किसान सभा ने मध्यप्रदेश के पशु व्यापारी की राजस्थान के भीलवाड़ा में लिंचिंग की निंदा की  

अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध मध्यप्रदेश किसान सभा  ने आसिफ बाबू मुल्तानी उर्फ शेरू सुसाड़िया की अमानवीय और बर्बर लिंचिंग की कड़ी निंदा की है। उनकी मृत्यु 20 सितम्बर 2025 को सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर में हुई। उन्हें 16 सितम्बर की सुबह भीलवाड़ा के पास लांबिया रैला पशु हाट से खरीदे गए मवेशियों को मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थित अपने गाँव ले जाते समय गो-रक्षा के नाम पर गुंडों ने बेरहमी से पीटा। अभी तक  5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और एफआईआर दर्ज की गई है। परंतु पीड़ित पक्ष का कहना है कि एफआईआर में जिन कई आरोपियों के नाम दर्ज हैं, वे अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। इसके विपरीत पीड़ितों पर ही कथित गौ-तस्करी का मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
मध्यप्रदेश किसान सभा के अध्यक्ष अशोक तिवारी, महासचिव अखिलेश यादव ने यहाँ जारी बयान में कहा कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकारों में संघ परिवार से जुड़े इन गुंडों द्वारा चलाया जा रहा शासन पूरी तरह से जंगलराज है। मवेशी व्यापारियों और पशुपालकों, विशेषकर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।  गो-रक्षा के नाम पर बनी गुंडा गिरोहों ने 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों पर हिंसा और लिंचिंग की अनेक घटनाएं की हैं। इंडिया स्पेंड के अध्ययन (2010-2017) के अनुसार गो-हिंसा में मारे गए लोगों में 86% मुस्लिम थे और इनमें से 97% घटनाएँ 2014 के बाद हुईं। ह्यूमन राइट्स वॉच (2015-2018) के अनुसार कम से कम 44 लोगों की हत्या गो-हिंसा में हुई, जिनमें से 36 मुस्लिम थे।
किसान नेताओं ने बताया कि जुलाई 2018 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गो-रक्षा और भीड़ हिंसा पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें प्रत्येक ज़िले में एसपी स्तर के नोडल अधिकारी की नियुक्ति, फास्ट-ट्रैक अदालतों द्वारा छह माह में मुकदमों का निपटारा, पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना, संसद द्वारा विशेष कानून बनाने की सिफारिश तथा राजमार्गों पर गश्त बढ़ाने का आदेश शामिल था। अदालत ने राज्यों से प्रभावित जिलों की पहचान कर रिपोर्ट देने को भी कहा था।  प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद संसद में लिंचिंग विरोधी कानून पारित नहीं किया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने भी मॉब लिंचिंग से हुई हत्याओं का डेटा इकट्ठा करना बंद कर दिया है, जो मोदी सरकार की पक्षपातपूर्ण और गैर-जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाता है।

मध्यप्रदेश किसान सभा और अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा है कि यह हमला  किसानों और मवेशी अर्थव्यवस्था पर हमला है। एनएसएस स्थिति मूल्यांकन सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार किसानों की आय का 29% हिस्सा पशुपालन क्षेत्र से आता है, जिसमें मवेशी अर्थव्यवस्था भी शामिल है। लेकिन मवेशी व्यापार और परिवहन को गो-रक्षा गुंडों द्वारा रोकने के कारण पशुपालकों को अपनी संपत्ति का उचित मूल्य नहीं मिल रहा और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मजबूरन किसान अपने पशुओं को छोड़ने लगे हैं। नतीजतन आवारा पशुओं की समस्या गाँव, कस्बों और शहरों में फसलों और जन-जीवन पर गंभीर खतरा बन गई है। इससे संकटग्रस्त कृषि और अधिक गहराई में पहुँच गई है।

किसान सभा ने  सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और कठोर सजा सुनिश्चित करने, 2014 से लेकर अब तक मोदी सरकार के दौरान हुई सभी लिंचिंग घटनाओं की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराने,  सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार लिंचिंग विरोधी कानून बनाने,  भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर तत्काल कार्रवाई करने,  पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और एक रोजगार देने तथा  मवेशी अर्थव्यवस्था और कृषि को बचाने के लिए पशु बाजार और पशु व्यापारियों की सुरक्षा करने की मांग की है ।
किसान सभा ने  किसानों और किसान संगठनों से अपील की  है कि वे जनजागरण चलाकर केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाएं, ताकि पशु बाजार और पशु व्यापारियों की रक्षा हो सके, मवेशियों का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित हो, पशुधन का उचित मूल्य मिले और मवेशी अर्थव्यवस्था व कृषि को बचाया जा सके।

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