उत्तर प्रदेश : योगी सरकार में भ्रष्ट अधिकारी लूट रहे मजदूरों का हक, कैबिनेट मंत्री चुप क्यों?

मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की योगी राज में ग़रीब मेहनतकश मजदूरों के हक पर भ्रष्टाचार का दीमक लग चुका है। सरकार द्वारा श्रमिकों और उनके परिवार के हित में चलाईं गई योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ उन्हें (श्रमिकों) मुंह चिढ़ा रही है। ऐसे ही एक मामले में राज्य के मिर्जापुर जिले में चर्चित श्रम विभाग के भ्रष्टाचार मामले में मिर्जापुर असंगठित कामगार यूनियन (माकू) के महामंत्री द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। माननीय अरूण भंसाली मुख्य न्यायाधीश, क्षितिज शैलेन्द्र न्यायमूर्ति की अदालत ने कड़े शब्दों में बचाव पक्ष के अधिवक्ता से पूछा है कि इतनी शिकायतों के बाद भी अब तक कार्यवाही क्यों नही की गयी? प्रतिवादी के समय मांगने पर न्यायाधीश की डबल बेंच ने अगली पेशी 21 नवम्बर तक आवश्यक कार्यवाही कर अवगत कराने को कहा है।

बताते चलें कि माकू ट्रेड यूनियन महामंत्री मंगल तिवारी (पत्रकार) की तरफ से अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद देवांश मिश्रा, अनुप शुक्ला ने मजबूती से अपना पक्ष रखा और साक्ष्यों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि सरकार द्वारा मजदूरों के लिए संचालित योजनाओं में श्रम विभाग मिर्जापुर द्वारा बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी है। शिकायतों के बाद भी अब तक कार्यवाही के बजाय कागजों की खानापूर्ति की गयी है। प्रस्तुत निर्देशों से यह सपष्ट है कि याचिका में लगाए गए आरोप, जो योजना के प्रावधानों के विपरीत उसके क्रियान्वयन से सम्बन्धित हैं, सही पाए गए हैं, किन्तु प्रतिवादियों ने इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्यवाही करने के बजाय केवल दोषी अधिकारियों को नोटिस जारी करने का कार्य किया है, वह भी बार-बार नोटिस के बाद।

यूपी के श्रम एवं सेवायोजन कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर का जिले में अक्सर आगमन होता रहता है, संभवतः उन्हें इसकी जानकारी है, बावजूद इसके उनकी चुप्पी समझ से परे है। ग़ौर करने की बात है कि श्रम विभाग उत्तर प्रदेश मुख्यालय कानपुर से भी मिर्जापुर में बड़े अधिकारियों का आना जाना है, आश्चर्य की बात यह है कि भ्रमण के दौैरान उन्हें दागी कर्मचारी ज्यादा भांते आएं हैं।

क्या है पूरा मामला?

उप्र के श्रम मंत्रालय द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं में से एक शिशु एवं मातृृत्व बालिका मदद योजनान्तर्गत 2021 में फर्जी तरीके से हितलाभ (राजस्व लाभ) पाने के लिए कूटरचित सरकारी दस्तावेज मसलन, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले सरकारी अस्पताल का जन्म प्रमाण पत्र, प्रसव प्रमाण पत्र तथा ग्राम विकास, पंचायत अधिकारी द्वारा जारी किए जाने वाले परिवार रजिस्टर नकल की कापी लगायी गई, जिसमें आवेदनों की जांच करने वाले श्रम प्रवर्तन अधिकारियों क्रमशः निमेश कुमार पाण्डेय व कौशलेन्द्र सिंह ने जान बूझकर दूरभिसंधि कर अपात्र को पात्र किया। जिसमें कार्यालय में नियुक्त पटल सहायक अरूण दूबे पर भी सुनियोजित तरीके से जालसाजी का आरोप है, जिसकी शिकायत 2023 में मंगल तिवारी ने की थी।

