विस्थापन विरोधी संघर्ष मोर्चा ने झारखंड सरकार के मण्डल डैम क्षेत्र अंतर्गत गढ़वा जिले का भंडरिया प्रखंड के 7 गांवों कुटकू, भजना, खूरा, चपिया, मतगड़ी, चेमो और सनया के 780 परिवारों को रंका प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत और रमकंडा प्रखंड के बलिगढ़ पंचायत में बसाने के फैसले की निंदा की है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार द्वारा मंत्रिमंडल की एक बैठक में इस आशय का निर्णय किया गया था।
यह योजना शहीद नीलाम्बर–पिताम्बर, उत्तर कोयल जलाशय परियोजना के निर्माण के लिए है या पलामू ब्याघ्र परियोजना क्षेत्र का विस्तार के लिए यह स्पष्ट नहीं किया गया है, बावजूद वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा इन 7 गांवों के 780 परिवारों को स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए किसी अन्यत्र वनभूमि में बसाने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि मण्डल डैम क्षेत्र के जिन 7 गांवों के 780 परिवारों जबरन बेदखली में अब तक किसी भी तरह की विधिक एवं प्रशानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिन विस्थापन विरोधी संघर्ष मोर्चा द्वारा विश्रामपुर के पंचायत भवन में विस्थापन एवं पुनर्वासित गांवों के लोगों व कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्त्ताओं की एक बैठक की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए क्रांतिकारी किसान मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पाल ने कहा कि सरकार शहीद नीलाम्बर-पिताम्बर उत्तर कोयल जलाशय परियोजना का निर्माण करना चाहती है या कि पलामू ब्याघ्र परियोजना क्षेत्र का विस्तार, इसे स्पष्ट नहीं किया गया है, अतः सरकार इसे स्पष्ट करे।
उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण दिशा-निर्देशों के तहत वन विभाग ब्याघ्र परियोजना क्षेत्र का विस्तार के लिए विधिक एवं प्रशानिक प्रक्रियाओं के पूरी हो जाने के बाद ही परिवारों को स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए किसी अन्यत्र वनभूमि में बसा सकती है। जबकि मण्डल डैम क्षेत्र के जिन 7 गांवों के 780 परिवारों का जबरन बेदखली में अब तक किसी भी तरह की विधिक एवं प्रशानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि रंका प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत और रमकंडा प्रखंड के बलिगढ़ पंचायत में इन लोगों को बसाने की योजना काफी विसंगतपूर्ण है। क्योंकि यहां के ग्रामसभा का मानना है कि जिन लोगों को यहां बसाया जाएगा यानी पुनर्वासित किया जाएगा तो यहां के लोगों की परेशानी बढ़ेगी और सामाजिक असंतुलन बढ़ेगा।
पाल ने बताया कि यहां बिना ग्रामसभा की अनुमति के ऐसा कदम उठाने की कोशिश हो रही है जो पांचवी अनुसूची का खुलेआम उलंघन है। उक्त मामले पर न तो बलिगढ़ पंचायत के ग्रामसभा से, न ही विश्रामपुर पंचायत के ग्रामसभा से पूछा जा रहा है और न ही जहां से लोगों को लाया जा रहा है वहां के ग्रामसभा से पूछा जा रहा है।
बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के सदस्य त्योफिल लकड़ा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्रामीण जान कुर्बान करने को तैयार हैं, लेकिन अपने पूर्वजों के नैसर्गिक धरोहर वन भूमि से बेदखल नहीं होंगे।
वन मंत्रालय द्वारा 29 नवम्बर 2023 को जारी दिशा-निर्देश में स्पष्ट उल्लेखित है कि परिवारों को जो विस्थापित किए जाने वाले हों अथवा पुनर्वासित किए जानेवाले ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र वाली वनभूमि हो, दोनों गांवों में राज्य सरकार को ये सुनिश्चित करना है कि सम्बंधित ग्राम सभाओं का अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम का पूर्णत: अनुपालन कर ली गई है।
