डोनाल्ड ट्रम्प की यारी देश को पड़ रही है भारी!

मोदीजी के कार्यकाल में संयुक्त राज्य अमेरिका की यारी जग जाहिर है, खासकर डोनाल्ड ट्रम्प तो उनकी दांत काटी रोटी रहे हैं वरना भारत जैसे 140 करोड़ आबादी वाले विकासशील देश का प्रधानमंत्री अपने देश में विकट कोरोना काल की स्थिति में ‘नमस्ते ट्रम्प’ जैसे आयोजन का रिस्क क्यों लेता। ना ही अब की बार ट्रम्प सरकार हेतु राष्ट्रीय नीति को खतरे में डालते। इससे पूर्व, प्रवासी भारतीयों के साथ हज़ारों लोगों को ले जाकर हाऊडी मोदी भी ट्रम्प वापसी के लिए ही था।

हालांकि अथक प्रयासों के बाद ट्रम्प को वहां की अवाम ने सत्ता से उतार फेंका। उन्होंने हारने के बाद अपने पिट्ठुओं से जो अलोकतांत्रिक काम कराया वैसा किसी लोकतांत्रिक देश में कभी नहीं हुआ। इधर मोदीजी ने आनन-फानन में विजयी राष्ट्रपति जो वाईडेन से नज़दीकियां बढ़ाईं जो जिगरी दोस्त डोनाल्ड को अखर गया।

आगामी चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की जब पुनर्वापसी हुई तो मोदीजी उनके लिए अछूत हो गए उनकी जितनी उपेक्षा हो रही है उसके बावजूद इतने बड़े देश का प्रधानमंत्री आखिरकार अमेरिका को आंख दिखाने से क्यों कतरा रहा है? इसके पीछे कहा जा रहा है पुराना याराना है जिसने मोदी जी की तमाम गोपनीय गतिविधियों और देश विरोधी कार्यों की फाइल बना रखी है। उसे खोलने की धमकी देकर मोदी जी से वह गुलामों की तरह मनमाने काम करा रहा है।

इस बीच देश की दिनों-दिन अवमानना विदेश में हो रही है और प्रतिपक्ष व आम नागरिक इस चुप्पी पर आक्रोशित है। लेकिन मोदीजी क्या कर सकते हैं? एक डॉन के हाथ में उनकी जान है। यह अमेरिकी व्यापार नीति को बढ़ावा देने में कारगर नज़र आ रही है। भारत-पाक युद्ध यानि आपरेशन सिंदूर के समय भारतीय सेनाओं की सफलता के बाद डोनाल्ड ट्रम्प की मध्यस्थता से सीज़फायर की घोषणा ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किस तरह मोदीजी पर हावी हैं।

उधर भारत से लगे पाकिस्तान और चीन के साथ ट्रम्प के मधुर रिश्ते भी भारत के लिए खतरे से खाली नहीं हैं। चीन द्वारा आपरेशन सिंदूर के वक्त जिस तरह पाकिस्तान को जानकारियां दी गईं उससे सेना प्रमुख भी आक्रोशित हैं। पूर्वी एशियाई देशों में अमेरिका की दखलंदाजी किसी नए समीकरण की तैयारी है। जिसमें भारत की नाज़ुक स्थिति देखकर चीन और अमेरिका मिलकर इसके बाज़ार और व्यापार को तो मटियामेट करेंगे ही साथ ही साथ यहां के खनिज, प्राकृतिक और मानव संसाधन का बेजा इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह सब एक अदूरदर्शी पीएम की बदौलत होने जा रहा है। जिसने अपने मित्र अडानी अंबानी के लिए जिस तरह विदेश यात्राएं की, विदेश नीति की परवाह किए बिना, सीमा तोड़ यारी की। आज वही पूंजीवादी देश अमेरिका चीन के साथ मिलकर भारत को नेस्तनाबूद करने पर उतारू है।

याद आती हैं इंदिरा गांधी जी की जिन्होंने सोवियत रूस के साथ जो 25वर्षीय मैत्री संधि की थी उसकी बदौलत देश पर कभी मुसीबत नहीं आई। आज भी रुस खुलकर भारत को समझाइश दे रहा है उसके बावजूद भी आंखें नहीं खुल रही हैं। संतुलित विदेश नीति का पाठ पंडित जवाहरलाल नेहरू जी से सीखने की ज़रूरत है। जिनसे आजकल नफ़रत की जाती है।

बहरहाल, देश को डोनाल्ड की यारी भारी पड़ने वाली है। कोई बड़ा देश भारत के साथ नहीं है। जब तक मोदी हैं देश को यह ग्रहण लगा रहेगा। क्योंकि वे साफ़ तौर पर इनके जाल में फंसे हुए बने हैं वे जब तक सत्तारूढ़ हैं। देश मझधार में ही रहेगा। लूट मार अब अमेरिका और चीन करता रहेगा। जिसे वर्तमान में रोक पाना असंभव है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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