसडी सिंह की खंडपीठ ने उच्चतम न्यायालय के वकील डॉ. अभिषेक अत्रे के ईमेल का संज्ञान लेकर सुनवाई की और उक्त आदेश पारित किया। ईमेल में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और बाल मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप है। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ‌चित्रकूट के डीएम और विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को जांच कर अलग-अलग रिपोर्ट 28 जुलाई तक देने के लिए कहा है।

वकील डॉ. अभिषेक अत्रे ने ईमेल से सूचित किया था कि ‌‌चित्रकूट में नाबालिग लड़कियों से अनैतिक कार्य कराया जा रहा है। आज तक ने अपनी स्पेशल रिपोर्ट ‘नरकलोक’ में दिखाया था कि कैसे चित्रकूट में नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण हो रहा है और उनसे बाल मजदूरी कराई जा रही है।

आज तक ने ऑपरेशन ‘नरकलोक’ के जरिए दिखाया था कि कैसे बुंदेलखंड के चित्रकूट में चंद रुपयों के लिए खनन के धंधे में लगे कुछ सफेदपोश मासूम बच्चियों का शोषण कर रहे थे। गरीबी के मारे इन अभागे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर सौ-डेढ़ सौ रुपये की मजदूरी देने के बदले कुछ दरिंदे चित्रकूट की इन मासूम बच्चियों का शोषण कर रहे थे।आज तक की पड़ताल में दर्द की ऐसी दास्तानें सामने आईं कि किसी की भी रूह कांप जाए।

ऑपरेशन नरकलोक में दिखाया गया था कि कैसे दिन भर हाड़ तोड़ मेहनत करने वाली बेटियों को शाम को अपना मेहनताना हासिल करने के लिए रेप तक का शिकार होना पड़ता था। इस खुलासे के बाद प्रशासन की नींद उड़ गई। जिस प्रशासन को कभी दिन के उजाले में इन बेटियों का दर्द नहीं दिखा, वो प्रशासन आधी रात को ही उनके गांव पहुंच गया। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि पुलिस प्रशासन आधी रात ही गांव में क्यों पहुंच गया और गांव की बेटियों से पूछताछ में क्यों जुट गए। इस खुलासे पर चित्रकूट प्रशासन पूरी तरह लीपापोती में जुट गया। चित्रकूट के जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने कहा था कि लड़कियों और महिलाओं ने ऐसी किसी बात से इनकार किया है।

चित्रकूट की पहाड़ियों पर करीब 50 क्रशर चलते हैं। भुखमरी और बेरोजगारी की मार झेल रहे यहां के कोल समाज के लिए यही रोजी रोटी का सहारा है। इनकी गरीबी का फायदा उठाकर बिचौलिये और ठेकेदार बच्चियों का शोषण करते हैं। लोगों की क्या मजाल जो इनके खिलाफ आवाज भी उठा सके। हैवानियत के इस घिनौने खेल पर आतंक का साया है जिसकी आड़ में न जाने कितनी मां बेटियों की अस्मत तार-तार हो रही है। इस इलाके में रहने वाले ज्यादातर लोग कोल आदिवासी हैं, जो दलित वर्ग की श्रेणी में आते हैं। यहां के जल और जंगल पर जैसे उनका कोई अधिकार ही नहीं है।

(इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of

guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

कॉलिजियम मामले में जस्टिस नरीमन ने कहा-अदालत के फैसले को मानना कानून मंत्री का कर्तव्य

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू पर तीखा हमला किया...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x