बनारस। बनारस में निजी अस्पतालों का सच बड़ा भयावह है। यहां इलाज करवाने में आपके जान और माल दोनों का खतरा है। आंख की रेटिना का ऑपरेशन के लिए गई 7 साल की अनाया रिजवान लाश बन गई। अनाया की मां आफरीन का कहना है कि हमसे बार-बार झूठ बोला गया कि सब ठीक है जबकि सब खत्म हो रहा था। हम से कहा गया था कि छोटा सा आपरेशन है एक घंटे में हो जाएगा जब कई घंटे बीत गए तो मैं आपरेशन थियेटर में गयी मैंने देखा कि मेरी बेटी उल्टी पड़ी हुई है डॉ. क्या कोई एक शख्स उसके पास नहीं था। बाद में हम से कहा गया दूसरे अस्पताल ले जाना होगा।
एम्बुलेंस में मैं बैठने गई तो मुझे रोक दिया गया कहा आप आशीर्वाद अस्पताल पहुंचिए हम लोग वहां पहुंचे तो वहां अनाया को नहीं लाया गया था। फोन किया तो पापुलर अस्पताल आने को कहा गया वहां जाने पर वही कहानी दोहराई गई कहा गया महमूरगंज स्थित मैट केयर अस्पताल पहुंचे वहां जब पहुंचे तो हम से बीस हजार रुपए जमा करवाया गया। उन्होंने अनाया को वेंटिलेटर पर डाल दिया। और थोड़ी ही देर में सब खत्म हो गया।
बीते 16 अक्टूबर को कक्षा 2 में पढ़ने वाली अनाया को उसके घर वाले महमूरगंज स्थित ASG Eye hospital ले गए थे जहां उसके आंख का आपरेशन होना था। अनाया का इलाज वहां पहले से चल रहा था। घंटों इंतजार के बाद आपरेशन के लिए अनाया को ले गए। डॉ कार्तिकेय ने आपरेशन किया। आपरेशन थियेटर के बाहर घर वाले घंटों इंतजार करते रहे। घर वालों का कहना है कि उन्होंने डॉ कार्तिकेय को आपरेशन थियेटर से बाहर निकल कर जाते देखा। और वक्त गुजरा तो अनाया की मां आपरेशन थियेटर के अन्दर पहुंची उनके अनुसार मैंने देखा अनाया अकेले स्ट्रेचर पर पड़ी थी। थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने अनाया को दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए कहा। घर वालों से उसकी बिगड़ती हालत को छुपाया जाता रहा। बाद में उसे महमूरगंज स्थित मैट केयर मैटरनिटी एंड चाइल्ड केयर अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई।
इस मामले में अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर वाराणसी के जिलाधिकारी प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव को तत्काल उच्च स्तरीय जांच का आदेश देने का अनुरोध किया है। उधर परिजनों ने भी भेलूपुर थाने में तहरीर देकर ASG Eye hospital और मैटकेयर मैटरनिटी एंड चाइल्ड हास्पिटल आपरेशन थियेटर के सीसीटीवी फुटेज, वेंटिलेशन, एनेस्थीसिया संबंधी रिकार्ड सहित मरीज की भर्ती से मृत्यु तक के सभी चिकित्सकीय रिकॉर्ड बरामद किए जाने की बात कही है, ताकि साक्ष्य नष्ट न किए जा सकें।
मजे की बात यह है कि बनारस में निजी अस्पतालों में चल रही संगठित जान ओ माल की लूट पर आप कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। ये अस्पताल मरीजों के परिजनों से जमकर उगाही (पैसों की लूट) के साथ-साथ मरीजों को मार कर परिजनों को सौंप देते हैं। हतप्रभ, बेबस और आहत परिजन बस आंसू पीकर लौट जाते हैं। इनके हक में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट खड़ा है हर अस्पताल में ये बोर्ड आपको टंगा मिलेगा। लेकिन मरीजों के हित में उनकी सुरक्षा के लिए कोई पेशेंट प्रोटेक्शन एक्ट दूर-दूर कहीं नजर नहीं आएगा। बनारस में निजी अस्पतालों में संगठित लूट जारी है शायद ही किसी निजी अस्पताल के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई हुई होगी। कोरोना काल में भी निजी अस्पतालों से जुड़े ढेरों लूट के किस्से सामने आए पर हुआ कुछ नहीं।
बीते दिनों सुंदरपुर स्थित एपेक्स अस्पताल में भी इसी तरह मरीज की मौत हो गई थी परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। मौतों की पूरी एक श्रृंखला चल रही है इन अस्पतालों में अगला शिकार कौन बन जाए कहा नहीं जा सकता है। बचेंगे कैसे? आम आदमी के साथ कौन है? अनाया का जाना इन अस्पतालों के आदमखोर चरित्र को उजागर कर रहा है।
चिकित्सा के नाम पर करोड़ों का बाजार है। और उस बाजार में मरीज वो एटीएम है जिसे निचोड़कर छोड़ना है।
डॉ कार्तिकेय ने किया अनाया की मां को फोन
घटना के बाद हंगामा मचा मामला थाने तक पहुंचा तो ASG Eye hospital में अनाया का आपरेशन करने वाले डॉक्टर कार्तिकेय ने अनाया की मां आफरीन को फोन कर अस्पताल आकर एक बार बात करने को कहा। बातचीत में आफरीन को कहते हुए सुना जा सकता है कि उस दिन अस्पताल में अनाया की हालत बिगड़ने पर मैं आपसे बात करवाने के लिए सबसे मिन्नतें करती रही लेकिन किसी ने बात नहीं करवाया। आफरीन कहती हैं आप क्यों चले गए मेरी नन्ही सी बेटी आपरेशन थियेटर में अकेले पड़ी रही उसके पास कोई नहीं था। आप कैसे जा सकते थे।
(वाराणसी से भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट।)