ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने कमज़ोर वर्गों के छात्रों को स्कालरशिप न मिलने पर चिंता व रोष जताते हुए कहा है कि स्कॉलरशिप न मिलने से राज्य की उच्च शिक्षा को संकट की ओर धकेलने जैसा है।
उल्लेखनीय है कि ई-कल्याण स्कॉलरशिप का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों का ड्रॉपआउट रेट कम करना तथा यह सुनिश्चित करना शामिल है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई आर्थिक बोझ के कारण बाधित न हो। इस योजना का मकसद झारखंड के छात्रों को सामान्य पाठ्यक्रमों के साथ-साथ डिप्लोमा, डिग्री, इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि कोर्स करने के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करना है। लेकिन आज महीनों और वर्षों से राज्य में पिछले सत्र तक का स्कॉलरशिप छात्रों को नहीं मिल पाया जिसके कारण उक्त उद्देश्य अधूरा रह गया है।
इसी मुद्दे पर आईसा ने राज्य के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के जैकब हॉल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आइसा झारखंड राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि झारखंड के छात्र जो राज्य के भीतर या बाहर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं। स्कॉलरशिप न मिलने के कारण पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित वे छात्र हैं जो सुदूरवर्ती इलाकों से आते हैं और विशेष रूप से अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों और महिला समुदायों से संबंधित हैं। वर्तमान में सत्र 2024–25 के छात्र, जो सामान्य पाठ्यक्रमों के अलावा सेल्फ-फाइनेंस कोर्स जैसे वाणिज्य, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग और मेडिकल में अध्ययनरत हैं, या तो पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं या फिर लोन लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। इससे भविष्य में छात्रों पर ऋण का दबाव और बढ़ेगा। आइसा की मांग है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार, जिनकी स्कॉलरशिप योजना में क्रमशः 60% और 40% की हिस्सेदारी है, तुरंत कार्रवाई करें। राज्य सरकार ने अपनी राशि आवंटित कर दी है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक अपना हिस्सा जारी नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार झारखंड में सस्ता मजदूर तैयार करने पर तुली हुई है और फैक्ट्री मालिकों तथा पूंजीपतियों के लिए बंधुआ मजदूर तैयार करने की दिशा में बढ़ रही है।
आइसा राज्य उपाध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने बजट सत्र 2025–26 में शिक्षा बजट के अंतर्गत अलग से स्कॉलरशिप राशि का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार ने 4,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, वहीं झारखंड सरकार ने ओबीसी छात्रों के लिए लगभग ₹1,62,79,000 की राशि निर्धारित की है। इसके बावजूद रांची जिले में बीसी छात्र अब तक मात्र 1,454 छात्र ही इसका लाभ ले पाए हैं, जबकि पिछले सत्र 2023–24 में यह संख्या लगभग 60 हजार थी। गैर-आदिवासी क्षेत्रों को मिलने वाली राशि अभी तक लंबित है, जिसे सरकार जल्द से जल्द आवंटित करे। आइसा की हमेशा से मांग रही है कि शिक्षा पर व्यय बढ़ाकर बजट का कम से कम 10वां हिस्सा शिक्षा को समर्पित किया जाए। लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद फीस में कई गुना वृद्धि हुई है। अब छात्र ऋण लेकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, और जो छात्र ऋण नहीं ले पा रहे हैं, वे पढ़ाई छोड़ने को विवश हैं। इसका सबसे अधिक असर आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों के छात्रों पर पड़ रहा है। ड्राॅपआउट दर भी लगातार बढ़ रही है। उदाहरण के तौर पर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में कई सेल्फ-फाइनेंस कोर्स की आधी सीटें रिक्त रह जाती हैं।
डीएसपीएमयू सचिव अनुराग रॉय ने कहा कि झारखंड के छात्रों को स्कॉलरशिप न मिलना, राज्य की उच्च शिक्षा को और अधिक संकट में धकेल रहा है। झारखंड पहले से ही राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है।
वहीं आइसा झारखंड राज्य सह सचिव मोहम्मद समी ने कहा कि सरकार न तो सम्मानजनक रोजगार दे रही है और न ही छात्रों को स्कॉलरशिप उपलब्ध करा रही है। ऐसे में यदि छात्र ऋण लेकर पढ़ाई भी कर लें, तो बिना रोजगार के वह ऋण कैसे चुका पाएंगे? आइसा मांग करती है कि जल्द-से-जल्द स्काॅलरशिप की राशि छात्रों को प्रदान की जाए। यदि यह मांग जल्द पूरी नहीं होती है, तो आइसा उग्र आंदोलन की ओर आगे बढ़ेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रांची जिला सचिव संजना मेहता, विवेक कुमार, पूनम कुमारी, अनुपम महतो, राहुल महतो उपस्थित रहे।