त्योफिल लकड़ा ने बताया कि पलामू के पोलपोल कला गांव में बारेसांढ रेंज लाटू और कुजरूम गांव से स्वैच्छिक पुनर्वासित किए गए रैयतों के मामले में सरकारी दस्तावेज वनाधिकार कानून प्रक्रिया का पालन करने के पुष्टि करते हैं। दस्तावेजों के अनुसार ग्राम सभा पोलपोल कला से भी 02/09/2017 को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त की गई। इसके आलोक में 10/01/2018 को अनुमण्डल स्तरीय वनाधिकार समिति ने परियोजना हेतु प्रस्ताव पारित कर जिला स्तरीय वनाधिकार समिति को अनुशंसा भेजी। अनुशंसा के आलोक में 11/01/2018 को जिला प्रस्ताव पारित कर परियोजना हेतु वनभूमि के अपयोजन के लिए मंजूरी दी है। सरकार की दोनों बैठकों में ग्राम विकास समिति को क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान का उल्लेख किया गया है।
लेकिन यहां विश्रामपुर और बलिगढ़ ग्राम सभाओं के मामले में वन विभाग पूरी तरह लोगों को अँधेरे में रख रहा है। यहां की किसी ग्राम सभा ने कोई अनापत्ति प्रमाण वन विभाग या जिला प्रसाशन को निर्गत नहीं किया है। दोनों ग्राम सभाओं के सामुदायिक और व्यक्तिगत दावे अभी सरकार के पास लंबित हैं।
बैठक में कुटकु डुब क्षेत्र शहीद निलाम्बर-पिताम्बर संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मिखाएल केरकेट्टा ने कहा कि हम शहीद नीलाम्बर–पिताम्बर के वंशज हैं। शहीदों के जन्मस्थली चेमो सनया का अपना गौरवमय इतिहास रहा है।
मिखाएल केरकेट्टा ने बताया कि हमने इस धरोहर को मण्डल डैम में न तो जमींदोज होने दिया और न इसे किसी भी कीमत पर बाघ अभ्यारण्य में जाने देंगे। बल्कि आगामी 11 जनवरी 2026 को दोनों इतिहास पुरुषों के जन्म दिवस एवं स्थान पर इलाके भर के बहादुर ग्रामीण महिला, पुरुष और बच्चे अपने पूर्वजों के आदमकद मूर्ति का अनावरण करेंगे। इसमें देश के दूसरे हिस्सों से भी संयुक्त किसान मोर्चा के नेतागण शामिल रहेंगे।
बामसेफ के जिलाध्यक्ष सह अधिवक्ता विनय पाल ने कहा कि विस्थापन की इस विकराल लड़ाई को अब और अधिक तेज करना होगा। इसे सड़कों से सदन तक और न्यायिक लड़ाई भी लड़नी होगी। संघर्ष के अगले दौर में जल्द ही चरणबद्ध आन्दोलन की रणनीतियां तय कर पूर्व जेएमएम विधायक से पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर के आवास का घेराव प्रभावित क्षेत्र के सारे ग्रामीण करेंगे। पलामू में पूर्व मंत्री श्री के० एन० त्रिपाठी के आवास का घेराव किया जायेगा। वन विभाग के विरुद्ध शिकायतें स्थानीय प्रशासन सहित आदिवासी मंत्रालय एवं आयोगों में दर्ज किए जायेंगे।
अन्य वक्ताओं में संयुक्त किसान मोर्चा के राजेश कुमार, वन अधिकार समिति विश्रामपुर के सचिव राजेश लकड़ा, जगेश्वर कुजूर, पीपीडी के गढ़वा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी वृदा राम, सुदेश्वर कुजूर, बलिगढ़ के पूर्व मुखिया सरजू सिंह खरवार, सुकन भुईयाँ, अमरदयाल सिंह खरवार, डूब क्षेत्र संघर्ष मोर्चा के उपाध्यक्ष काशीनाथ सिंह, उपसचिव अलबिस मिंज, कोषाध्यक्ष अनिल हपदगड़ा, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के अजय सिंह खरवार सहित अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
बताते चलें कि नीलाम्बर-पीताम्बर झारखंड के दो भाई जो खरवार जनजाति के थे। जिन्होंने 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्हें अंग्रेजों द्वारा 28 मार्च 1859 को फांसी दी गई थी।
इनके नाम पर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय है जो झारखंड के डालटनगंज में है।
वहीं नीलांबर-पीतांबर उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना भी है, जिसे योजनागत तौर पर इस परियोजना का उद्देश्य झारखंड के पलामू और गढ़वा तथा बिहार के औरंगाबाद और गया जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई प्रदान करना है।
यह परियोजना उत्तरी कोयल नदी पर एक बांध और एक बैराज के निर्माण से संबंधित है और इसका लक्ष्य कथित रूप से भूमि को सिंचित करना है।