Tuesday, January 31, 2023

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में बाढ़ और सुखाड़ की मार एक साथ

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पटना। बिहार देश धान उत्पादक प्रमुख राज्यों में शामिल है, जहां की करीब 76 फीसदी आबादी कृषि कार्यों में लगी है। धान उत्पादन के लिए देश के शीर्ष राज्यों में से एक बिहार की कुल 79.46 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से लगभग 32 लाख हेक्टेयर (40 प्रतिशत से अधिक) में चावल की खेती होती है। राज्य में सालाना लगभग 80 लाख टन धान का उत्पादन होता है। बिहार के कई हिस्सों में धान की रोपाई शुरू हुई है। लेकिन गर्मी और उमस की वजह से खेत फट रहे हैं और फसल सूख रही है। इस वजह से कई किसान रोपनी शुरू भी नहीं किए हैं। 

“गांव में जो ऊपरी जमीन है वहां पर रोपाई 50% नहीं हुई है। लेकिन सारी निचली जमीन पर रोपाई हो गई है। मेरा पंद्रह कट्ठा जमीन निचले स्तर पर है। भीषण उमस और गर्मी के कारण फसल खेत में ही सूख रही है। रोपनी देर से होने पर फसल अच्छी भी नहीं होगी और कम भी होगी।

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पिछली बार यूरिया की कमी ने जान मारा था और इस बार सूर्य देवता..” कहते कहते बिहार के भागलपुर जिले के भ्रमरपुर गांव के सझधर झा (54 वर्षीय) खामोश हो जाते हैं। 

“पिछले 2 साल से अच्छी बारिश हो रही थी इसलिए अधिकांश किसानों ने रोहणी नक्षत्र में ही धान के जरई खेतों में लगा दिए थे। लेकिन पूरे जिले में अब तक न के बराबर बारिश हुई है। नहरें तक सूख गई हैं। टिड्डे हम किसानों के जरई को अपना निवाला बना रहे हैं। आद्रा नक्षत्र खत्म हो गयी, लेकिन हमारे गांव में 1% भूमि पर भी अब तक धान की रोपनी नहीं हो पाई है।” शिवहर जिला के बभन टोली के राहुल तिवारी (37 वर्षीय) बताते हैं। 

बारिश धान के खेत में फटी दरारें, सूख रही फसल

शिवहर जिला के बभन टोली के ही शुभ्रांशु पाण्डेय (47 वर्षीय) लगभग 10 बीघा जमीन पर धान की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि, “धान की रोपनी की समस्या तो बनी ही हुई हैं। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के कारण जलस्तर काफी नीचे चला गया है। शिवहर के कुछ गांवों में इतनी स्थिति खराब है कि ट्यूबेल और चापाकलों से पानी निकलना भी बंद हो गया है। किसानों को एग्रीकल्चर फीडर से बिजली भी पर्याप्त नहीं मिल रही है।”

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बक्सर के गिरिधर बराव गांव के 50 वर्षीय बिन्दो तांती बताते हैं कि, “हम पहले ही 17 कट्ठा में धान रोप दिए थे लेकिन पौधा खेतों में पानी के बगैर सूख रहा है। खेतों में पानी के अभाव में दरारें पड़ गई हैं। साथ ही रोपनी के लिए तैयार खेतों में भी दरारें आ गई हैं। खेतों में बिचड़ा तैयार है। लेकिन समय पर धान रोपाई नहीं होने के कारण काफी लेट हो जाएगा। नहरों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।”

कभी बाढ़ तो कभी अत्यधिक तापमान

“कुछ दिनों पहले बाढ़ की वजह से जिले की बहुत सारी  फसल बह गयीं और जो बची हुई हैं तो अब अत्यधिक तापमान के कारण उन पर संकट मंडरा रहा है। जलवायु परिवर्तन का भारी असर धान की खेती पर दिखने लगा है। तापमान बढ़ने से चावल की घटती उत्पादकता चिंता का सबब बन गया है।” अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र के पंकज शाह बताते हैं।

विशेषज्ञों की राय

कृषि विज्ञान केन्द्र राघोपुर के कृषि वैज्ञानिक मनोज कुमार बताते हैं कि, “यदि 1 सप्ताह तक बारिश नहीं होती है तो दक्षिणी बिहार की पूरी कृषि प्रणाली को भारी नुकसान होगा। हालांकि अब भी उम्मीद है कि आने वाले समय में अच्छी बारिश होगी तो किसान अपने खेतों की रोपनी कर पाएंगे।”

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कृषि वैज्ञानिक अनिल झा बताते हैं कि, “हवा में कमी के कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून की नमी को हवा सोख ले रही साथ ही पूर्वा एवं पंछुआ हवा दोनों आपस में मिल कर टर्फ बनाता है। जो अभी नहीं बन रहा है। जब ये टर्फ बनेगा, तब जाकर आसपास के क्षेत्र में बारिश होगी।”

नहरों से भी नहीं पूरी हो रही किसानों की ज़रूरत

कृषि विभाग पटना में काम कर रहे अरविंद झा बताते हैं कि, “नहर से भी बिहार के किसानों की जरूरत खत्म नहीं हो पाएगी। राज्य के केवल अररिया, किशनगंज और सुपौल में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। वहीं दक्षिण बिहार में बहुत कम बारिश हुई है। राज्य की चारों बड़ी नहर सोन, उत्तर कोयल, कोशी, गंडक नहरों में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है इसलिए नहर प्रणालियों में पर्याप्त पानी नहीं है।” कृषि विभाग के सचिव एन सरवन ने मीडिया को बताया कि राज्य में अब तक 15 से 20 प्रतिशत रोपनी हुई है।

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दक्षिण बिहार में बहुत कम बारिश

एक तरफ उत्तरी बिहार के कई जिले इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं दक्षिण बिहार के कई जिलों में सूखे के हालात बने हुए हैं। दक्षिण बिहार के 20 जिलों में 40 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो राज्य भर में एक जून से नौ जुलाई के बीच 263 मिमी बारिश होनी चाहिए थी लेकिन मात्र 191.7 मिमी बारिश हुई है। स्थिति जस की तस बनी रही तो इन जिलों में सूखा संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

(पटना से राहुल की रिपोर्ट।)

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