मिर्जापुर असंगठित कामगार यूनियन (माकू) के महामंत्री मंगल तिवारी कहते हैं कि, 

“यह कोई किसी सेे व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि निर्माण श्रमिकों के हक व अधिकार की सुरक्षा के लिए है जो उप्र सरकार द्वारा संचालित है। योजनाओं का लाभ अपात्र की जगह पात्र को मिले यह मेरा प्रयास है जो दोषी होगा उसके लिए कानून है।”

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता, क्रिमिनल पारस नाथ मिश्रा कहते हैं “कूटरचित कर सरकारी अस्पताल का जन्म प्रमाण पत्र या परिवार रजिस्टर नकल बनाना या बनाकर सरकारी योजना हेतु लाभ लेने की नीयत से लगाना, भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4), 336 (3), 336(5) 337 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। इसमें 2 से 7 साल तक की कैद, या जुर्माना, सहित योजना रद्द और वसूली का प्राविधान है।

जांच के अनुसार फर्जी लाभ लेने वाले जिनको फर्जी तरीके से लाभ दिया गया उनमें, पूर्ण रूप से गृृृहणी महिला, किसान, टेलर्स, वाहन चालक, दुकानों में काम करने वाले कामगार, बेरोजगाार, कालीन बुनकर, पीतल बर्तन मजदूर, मिट्टी बर्तन मजदूर, छोटे दुकानदार, रिक्शा चालक के अलावा वे निर्माण श्रमिक जिन्होंने कूटरचित सरकारी दस्तावेज का प्रयोग किया या कराया, जिसके लिए विभागीय कर्मचारी सहित बिचौलिए अक्सर चर्चा में होते हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार एक वायरल सूची में ऐसे मिलते-जुलते नामों का जिक्र है जो सिंडीकेट का हिस्सा हैं, ऐसे नाम का प्रकार इस प्रकार बताया जाता है जो जांच का विषय है। इसकी पुष्टि वे कर सकतें हैं जो बहकावे में आकर इनके चंगुल में फंसे और खाते में पैसे आने के बाद 50 से 70 प्रतिशत बिचौलियों को अधिकारी के नाम पर दे दिए। मसलन, शैलेन्द्र, रविन्द्र, जितेन्द्र, रामआसरे, अभिनव, इन्द्र प्रकाश, संजय, विनोद, राजपति, उदल, बसंतलाल, मुन्ना, सोनू, असलम, शोभो, देवानन्द, अर्जून, गौतम, विवेक, लाल बबुन्दर, कमला प्रसाद, मुलचन्द, मोहन आदि लोगों ने स्वयं या अपने गुर्गो के माध्यम से कूटरचित दस्तावेज तैयार करने या करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और श्रम विभाग की योजना में अजन्मे कन्याओं का कागजों पर जन्म कराकर लिंगानुपात में मिर्जापुर में कन्याओं की बढ़ोत्तरी की।  

सहायक श्रम आयुक्त मिर्जापुर की भूमिका

तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त (संप्रति जनपद प्रतापगढ़) सुविज्ञ सिंह ने अनेकों शिकायतों पर चुप्पी साधे रखी और गड़बड़ियां होने दीं, जिससे मिर्जापुर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया तथा अपने उच्चाधिकारी के ऐसे गम्भीर मामलों में दिए गए जांच निर्देशों की लगातार अवहेलना करते हुए कार्यवाही के बजाय गुमराह किया, जिसका उल्लेख तत्कालीन उप श्रमायुक्त मिर्जापुर क्षेत्र पीपरी, सोनभद्र के पत्र संख्या- 992-98 दिनांक- 01 मई 2024 आदि में है।

