Monday, October 3, 2022

पाकिस्तान में 11 विपक्षी दलों ने साझा मंच बनाकर पीएम इमरान के खिलाफ खोला मोर्चा

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पाकिस्तान के 11 मुख्य राजनीतिक दलों ने मिलकर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) के तहत पिछले तीन दिनों के भीतर दो बड़ी विरोध रैलियां आयोजित की। पहली विरोध रैली शुक्रवार 16 अक्तूबर को विपक्षी दलों ने पूर्वी पंजाब प्रांत के गुजरांवाला (Gujranwala) शहर में आयोजित की थी जहां पर नवाज शरीफ की पार्टी ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन)’ का व्यापक प्रभाव है।

वहीं दूसरी विरोध रैली कल 19 अक्तूबर रविवार को आयोजित की गई जिसमें ग्यारह विपक्षी पार्टियों के दस हजार से अधिक समर्थक कराची में इकट्ठा हुए। इस दौरान विपक्षी पार्टियों ने इमरान ख़ान सरकार पर पाकिस्तानी सेना की मदद से 2 साल पहले सत्ता हासिल करने का भी आरोप लगाकर उन्हें सत्ता से बाहर करने की बात कही गई।  

लंदन से वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए रैली को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आर्मी चीफ जनरल क़मर जावेद बाजवा पर 2018 के चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया। 

बता दें कि रविवार को हुई विरोध रैली में मरियम नवाज ने भी बिलावल भुट्टो जरदारी के साथ मंच साझा किया था। इस रैली में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के बिलावल ज़रदारी ने कहा था कि हमारे किसान अपने घरों में भूखे हैं, हमारे युवा हताश हैं।

वहीं फकीर बलोच ने देश की डूबती अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा- “ मुद्रास्फीति ने गरीब नागरिकों की रीढ़ तोड़ दी है। बहुत से नागरिक तो अपने बच्चों का पेट भरने के लिए भीख मांगने को विवश हैं। अब समय गया है जब इस सरकार को सत्ता से बाहर किया जाना चाहिए।” 

बता दें कि पिछले महीने ही 11 बड़े राजनीतिक दलों ने सरकार के खिलाफ़ राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का गठन किया था। जिसमें पाकिस्ताम मुस्लिम लीग नवाज (PML-N), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP), जमायत उलेमा इस्लाम फजल फैक्शन (JFI-F) प्रमुख हैं।

सरकार विरोधी रैली निकालने पर विपक्षी नेता गिरफ़्तार

आज सोमवार की सुबह पाकिस्तान पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) की शिकायत पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) नेता व मरियम नवाज शरीफ के पति मुहम्मद सफदर को गिरफ़्तार कर लिया। उनके ऊपर पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की समाधि पर राजनीतिक नारे लगाने के आरोप हैं, जो कि गैरकानूनी कृत्य माना जाता है। 

मरियम शरीफ ने इस बाबत ट्वीट किया है कि पुलिस ने होटल का कमरे का दरवाजा तोड़कर उनके पति को गिरफ़्तार किया है।

बता दें कि इमरान खान सरकार के शासनकाल में पाकिस्तान में मीडिया असहमित, आलोचकों और विरोधियों के खिलाफ़ कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। लेकिन उनके खिलाफ़ विरोध का सबसे प्रमुख हथियार बना पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था। जो कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के काफी पहले से ही डूब रही है। 

चूँकि पाकिस्तान में साल 2023 में आम चुनाव होना है। अतः तमाम राजनीतिक विश्लेषक 11 विपक्षी दलों की इस देशव्यापी विरोध अभियान को दूसरी पीढ़ी की लांचिंग के तौर पर देख रहे हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) को इस आंदोलन में नवाज शरीफ़ की बेटी मरियम नवाज़ शरीफ़ लीड कर रही हैं। वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को दिवंगत बेनज़ीर भुट्टे के बेटे बिलावल भुट्टो ज़रदारी नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। इस तरह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) दूसरी पीढ़ी के नेताओं को स्थापित करने वाले अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था विरोध का बड़ा कारण

कोविड-19 वैश्विक महामारी के पहले, पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर 2020 के लिए 3.3% और 2021 के लिए 2.4% अनुमानित थी, जो एक दशक में सबसे कम थी। अब विश्व बैंक द्वारा 2020 के लिए पाकिस्तान की वास्तविक विकास दर नकारात्मक रहेगी। यह -1.3 प्रतिशत और -2.2 प्रतिशत के बीच अनुमानित है।

2017 में पाकिस्तान की कुल जीडीपी लगभग 305 बिलियन डॉलर थी और इसके 2020 में 340 बिलियन डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद थी। साल 2018 में पाकिस्तान का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 1,565 डॉलर था। वहीं पाकिस्तान का ऋण से जीडीपी का अनुपात 71.69% था। 2018 में इसका रक्षा खर्च अपने बजट का 18.5% था, जो कि अपने प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी भारत के 8.74% के रक्षा बजट की तुलना में काफी अधिक है।

दोहरे अंक की महंगाई दर – लगभग 13% और लगभग 9% के बजट घाटे के साथ संघर्ष करते हुए, पाकिस्तान को हालात संभालने के लिए दोहरे अंकों में विकास करने की आवश्यकता है। पाकिस्तान का कर से जीडीपी का अनुपात (1%) बेहद कम रहा है। इसका अर्थ है कि मूल रूप से ये गरीब लोग ही हैं जो अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से कर का बोझ उठाते हैं और इस प्रकार गरीबी के चक्र में फंसते जाते हैं।

जबकि क़र्ज़ से जीडीपी का अनुपात 85% है और नकारात्मक जीडीपी वृद्धि और पिछले वर्ष (8.9%) की तुलना में अधिक बजट घाटे के साथ इसके 90% तक बढ़ने की उम्मीद है। पाकिस्तान का कुल विदेशी क़र्ज़ 111 बिलियन डॉलर है। जब तक पुनर्निर्धारित नहीं किया जाता है, 2020 के लिए इसका क़र्ज़ दायित्व 29 बिलियन डॉलर से अधिक है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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