Tuesday, October 4, 2022

एमटेक कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये का घोटाला किया

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कम्पनियों ने बैंकों से भारी भरकम कर्जा कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में लिया जबकि मोदी राज में फंडों को डायवर्ट करके पैसा हजम कर लिया और खुलेआम घूम रहे हैं। कर्जा लो घी पियो और दिवालिया घोषित होकर निकल लो के दर्शन पर आर्थिक उदारीकरण का दौर चल रहा है। ताजा मामला एमटेक कम्पनी का है जिसने 25 हजार करोड़ का कर्ज लिया और पूरा कर्जा डूबा दिया। यह सब वर्ष  2016 में बने  इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड जैसे  नये  कानून से सम्भव हुआ है, जिसके तहत जितनी भी कॉर्पोरेट कंपनी हैं, उनको एक तरीके से छूट दी गई या उनको एक लीगल रूट दिया गया कि अगर आप अपनी कंपनी नहीं चला पा रहे हैं और डिफॉल्ट करे जा रहे हैं, तो आप एनसीएलटी में जा सकते हैं और लिक्विडेशन में जाने के बाद एक पूरा सिस्टम बना दिया गया है।

गौरतलब है कि इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया ने कुछ समय पहले बताया था कि 4946 कंपनियां पिछले 5 साल में दिवालिया हुई हैं, इसमें 457 कंपनियों के केस सॉल्व किए गए हैं और इन 457 कंपनियों ने बैंकों से 8 लाख 30 हजार करोड़ कर्ज लिया था, इसमें 6 लाख करोड़ रुपये बैंकों के डूब गए।

कांग्रेस नेता संजय निरूपम और पवन खेड़ा ने रविवार को एमटेक कंपनी पर करोड़ों रुपये के घोटाले करने का एक बड़ा आरोप लगाया। प्रेस वार्ता में संजय निरूपम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने हमेशा दावा किया है कि भ्रष्टाचार को किसी भी हाल में वो बर्दाश्त नहीं करेंगे, लेकिन भ्रष्टाचार हो रहा है।

इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भ्रष्टाचार को लेकर सरकार को घेरा, तो वहीं घोटाले का खुलासा करते हुए कहा, एमटेक ग्रुप ऑफ कंपनी ने हिंदुस्तान के सरकारी बैंकों से लगभग 25 हजार करोड़ का कर्ज लिया और पूरा कर्जा डुबा दिया और आखिर में डिफॉल्टर घोषित करके बाद में वो इनसॉल्वेंसी केस में  शामिल हो जाते हैं।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, एमटेक एक ऑटो पार्ट बनाने वाली कंपनी है। दिल्ली, चंडीगढ़, नॉर्थ की कंपनी है, जिसका एक बड़ा अच्छा ग्लोबल प्रेजेंस भी रहा है। इस कंपनी का एक बड़ा फेमस ब्रांड है इसी ग्रुप का, जिसको आप सब लोग जानते हैं, वो है बरिस्ता कॉफी। वहीं इस घोटाले में एनसीएलटी, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल और जो कर्ज देने वाली कंपनियां शामिल हैं।

संजय निरूपम ने कहा, 2016 में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड़ एक ऐसा नया कानून बनता है, जिसके तहत जितनी भी कॉर्पोरेट कंपनी हैं, उनको एक तरीके से छूट दी गई या उनको एक लीगल रूट दिया गया कि अगर आप अपनी कंपनी नहीं चला पा रहे हैं और डिफॉल्ट करे जा रहे हैं, तो आप एनसीएलटी में जा सकते हैं और लिक्विडेशन में जाने के बाद एक पूरा सिस्टम बनाया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा, हमारा सवाल यह है कि इन प्रमोटर को आखिर क्यों बचाया जा रहा है? सरकार का इनसे क्या लेना-देना है? अगर फाइनेंस मिनिस्टर कहती हैं कि लोन हमारे जमाने में नहीं यूपीए के जमाने में दिया गया था तो लोन डुबोने का काम जो चल रहा है, वो एनडीए के जमाने में चल रहा है।

संजय निरूपम के मुताबिक, हाल ही में आरबीआई ने डर्टी डजन की लिस्ट जारी की, इसमें 12 कंपनियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि इन कंपनियों पर बैंकों के 2.5 लाख करोड़ रुपये डूब गए, कांग्रेस ने मांग की है यदि बड़ी कंपनी कर्जा ले रही हैं और वह दिवालिया घोषित कर रही हैं तो इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। इन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

दरअसल कांग्रेस ने रविवार को सरकार पर इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया के जरिए दिवालिया घोषित करने वाली कंपनियों के प्रमोटरों को पनाह देने का आरोप लगाया। “एमटेक कंपनियों के समूह ने भारतीय बैंकों से ₹21,000 करोड़ का ऋण लिया। और फिर इसे ₹4,100 करोड़ में बिक्री के लिए रखा गया। बैंकों का पैसा कहां गया? इस तरह हमारे बैंक दिवालिया हो रहे हैं, जो हमारा पैसा है।

कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा, ऐसी खबरें आई हैं कि एमटेक ने तरजीही लेन-देन किया, लेनदारों को धोखा दिया। लेकिन सरकार प्रमोटरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

वीडियोकॉन के आलोक इंडस्ट्रीज का उदाहरण देते हुए निरुपम ने कहा कि सरकार को इन चतुर कारोबारियों से पूछना चाहिए कि उनका कारोबार कैसे चला गया, जबकि उन्होंने अपनी कंपनियों को नए सिरे से शुरू किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि दरअसल, इन कंपनियों ने पैसा डायवर्ट किया है और अब बेची गई कंपनियों के साथ प्रमोटर बेखौफ घूम रहे हैं।”

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि कंपनियों के दिवालियेपन के मामलों को सुलझाने के नाम पर संस्थागत भ्रष्टाचार किया जा रहा है। संजय निरुपम ने कहा कि निर्मला सीतारमण जी हमेशा कहती हैं कि इन कंपनियों ने यूपीए के समय में कर्ज लिया था। सच है, लेकिन कर्ज लेना कोई अपराध नहीं है। उन फंडों को डायवर्ट करना मोदी सरकार के तहत हो रहा है।कांग्रेस नेता ने कहा कि इन दिवाला मामलों पर सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिये।


(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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