तत्कालीन सहायक श्रम आयुक्त सुविज्ञ सिंह के नक्शे कदम पर चलते हुए वर्तमान सहायक श्रम आयुक्त मिर्जापुर सतीश कुमार सिंह की भी भूमिका मिलतीं हुईं प्रतीत हो रही है। मुरादाबाद से स्थानांतरित होकर मिर्जापुर आएं सतीश कुमार सिंह ने जून 2025 में यहां कार्यभार ग्रहण किया है। जिले में आते ही वे आरोपी पटल सहायक अरूण दुबे को अपने सबसे करीब रखा और मुरादाबाद की तर्ज पर काम करना चाहते थे, इसी बीच डीएलसी अरूण कुमार के पत्र संख्या- 3589 दिनांक- 03 सितम्बर 2025 के अनुसार (बोर्ड सचिव के पत्र संख्या एल 252503/2025 (1990-1) दिनांक-27 अगस्त 2025 का हवाला) 1072 मामले में जांच की गयी। 105 में से, फर्जी पाए गए लगभग 90 अपात्रों के पक्ष में भुगतान की धनराशि की वसूली की कार्यवाही के साथ-साथ कम्प्यूटर आपरेटर अरूण दूबे केेेे विरूद्ध परीक्षण कर कार्यवाही हेतु स्पष्ट संस्तुति मांगी गयी। इसी के साथ जांच के दौरान भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं से सम्बन्धित कोई भी महत्वपूर्ण कार्य न लिए जाने का निर्देश था, बावजूद इसके लगभग 15 दिनों से काम लिए जाने की चर्चा है और इसी बीच मीडिया के प्रश्न पर एएलसी सतीश कुमार ने साफ मना कर दिया कि उन्हें आरोपी पटल सहायक से सम्बन्धित कोई लिखित आदेश नहीं है, जिससे वर्तमान सहायक श्रमायुक्त की सरकार विरोधी मंशा से इनकार नहीं किया जा सकता।

उप श्रम आयुक्त मिर्जापुर की भूमिका

उप श्रमायुक्त का पद मंडलीय अधिकारी का है, श्रम विभाग मिर्जापुर का मंडलीय कार्यालय पिपरी, सोनभद्र में हैं। यहां तैनात वर्तमान डीएलसी अरूण कुमार सिंह का कार्यकाल दिसम्बर 2025 तक बताया जाता है। अपने मातहत अधिकारियों से इनका तालमेल ठीक नहीं है, इनके बारेेे में चर्चा है कि यह कागजों के खेल-खेलने में माहिर हैं और अपने आदेश का अनुपालन कराने में असफल, जिसका उदाहरण इन्ही का पत्र संख्या- 3589 है। इस पत्र के बाद जिले में जब भी इनका आगमन होता है आरोपी एवं 1072 मामले से जुड़े लोग आसपास मंडराने लगते हैं जिससे यह प्रतीत होता है कि डीएलसी अपने पत्र पर स्वयं भी कार्यवाही नहीं ही चाहते हैं।

गौरतलब हो कि इस संदर्भ में मिर्जापुर असंगठित कामगार यूनियन के अधिवक्ता ने प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन मंत्रालय, अध्यक्ष उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, श्रम आयुक्त उप्र कानपुर, सचिव उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, जांच अधिकारी  उप श्रम आयुक्त वाराणसी क्षेत्र वाराणसी तथा जिलाधिकारी मिर्जापुर को पक्षकार बनाया गया है।

श्रम विभाग की योजना में किस प्रकार के श्रमिक को मिलता है लाभ

श्रमिकों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ 40 प्रकार के निर्माण श्रमिकों को मिलता है, जिनमें (1) बेल्डिंग का कार्य (2) बढ़ई का कार्य (3) कुआं खोदना (4) रोलर चलाना (5) छप्पर डालने का कार्य (6) राजमिस्त्री का कार्य (7) प्लम्बरिंग (8) लोहार (9) मोजैक पॉलिश (10) सड़क बनाना (11) मिक्सर चलाने का कार्य (12) पुताई (13) इलेक्ट्रिक वर्क (14) हथौड़ा चलाने का कार्य (15) सुरंग निर्माण (16) टाइल्स लगाने का कार्य (17) कुएं से तलछट हटाने का कार्य (18) चट्टान तोड़ने का कार्य या खनिकर्म (19) वर्क-सड़क निर्माण से सम्बन्धित स्प्रे वर्क या मिक्सिंग (20) मार्बल एवं स्टोन वर्क (21) चौकीदारी – निर्माण स्थल पर सुरक्षा प्रदान करने के लिये (22) सभी प्रकार के पत्थर, तोड़ने व पीसने का कार्य (23) निर्माण स्थल पर लिपिकीय व लेखा कार्य करने वाले कर्मकार (24) सीमेन्ट, कंकरीट, ईंट ढोने का कार्य करने वाले (25) बांध, पुल, सड़क निर्माण या भवन निर्माण से सम्बन्धित कोई संक्रिया (26) बाढ़ प्रबन्धन (27) ठंडा व गरम मशीनरी की स्थापना व मरम्मत (28) अग्निशमन प्रणाली की स्थापना व मरम्मत (29) बड़े यांत्रिक कार्य मशीनरी, पुल का निर्माण का कार्य (30) मकानों, भवनों की आन्तरिक सज्जा का कार्य (31) खिड़की, ग्रिल, दरवाजे आदि की गढ़ाई व स्थापना का कार्य (32) माड्यूलर किचन की स्थापना (33) सामुदायिक पार्क या फुटपाथ निर्माण (34) ईंट भट्ठों पर ईट निर्माण कार्य (35) मिट्टी, बालू, मौरंग खनन कार्य (36) सुरक्षा द्वार व अन्य उपकरणों की स्थापना का कार्य (37) लिफ्ट व स्वचालित सीढी की स्थापना का कार्य (38) सीमेन्ट, ईंट आदि ढोने का कार्य (39) मिट्टी का काम (40) चूना बनाना।

करोड़ो रूपये के भ्रष्टाचार का मामला

शिशु एवं मातृृत्व बालिका मदद योजना के नियमानुसार प्रत्येक महिला निर्माण श्रमिक को पुत्री के जन्म पर लगभग रु. 52,000/- पुत्र के जन्म पर 47,000/- तथा पुरूष निर्माण श्रमिक को पुत्री के जन्म पर 31,000/- पुत्र के जन्म पर 26,000/- से अधिक मिलता है।

1072 आवेदनों में सेे की गयी 105 की जांच में 90 फर्जी आवेदनों से आकड़े को देखा जाय तो इसका प्रतिशत फल 85 है। इस प्रकार से 1072 में लगभग 910 आवेदन अपात्र हो सकते हैं। यदि प्रत्येक को 35 हजार रूपये की भी धनराशि भुगतान मानी जाय तो यह आकड़ा 03 करोड़ से अधिक का होता है। इसी प्रकार से 2021 से लेकर 2023 तक शिशु एवं मातृृत्व बालिका मदद योजना के अलावा कन्या विवाह सहायता योजना तथा मृृत्यु एवं विकलांगता सहायता योजाना में फर्जी तरीके से लाभ देकर बोर्ड के करोड़ों रूपये का बंदरबांट किया गया है।

बहरहाल, मिर्जापुर श्रम विभाग के बहुचर्चित 1072 मामले पर उच्च न्यायालय में दायर की गई जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के तल्ख़ तेवर ने जांच की जद में आएं श्रम विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों सहित बिचौलियों की नींद उड़ा दी है, जो जांच को प्रभावित करने के लिए ऐड़ी-चोटी एक किए हुए थे। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी कहां तक आरोपों के जद में आए हुए संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित कराते हुए योजनाओं के नाम पर हुए सरकारी धन का रिकवरी सुनिश्चित करा पाने सफ़ल हो पाते हैं।

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